ईरान में मोसाद के जासूस को फांसी | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 28.12.2010
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जर्मन चुनाव

ईरान में मोसाद के जासूस को फांसी

ईरान ने अपने ही देश के एक नागरिक को इस्राएल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम करने का दोषी करार देने के बाद फांसी दे दी है. ईरान का कहना है कि यह शख्स 2004 से मोसाद के लिए काम कर रहा था और दो साल पहले पकड़ा गया था.

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ईरान में आम है फांसी की सजा

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने न्याय विभाग के एक बयान के आधार पर रिपोर्ट दी है कि अली अकबर सियादत को फांसी दे दी गई है. उसे 2008 में उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वह पत्नी के साथ ईरान छोड़ कर भागने की कोशिश कर रहा था. ईरान में उस पर मोसाद को खुफिया मामलों की जानकारी देने का आरोप साबित हो चुका था.

ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ही इस्राएल के साथ उसका छत्तीस का आंकड़ा है. ईरान इस्राएल को मान्यता नहीं देता है और बार बार कहता आया है कि उसके देश में कई लोगों को इस्राएल के लिए जासूसी के इलजाम में पकड़ा गया है.

इरना की रिपोर्ट में कहा गया है, "अली अकबर सियादत ने मोसाद के लिए जासूसी की. उसे आज सुबह तेहरान की एविन जेल में फांसी दे दी गई. उस पर भ्रष्टाचार को बढ़ाने, ईरान के खिलाफ काम करने और इस्राएल को मदद देने का आरोप साबित हुआ."

इरना की रिपोर्ट में कहा गया है कि सियादत ने कबूल किया था कि मोसाद को खुफिया जानकारी देने के बाद उसे 60,000 डॉलर दिए गए. सियादत ने ईरान की सेना के बारे में खास जानकारी मोसाद को दी. इरना के मुताबिक उसे एक लैपटॉप सहित विशेष उपकरण दिए गए, जिसकी मदद से वह मोसाद से संपर्क कर सकता था.

रिपोर्ट में बताया गया है कि सियादत ने इस्राएल के एजेंटों से तुर्की, थाइलैंड और नीदरलैंड्स के अलावा कई दूसरे देशों में भी मुलाकात की. उसने उन्हें ईरान के सैनिक ठिकानों, सैनिक अभ्यास और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की मिसाइल सुरक्षा योजना की जानकारी दी.

इससे पहले 2008 में अली अशतारी नाम के ईरानी शख्स को भी मोसाद के लिए काम करने के आरोप में फांसी दी गई थी. हालांकि इस्राएल ने इस मामले में अपना हाथ होने से इनकार किया था. ईरान अकसर इस्राएल और अमेरिका पर आरोप लगाता है कि ये दोनों देश ईरान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. मध्य पूर्व में इस्राएल इकलौता देश है, जिसके पास परमाणु हथियार हैं. पश्चिमी देश ईरान पर भी परमाणु हथियार बनाने के आरोप लगाते हैं.

रिपोर्टः रॉयटर्स/ए जमाल

संपादनः ए कुमार

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