इतिहास में आज: 21 जून | ताना बाना | DW | 20.06.2014
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ताना बाना

इतिहास में आज: 21 जून

घरों, बैंकों या तिजोरियों की हिफाजत के लिए जो अलार्म सिस्टम बनते हैं, उन्हीं से जुड़ा है आज का इतिहास. 1853 में एक अमेरिकी आविष्कारक ने कॉमन सेंस के सहारे पहली बार अलार्म बजा दिया.

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बॉस्टन के ऑगस्टस रसेल पोप ने दुनिया को अपने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक अलार्म सिस्टम से रूबरू कराया. 21 जून 1853 को उन्होंने इसका पेटेंट कराया. इलेक्ट्रोमैग्नेटिक अलार्म सिस्टम बनाने में उन्होंने सहजबुद्धि का शानदार इस्तेमाल किया.

इससे पहले तक चेतावनी के लिए घंटी, सीटी या कुत्तों का इस्तेमाल किया जाता था. ऑगस्टस ने इसकी जगह इलेक्ट्रिक सर्किट के सिद्धांत का सहारा लिया. उन्होंने दरवाजे और खिड़की के बंद होने की प्रक्रिया को एक सर्किट में बदल दिया. दरवाजे या खिड़की के खुलते ही यह सर्किट टूट जाता और करंट में अचानक आए अंतर से मशीन का चुंबक झनझना उठता. उन्होंने इसे एक हथौड़े से जोड़ा. इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कंपन हथौड़े को हिलाता और पीतल की घंटी उठती.

लेकिन मुश्किल यह थी कि दरवाजा या खिड़की बंद करने के बाद भी अलार्म बंद नहीं होता था. इस मुश्किल को हल किया एडविन होल्म्स ने. एडविन ने 1857 में ऑगस्टस से पेटेंट खरीदा और इलेक्ट्रिक अलार्म सिस्टम बनाने वाली पहली कंपनी बनाई. उन्होंने इसका ऐसा प्रचार किया कि लोग ऑगस्टस को भूल ही गए. न्यूयॉर्क में कई जगहों पर होल्म्स इलेक्ट्रिक प्रोटेक्शन कंपनी के अलार्म लगने लगे.

आज ऑगस्टस की खोज को तकनीक काफी समृद्ध बना चुकी है. आज अलार्म सिस्टम हाई टेक हो चुके हैं. इलेक्ट्रॉनिक और मैकेनिकल इंजीनियरिंग इन्हें वायरलेस सेंसर बना चुकी है. ये अब न सिर्फ पहरेदारी कर रहे हैं बल्कि आग और गैस रिसाव की भी फौरन जानकारी देते हैं.

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