इस्लाम विरोधी रैलियों से जर्मनी की चिंता बढ़ी | दुनिया | DW | 23.12.2014
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दुनिया

इस्लाम विरोधी रैलियों से जर्मनी की चिंता बढ़ी

जर्मनी के ड्रेसडेन में कट्टर इस्लामियों,शरणार्थियों के खिलाफ रैली में रिकॉर्ड 17 हजार लोग शामिल हुए. पिछले कुछ दिनों से जारी आंदोलन का यह दसवां विरोध प्रदर्शन था. धुर दक्षिणपंथी रैलियों ने नेताओं के माथे पर बल ला दिया है

जर्मन समाज और राजनीतिक दल पिछले कुछ हफ्तों में "पश्चिम के इस्लामीकरण के खिलाफ यूरोप के राष्ट्रवादी" या पेगिडा के उभार से चिंता में पड़ गए हैं. जर्मन शहर ड्रेसडेन में अक्टूबर महीने में पेगिडा के सिर्फ कुछ सौ समर्थक थे लेकिन यह संख्या अब हजारों में पहुंच गई है. करीब 4500 जवाबी प्रदर्शनकारियों ने शहर में मार्च कर "ड्रेसडेन नवनाजी मुक्त" के नारे लगाए. उन्होंने आगाह किया कि ऐसे देश में जातिवाद और विदेशियों को नापसंद करने की कोई जगह नहीं, जिस देश में नाजी नरसंहार होलोकॉस्ट की घटनाएं हुईं.

ज्यादातर पेगिडा समर्थकों का जोर है कि वे नाजी नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी हैं जो ईसाई धर्म से जुड़ी संस्कृति और परंपराओं को होने वाले खतरे से चिंतित हैं. वे अक्सर मुख्य राजनीतिक पार्टियों पर धोखा और मीडिया पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हैं. कड़ाके की सर्दी और बारिश के बावजूद वे शहर की ऐतिहासिक सेम्पर ऑपेरा के बाहर क्रिसमस पूर्व समारोह के लिए इकट्ठा हुए. पुलिस ने इनकी संख्या करीब 17,500 बताई है, जो पिछले हफ्ते की 15,000 की संख्या से कहीं अधिक है.

नेता चिंतित

जर्मनी के पूर्व चांसलर और एसडीपी के नेता गेरहार्ड श्रोडर ने सोमवार को नागरिकों से विदेशी विरोधी आंदोलन के खिलाफ "सभ्य विरोध" का आग्रह किया. साप्ताहिक पत्रिका से उन्होंने कहा, "हमें इसी तरह की सार्वजनिक प्रतिक्रिया की जरूरत है." जर्मनी के दूसरे शहर म्यूनिख, बर्लिन, रॉस्टॉक, वुत्सबर्ग, ड्यूसलडॉर्फ और बॉन में कुछ इसी तरह के विरोध प्रदर्शन हुए. हालांकि यहां विदेशी विरोधियों की संख्या सिर्फ कुछ सौ बताई जा रही है.

पेगिडा का जन्म ऐसे शहर में हुआ है जो बर्लिन की दीवार गिरने के पहले तक साम्यवादी पूर्वी जर्मनी का हिस्सा था. पश्चिम इलाकों में भी इसी तरह के मिलते जुलते संगठन पैदा हुए हैं हालांकि वे ऐसी भीड़ इकट्ठा करने में विफल साबित हुए हैं. पुलिस का कहना है कि इन विरोध प्रदर्शनों में कोई हिंसा नहीं हुई है लेकिन कासेल शहर में 8 लोगों को टकराव के बाद हिरासत में ले लिया गया. सबसे बड़ा पेगिडा विरोधी प्रदर्शन म्यूनिख में हुआ जहां 12,000 लोग "जगह बनाओ - शरणार्थियों का स्वागत है" के बैनर तले शामिल हुए.

शहर के मेयर डीटर राइटर ने भीड़ से कहा, "हमारे पास अलग रंग के लोगों, जाति और मातृभाषा के लोगों के लिए जगह है. हमारे पास सभी धर्मों और मानने वालों के लिए जगह है जो शुक्रवार को मस्जिद जाते हैं, शनिवार को सिनेगॉग जाते हैं या फिर रविवार को गिरजाघर जाते हैं, लेकिन उनके लिए भी स्थान है जो सिर्फ घर में रहना पसंद करते हैं."

करीब करीब सभी मुख्य राजनीतिक पार्टियों के नेता धुर दक्षिणपंथी के उद्भव से सकते में हैं. विदेशी विरोधी आंदोलन ऐसे समय में जोर पकड़ रहा है जब जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर उभरा है. हाल के सालों में जर्मनी में राजनीतिक शरण मांगने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है. अमेरिका के बाद शरणार्थियों के लिए दूसरा सबसे पसंदीदा देश जर्मनी है.

इस बीच जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने जर्मनों को विदेशी लोगों को नापसंद करने वाले किसी भी तरह के नाजियों के चक्कर में फंसने से आगाह किया है. पेगिडा को यूरो मुद्रा विरोधी एएफडी पार्टी का समर्थन हासिल है.

एए/एजेए (डीपीए, एपी, एएफपी)

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