इस फिल्म के हर फ्रेम में है एक पेंटिंग | मंथन | DW | 09.08.2016
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मंथन

इस फिल्म के हर फ्रेम में है एक पेंटिंग

'लविंग विंसेंट' मशहूर डच कलाकार विंसेंट फान गॉग पर बन रही दुनिया की पहली ऐसी फिल्म है जिसके हर एक फ्रेम को कैनवास पर ​हाथों से पेंट किया गया है.

"हम सिर्फ अपनी तस्वीरों के माध्यम से बोल सकते हैं." कहते हैं कि यह बात प्रसिद्ध कलाकार विंसेंट फान गॉग ने मरने से एक हफ्ते पहले लिखी थी. लविंग विंसेंट के निर्माता ने डच कलाकार को उनके शब्दों पर तौला है. यह एनीमेशन फिल्म 60,000 तस्वीरों से मिलकर बनी है. हर एक तस्वीर हाथ से बनाई गई है.

फिल्म के प्रोड्यूसर शॉन बॉबिट बताते हैं कि यह कोई आसान काम नहीं था, "पूंजी लगाने वालों को यह समझाना था कि हम फिल्म पेंट कर रहे हैं. वे कहते कि अजीब बात है, आप ये काम कंप्यूटर पर नहीं कर सकते. हमारे पास लोग आए जिन्होंने कहा कि वे यही काम कंप्यूटर पर कर देंगे, लेकिन अगर आप इसे बड़े पर्दे पर देखें तो उसकी कोई तुलना नहीं है." बॉबिट के अनुसार यह फिल्म लोगों के लिए दुनिया को करीब करीब उसी तरह से देखने का मौका है जैसा फान गॉग देखते थे.

इस फिल्म के लिए आर्टिस्ट तीन जगहों पर काम कर रहे थे. उनका बड़ा हिस्सा पोलैंड के ग्दांस्क शहर में पेंटिंग कर रहा था. इस प्रोजेक्ट के लिए दुनिया भर के 5,000 लोगों ने अर्जी दी थी. उनमें से करीब 100 आर्टिस्ट टेस्ट में कामयाब रहे. टेस्ट में कामयाब आर्टिस्टों का तीन हफ्ते का वर्कशॉप हुआ. फान गॉग के स्टाइल में पेंटिंग करने का. मेक्सिको सिटी की मायरा हर्नांडेज रियोस इनमें से एक हैं. 26 साल की मायरा के लिए इस प्रोजेक्ट का हिस्सा होना सम्मान के साथ ही चुनौती भी था, "मेरे लिए सही रंग खोजना मुश्किल था. एकदम सही रंग और उसे उन अलग अलग पेंटिंग के लिए रखना जो हम बना रहे थे, करीब 200 फ्रेम. यह बहुत ही मुश्किल काम था."


सबसे पहले फिल्म के सीन की अभिनेताओं के साथ शूटिंग हुई. वह आर्टिस्टों के लिए उनके काम का आधार बनी. उन्होंने उसे फान गॉग के स्टाइल में फ्रेम दर फ्रेम पेंट किया. जी हां, फिल्म के हर एक फ्रेम के लिए एक पेंटिंग बनाई गई है और फिल्म के हर एक सेकंड में 12 ऑयल पेंटिंग्स शामिल हैं. यह दुनिया की अपनी तरह की पहली ऐसी फिल्म है जो खुद फान गॉग की पेंटिंग तकनीक से बनाए गए चित्रों के जरिये उनकी कहानी कहती है. तकनीक और कला मिल कर क्या क्या ना कारनामे दिखा सकते हैं!

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