इतिहास में आज: दो मार्च | ताना बाना | DW | 01.03.2014
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ताना बाना

इतिहास में आज: दो मार्च

आज ही के दिन 1807 में अमेरिकी कांग्रेस ने एक कानून पास कर देश में गुलामों के आयात पर रोक लगा दी थी. दास प्रथा की समाप्ति की दिशा में यह अहम कदम था.

1787 में जब अमेरिकी संविधान तैयार हुआ तो उसमें बंधकों के व्यापार के संदर्भ में कर और ड्यूटी शुल्क इत्यादि की बात कही गई थी, लेकिन इनके आयात पर देश में रोक नहीं थी. संविधान के अंगीकरण के 20 साल बाद तक भी इस सिलसिले में कोई कदम उठाना संभव नहीं था. जैसे जैसे 1808 की सीमा करीब आने लगी इसके खिलाफ कानूनविदों के स्वर ऊंचे होने लगे और लोग गुलामी के खिलाफ आवाज उठाने लगे. साथ ही संविधान में संशोधन की मांग भी होने लगी. संविधान के अनुसार 1 जनवरी 1808 से पहले नए कानून को लागू करने की छूट नहीं थी.

1805 में सबसे पहले वेरमोंट के सीनेटर ने गुलामों के आयात पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल प्रस्तावित किया. एक साल बाद कांग्रेस के सालाना संबोधन में राष्ट्रपति थॉमस जेफरसन ने इसे आगे बढ़ाया. 2 मार्च 1807 को कांग्रेस के दोनों सदनों में बिल पारित हो गया. अगले ही दिन जेफरसन के हस्ताक्षर के साथ ही इसे कानून का दर्जा मिला. हालांकि कानून 1 जनवरी 1808 से ही प्रभाव में आया.

इस कानून की मदद से गुलामों के आयात में तो कमी आई लेकिन अमेरिका के अंदर उनकी खरीदारी और बिक्री को नहीं रोका जा सका. बंधक बना कर गुलामी कराने की यह प्रथा कई और दशकों तक विवादास्पद होने के बावजूद जारी रही. इसका अंत अमेरिकी गृह युद्ध के बाद अंतत: संविधान में 13वें संशोधन के साथ हुआ.

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