इलेक्ट्रिक कार के दीवाने नहीं जर्मन | विज्ञान | DW | 18.08.2014
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

विज्ञान

इलेक्ट्रिक कार के दीवाने नहीं जर्मन

जर्मन कारों के दीवाने हैं और जर्मनी की रैंकिंग पृथ्वी पर सबसे अधिक ईंधन निपुण देश के तौर पर होती है. और जब बात इलेक्ट्रिक कारों की होती है तो यूरोप की मजबूत अर्थव्यवस्था इस मामले में धीमी गति वाले लेन में नजर आती है.

पिछले हफ्ते जर्मन सरकार ने ऐसे कदम उठाए हैं जिससे जनता में इस तकनीक के प्रति रूचि पैदा हो सके. जानकारों का कहना है कि इससे ज्यादा बदलाव की संभावना नहीं है. पांच साल पहले जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने 2020 तक जर्मन सड़कों पर दस लाख इलेक्ट्रिक कारों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया था. जर्मनी ऐसा देश है जहां के कुछ हाइवे पर स्पीड लिमिट नहीं है. पिछले हफ्ते नई इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पहल को शुरू करते हुए जर्मन परिवहन मंत्री अलेक्जांडर डोबरिंट ने कहा, "हमें विश्वास है कि हम यह लक्ष्य हासिल कर लेंगे."

लेकिन जर्मनी की डुइसबर्ग-एसन यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर ऑटोमेटिव रिसर्च (सीएआर) के विशेषज्ञ फर्डिनांड डुडेनहोएफर के मुताबिक लक्ष्य पूरी तरह से अवास्तविक था. सीएआर के आंकड़ों के मुताबिक जर्मनी में करीब 16,900 इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल साल 2014 की पहली छमाही में हो रहा था यानि हर दस हजार पेट्रोल या डीजल से चलने वाली कारों में चार कार बिजली से चलने वाली हैं. वहीं फ्रांस में हर दस हजार ईंधन से चलने वाली कार के अनुपात में 10 इलेक्ट्रिक कारें हैं.

मेहरबानी

इलेक्ट्रिक कारों पर पहले से ही दस सालों के लिए रोड टैक्स की छूट है. लेकिन लगता है कि इससे ज्यादा लोगों को प्रोत्साहन नहीं मिला. इसलिए सरकार ने इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए पिछले सप्ताह नया प्रस्ताव पेश किया. इस पहल के तहत इलेक्ट्रिक कारों को शहर के भीतर बस लेन में जाने की इजाजत होगी. इसके साथ ही मुफ्त कार पार्किंग और इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग स्टेशन के पास पार्किंग की जगह आरक्षित रहेंगी. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल बहुत आगे तक नहीं जा पाएगी, इसलिए क्योंकि वह नगर निगम के हाथों में हैं.

जर्मन में शहरों के संघ के स्टेफान आर्टिकुस के मुताबिक, "कई शहर और नगर संशय में रहते हैं." ना सिर्फ मुफ्त पार्किंग के विचार से, बल्कि इलेक्ट्रिक कार के लिए बस लेन खोलने को लेकर. क्योंकि इस वजह से बसों की गति धीमी हो जाएगी.

जर्मन कार बनाने वाली कंपनियां धीरे धीरे साथ मिलकर इलेक्ट्रिक कार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं. डायमलर ने छोटी कार स्मार्ट का इलेक्ट्रिक संस्करण पेश किया है, फोल्क्सवागन ने भी अपने मिनी और गोल्फ मॉडल्स का इलेक्ट्रिक प्रारूप बाजार में उतारा है. वहीं बीएमडब्ल्यू अपनी हाई एंड कार आई3 से ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर रही है. हालांकि बीएमडब्ल्यू का मानना है कि बाजार धीमी गति से आगे बढ़ रहा है.

जर्मनी के पास सिर्फ 4,400 चार्जिंग स्टेशन हैं जबकि फ्रांस को उम्मीद है कि वह साल के अंत तक अपने नेटवर्क को बढ़ाकर 16,000 चार्जिंग स्टेशन तक पहुंचा देगा.

डुडेनहोएफर का कहना है कि, "जर्मन इलेक्ट्रिक कारें नहीं खरीद रहे हैं." इसके लिए वह तीन मुख्य कारण बताते हैं, उच्च लागत, स्वायत्तता कम होना और चार्जिंग करने का समय. उनका कहना है कि सरकार की नई पहल इनमें से किसी भी समस्या पर ध्यान नहीं देती.

एए/एएम (एएफपी)

DW.COM

संबंधित सामग्री