इतिहास में आज: 16 अप्रैल | ताना बाना | DW | 15.04.2014
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ताना बाना

इतिहास में आज: 16 अप्रैल

1889 आज के दिन एक महान हसोड़ प्रतिभा का जन्म हुआ. दुनिया जब पहले और दूसरे विश्व युद्ध की त्रासदी और बर्बरता से जूझ रही थी तो एक गरीब नौजवान सबको हंसाने निकल पड़ा. चार्ली चैप्लिन ने हंसी की नई विधा शुरू की.

सर चार्ल्स स्पेंसर 'चार्ली' चैप्लिन को मूक फिल्मों के दौर का सबसे बड़ा फिल्म निर्माता, एक्टर और कॉमेडियन माना जाता है. चार्ली चैपलिन के जन्म के बारे में कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है. लेकिन कहा जाता है कि उनका जन्म 16 अप्रैल 1889 को लंदन में हुआ. कॉमेडी के जरिए पूरी दुनिया को लोट पोट कर देने वाले चैप्लिन का बचपन बहुत मुश्किलों में गुजरा. मां की बीमारी, पिता की मौत और कंगाली के बीच 13 साल की उम्र में वो वह स्टेज शो करने लगे. उन्हें मसखरे की भूमिका मिलती.

1908 में एक कॉमेडी कंपनी के शो में एक छोटे से रोल ने लंदन में और ब्रिटेन में उन्हें मशहूर कर दिया. इसके बाद तो उन्हें कई शो और फिल्में मिली. इस दौरान अमेरिकी फिल्म निर्माताओं की उन पर नजर पड़ी. हालांकि शुरुआत में वह अमेरिकी जनता को हंसाने में बहुत कामयाब नहीं रहे. उनकी पहली फिल्म 'मेकिंग ए लिविंग' ज्यादा नहीं चली.

Charlie Chaplin

हिटलर की मजाक उड़ाते चैप्लिन

इसके बाद चैप्लिन ने इसके बाद माबेल नॉरमार्ड की फिल्म 'माबेल्स स्ट्रेंज प्रीडिकामेन्ट' स्वीकार कर ली. बस यहीं से उनका जादू चल निकला. ब्रिटेन का एक नौजवान कॉमेडी का बादशाह बन गया. 1916 आते आते वह सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय कॉमेडियन बन गए. पहले और दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जब मानवता कराह रही थी तब 26 भाषाओं में चैप्लिन की मूक फिल्में लोगों को कुछ देर गम भुलाने में मदद कर रही थी.

इस दौरान चैप्लिन सात महिलाओं के प्यार में रहे, चार से उन्होंने शादी की और 12 बच्चे हुए. दिसंबर 1977 में स्विटजरलैंड में उनकी मौत हो गई.

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