इतिहास में आज: 15 दिसंबर | ताना बाना | DW | 12.12.2014
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ताना बाना

इतिहास में आज: 15 दिसंबर

ग्यारह सालों तक बंद रहने के बाद 2001 में आज के दिन दुनिया के एक अजूबे पीसा की मीनार को जनता के लिए फिर से खोला गया था.

इटली के पीसा की विश्वप्रसिद्ध मीनार अपने निर्माण के समय से ही झुकती रही है. 1990 में एक विशेषज्ञ टीम ने इसके झुकाव को थोड़ा कम करने का बीड़ा उठाया. ग्यारह साल और 2.7 करोड़ डॉलर लगा कर इसे मजबूत किया और 15 दिसंबर 2001 को इसे जनता के लिए फिर से खोला गया.

12वीं सदी में पश्चिमी इटली में फ्लोरेंस से करीब 50 मील की दूरी पर यह मीनार बनाने का काम शुरु हुआ. निर्माण कार्य के दौरान ही इसकी एक ओर की नींव दलदली जमीन में धंसने लगी. इंजीनियरों ने इस समस्या से निपटने के लिए मीनार के टॉप फ्लोर को एक ओर से ज्यादा ऊंचा बनाया. 1360 में जब मीनार बन कर पूरी तैयार हुई तब भी काफी झुकी हुई थी.

बीसवीं सदी तक आते आते यह 190 फुट ऊंची सफेद संगमरमर की इमारत बहुत ज्यादा झुक गई. 1990 में जब इसे मरम्मत कार्य के लिए बंद किया जा रहा था उसके ठीक पहले करीब 10 लाख लोग इसे देखने पहुंचे थे. उस समय तक इसके पूरी तरह ढह जाने का खतरा काफी बढ़ गया था. अधिकारियों ने मरम्मत के लिए 14 पुरातत्वविदों, वास्तुविदों और मृदा विशेषज्ञों की एक टीम गठित की. टीम ने मीनार की नींव के पास से मिट्टी को हटा कर इसके झुकाव को 16 से 17 इंच तक कम करने में कामयाबी पाई. इंजीनियरों का दावा था कि वापस 1990 के झुकाव तक पहुंचने में अभी कम से कम 300 साल लगेंगे.

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