ई सिगरेट ने मौत की कगार पर पहुंचाया! | विज्ञान | DW | 25.11.2019
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

विज्ञान

ई सिगरेट ने मौत की कगार पर पहुंचाया!

तेज बुखार, उल्टी और डायरिया के कारण ग्रेगरी रोड्रिग्ज जब न्यू यॉर्क के एक अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती हुए तो उन्हें लगा कि किसी वायरस का संक्रमण हुआ है.

मरीज के रूप में अस्पताल में भर्ती होने के दो दिन बाद रोड्रिग्ज बेहोश हो गए और तब से उन्हें एक कृत्रिम फेफड़े पर जिंदा रखा गया. उनके दोनों फेफड़ों को ट्रांसप्लांट किए जाने की तैयारी शुरू हो गई. इसी साल सितंबर में मौत की कगार पर पहुंचे कंप्यूटर साइंस के 22 वर्षीय छात्र ग्रेगरी रोड्रिग्ज ने घटना के दो महीने बाद अपनी आपबीती समाचार एजेंसी एएफपी को सुनाई.उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगा था कि बीमार होने से वेपिंग का कुछ लेना देना है." डॉक्टरों ने इसके लिए लगातार ई सिगरेट फूंकने को जिम्मेदार बताया है.

बीमार होने के बाद रोड्रिग्ज को सबसे पहले जिस डॉक्टर के पास ले जाया गया उसे भी इस मामले में वेपिंग का हाथ होने का अंदाजा नहीं था. डॉक्टरों ने ग्रेगरी को भी कुछ एंटीबायोटिक दवाएं देकर घर भेज दिया था. उन्हें लगा कि मामूली संक्रमण हुआ है.

USA Fall Gregory Rodriguez (Getty Images/AFP/K. Betancur)

अपनी मां के साथ ग्रेगरी रोड्रिग्ज

हालांकि रोड्रिग्ज को तुरंत ही अस्पताल ले आना पड़ा क्योंकि वह सांस नहीं ले पा रहे थे. तब उन्होंने डॉक्टरों को बताया कि वे बीते दो सालों से वेपिंग के जरिए भांग का इस्तेमाल कर रहे हैं. रोड्रिग्ज ने बताया, "पहले मैं उन्हें बताने से हिचक रहा था क्योंकि दुर्भाग्य से न्यू यॉर्क राज्य में टीएचसी (टेट्राहाइड्रोकैनाबिनॉल) अब भी गैरकानूनी है."

18 सितंबर को ग्रेगरी के शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया. उन्हें वेंटिलेटर पर डाला गया लेकिन यह भी पर्याप्त नहीं था. सांस में ली गई हवा के अत्यधिक प्रज्वलन से उसके फेफड़ों में कस्टर्ड जैसा एक चिपचिपा पदार्थ भर गया था. इस वजह से उसके खून में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रहा था.

उसका इलाज करने वाली डॉ मंगल नरसिम्हन ने बताया, "वह कुछ घंटों में मरने वाला था." आखिरी उपाय के रूप में डॉक्टरों ने रोड्रिग्ज को ईसीएमओ (एक्सट्राकॉर्पोरियल मेम्बरेन ऑक्सीजनेशन) मशीन पर डाला गया. यह मशीन मरीज के शरीर से खून निकाल कर उसमें ऑक्सीजन मिलाती है और फिर उसे शरीर की नसों में वापस डालती है.

तीन दिनों तक रोड्रिग्ज को कोमा में रखा गया ताकि इस प्रक्रिया के दौरान उसे और नुकसान ना पहुंचे. डोड्रिग्ज ने बताया, "जब मैं बाहर आया तो मेरे मुंह में एक ट्यूब लगी थी जो मेरे फेफड़ों तक जा रही थी." उनकी मां ने उन्हें बेहोशी के दौरान ली गई तस्वीरें दिखाईं. आखिरकार उनके फेफड़ों ने मशीन की मदद से दोबारा काम करना शुरू कर दिया और फेफड़ों को बदलने की जरूरत नहीं रह गई. 12 दिन अस्पताल में बिताने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई. इस तरह के दूसरे मरीजों की तुलना में उन्हें कम ही समय अस्पताल में रहना पड़ा. हालांकि उनकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी.

USA Fall Gregory Rodriguez (Getty Images/AFP/K. Betancur)

डॉ मंगला नरसिम्हन

इसी अस्पताल में 40 से ज्यादा ऐसे मरीज भर्ती हुए और उनमें से पांच की हालत ग्रेगरी जैसी ही गंभीर है. अमेरिका में केवल इस साल वेपिंग की वजह से 47 लोगों की मौत हो चुकी है और पूरी दुनिया में इसकी वजह से 2,290 लोग बीमार हुए हैं. विशेषज्ञ लोगों की बीमारी के लिए विटामिन ई एसीटेट को जिम्मेदार मानते हैं. यह टीएचसी वेपिंग फ्लुइड में होता है.

ठीक होने के बाद भी पहले कुछ दिन बेहद मुश्किल थे. अस्पताल से निकलने के बाद परिवार के साथ रह रहे रोड्रिग्ज ने बताया, "बहुत मुश्किल था, केवल चलना या फिर ऊपर की मंजिल पर जाना भी बहुत ज्यादा कठिन था." दो महीने बीतने के बाद अब उन्हें सांस लेने में तो दिक्कत नहीं होती लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक उसके फेफड़ों की क्षमता घट कर 60 फीसदी रह गई है.

रोड्रिग्ज ने कहा, "शारीरिक रूप से अब मैं सामान्य हूं, अब बस मानसिक परेशानी रह गई है, इसे ठीक होने में समय लगेगा." रोड्रिग्ज को अब भी मारिजुआना की तलब होती है. उन्होंने बताया, "मैं इसे नशा तो नहीं कहूंगा लेकिन ऐसे भी दिन थे जब मेरे मन में उनका ख्याल आता था."

रोड्रिग्ज टीएचसी के सेवन के लिए उसकी एक कार्ट्रिज 16 डॉलर में क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन के जरिए खरीदते थे. न्यू यॉर्क के दुकानदार इसे आमतौर पर 40 डॉलर में बेचते हैं. इस साल गर्मियों में तनाव से जूझने के कारण उसने ई सिगरेट का प्रयोग बढ़ा दिया था. एक कार्ट्रिज को केवल दो दिन में खत्म कर देने वाले रोड्रिग्ज इसी के चलते मरने मरते बचे हैं. 

एनआर/आरपी (एएफपी)

__________________________
हमसे जुड़ें: WhatsApp | Facebook | Twitter | YouTube | GooglePlay | AppStore

DW.COM

विज्ञापन