ईयू के 8 नए सदस्यों के लिए श्रम बाजार खुला | दुनिया | DW | 30.04.2011
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दुनिया

ईयू के 8 नए सदस्यों के लिए श्रम बाजार खुला

पहली मई से 8 मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के कामगारों के लिए जर्मनी में काम करने पर लगा प्रतिबंध समाप्त हो गया है. अब इन देशों के लोग बिना वर्क परमिट के काम कर सकेंगे. ट्रेड यूनियनों को वेतन डंपिंग की आशंका है.

!! Zu Reichstein, Wir sind gegen kleine Bomben geschützt - Zu Besuch beim schengener Zentralcomputer in Straßburg !! A car drives freely through a border check in Petrovice, a border area of Germany and Czech Republic, on Dec. 22, 2007. Nine European Union countries -- Estonia, Hungary, Latvia, Lithuania, Malta, Poland, Slovenia, Slovakia and the Czech Republic -- officially joined the passport-free Schengen Area at 0:00 a.m. Friday local time, which allows moving freely throughout Schengen nations. Xinhua /Landov +++(c) dpa - Report+++

एस्तोनिया, लिथुएनिया, लाटविया, पोलैंड, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, हंगरी और चेक गणतंत्र के लोगों के लिए 7 साल की यूरोपीय संघ की सदस्यता के बाद श्रम बाजार की बराबरी की दिशा में लंबी छलांग है. अब उन्हें संघ के पुराने सदस्य देश जर्मनी में काम करने के लिए वर्क परमिट नहीं लेना होगा. इन देशों में साढ़े सात करोड़ लोग रहते हैं. वहां से हर साल एक लाख प्रवासियों के आने की उम्मीद की जा रही है.

The first bus from the Polish city of Swinemuende is ready to pass under dismantled border barrier on the German-Polish border in Ahlbeck, northern Germany, early Friday, Dec. 21, 2007. Poland was in the so-called Schengen borderless zone of the EU, which grew by nine countries Dec. 21 to a total of 24 countries. (AP Photo/Frank Hormann)

जर्मनी ने यूरोपीय संघ में कामगारों के मुक्त प्रवाह को जर्मनी के लिए संभावना बताया है. सरकार को लगता है कि प्रशिक्षित प्रवासियों के आने से अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों में कामगारों की कमी को दूर किया जा सकेगा.

इसके विपरीत ट्रेड यूनियनों को आशंका है कि नए लोगों की भर्ती सस्ते कामगारों के रूप में की जाएगी और उसके साथ वेतन को नीचे ले जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. जर्मन ट्रेड यूनियन महासंघ डीजीबी इसे रोकने के लिए साढ़े 8 यूरो प्रति घंटे न्यूनतम वेतन और कपंनी के स्थायी तथा टेंपरेरी कर्मचारियों को समान वेतन देने की मांग कर रहा है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: वी कुमार

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