इतिहास में आज: 16 अगस्त | ताना बाना | DW | 15.08.2014
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ताना बाना

इतिहास में आज: 16 अगस्त

2001 में खगोलशास्त्रियों ने हब्बल अंतरिक्ष टेलिस्कोप का इस्तेमाल कर सौर मंडल से बाहर स्थित एक ग्रह को ढूंढ निकाला था.

नासा ने उस ग्रह के वातावरण पर शोध भी किया. यह प्रोजेक्ट नासा और नेशनल साइंस फाउंडेशन का मिलाजुला उपक्रम था. इस संयुक्त प्रोजेक्ट में हमारे अपने सौर मंडल से बाहर मौजूद ऐसे आठ नए ग्रहों का पता चला था जिनके चारों ओर गोलाकार कक्षाएं हैं. इस गुण के कारण इन ग्रहों की खोज को काफी बड़ी उपलब्धि माना गया क्योंकि हमारे सौर मंडल के सभी ग्रहों के बाहर भी उपग्रह वृत्तीय कक्षाओं में ही चक्कर लगाते रहे हैं.

इसके अलावा नासा के इसी अभियान में उसके सबमिलीमीटर वेव एस्ट्रोनोमी सैटेलाइट से पहली बार हमारे सौर मंडल के बाहर पानी वाले ग्रहों के मौजूद होने का पहला सुराग मिला था. अब तक हब्बल, चंद्रा और कैप्लर जैसे कई अंतरिक्ष आधारित दूरदर्शी अंतरिक्ष में भेजे जा चुके हैं. इन्हें बनाने और भेजने में लगने वाले समय और भारी खर्च के चलते वैज्ञानिक अब कई दूसरे विकल्प भी इस्तेमाल कर रहे हैं.

इन विकल्पों में ऐसी वेधशालाएं बनाना शामिल है जो कि वास्तव में जेट विमान हैं और अपने साथ अंतरिक्ष दूरदर्शी को लेकर वायुमंडल की स्ट्रैटोस्फियर कहलाने वाली परत में चक्कर लगा सकें. धरती से 10 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर वायुमंडल की स्ट्रैटोस्फियर नाम के स्तर में जा कर काफी बेहतर ढंग से ब्रह्मांड में झांका जा सकता है. जेट विमान इसी ऊंचाई पर उड़ते हैं. उन्हें किसी भी दिन उड़ाया और उतारा जा सकता है. इसलिए उनका रखरखाव और मरम्मत हब्बल टेलीस्कोप जैसे अंतरिक्ष आधारित दूरदर्शियों की अपेक्षा कहीं आसान और सस्ता काम है.

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