इतिहास में आज: 28 मार्च | ताना बाना | DW | 27.03.2014
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ताना बाना

इतिहास में आज: 28 मार्च

सन 1930 में 28 मार्च के दिन तुर्की के बहुत से शहरों का नाम बदला गया. इसी दिन से राजधानी 'अंगोरा' को 'अंकारा' और 'कॉन्सटांटिनोपल' का नाम बदल कर 'इस्तांबुल' कर दिया गया.

तुर्की के इन दो सबसे बड़े शहरों का नाम बदलना देश के आधुनिकीकरण के लिए उठाए जा रहे तमाम कदमों में से एक था. इसका श्रेय आधुनिक तुर्की के संस्थापक मुस्तफा कमाल अतातुर्क को दिया जाता है. तुर्की की सेना के जनरल कमाल अतातुर्क ने देश को एक आधुनिक और समृद्ध देश के तौर पर खड़ा कर तेजी से बदलते विश्व में तुर्की के लिए जगह बनाई. दुनिया के बहुत से देशों ने खुद को धार्मिक आधार पर पहचान से जोड़ा जबकि अतातुर्क ने तुर्की को यूरोपीय मॉडल पर आधारित देश बनाया. वह तुर्की भाषा बोलने वालों को यूरोपीय मॉडल पर बने आधुनिक राज्य में बदलने में कामयाब रहे.

तुर्की में पुरुषों और महिलाओं के लिए 1933 में ही मताधिकार लागू किया गया. उन्होंने एक ऐसे संविधान की नींव रखी जो साफ तौर पर इस्लामी कानून जैसा नहीं था. नए संविधान में इस्लामी पोशाक, बहुविवाह पर पाबंदी और शराब बेचने की इजाजत थी. इस तरह तुर्की दुनिया का अकेला ऐसा मुस्लिम बहुमत वाला देश बना जो कि धर्मनिरपेक्ष है. ये एक लोकतांत्रिक गणराज्य है जिसके एशियाई हिस्से को अनातोलिया और यूरोपीय हिस्से को थ्रेस कहते हैं.

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