इतिहास में आजः 4 जनवरी | ताना बाना | DW | 03.01.2014
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ताना बाना

इतिहास में आजः 4 जनवरी

पाकिस्तान के रेल हादसों के इतिहास में सबसे भयानक दुर्घटना आज ही के दिन सांगी में हुई थी. 1990 में हुई दो ट्रेनों की टक्कर में करीब 307 लोग मारे गए और उससे दोगुने घायल हुए थे.

4 जनवरी 1990 को पाकिस्तान के सिंध प्रांत के पास सांगी गांव में दो ट्रेनों की भयानक टक्कर हुई थी. मुल्तान और कराची के बीच चलने वाली जकरिया बहाउद्दीन ट्रेन उस दिन 16 डिब्बों के साथ सरपट दौड़ रही थी. ट्रेन में 2000 यात्री सवार थे. आम तौर पर पाकिस्तान में ट्रेनों में काफी भीड़ होती है. उस दिन भी जकरिया बहाउद्दीन में अच्छी खासी भीड़ थी.

ट्रेन जब सिंध प्रांत के सांगी गांव के नजदीक पहुंची तो उसे बिना बताए किनारे वाले पटरियों पर भेज दिया गया. इस नए ट्रैक पर पहले से 67 डिब्बों वाली मालगाड़ी खड़ी थी. ट्रेन की रफ्तार 56 किलोमीटर प्रति घंटे के करीब थी. सबसे पहले ट्रेन के इंजन ने मालगाड़ी को टक्कर मारी. टक्कर के बाद इंजन पटरी से उतर गया. उसके साथ साथ तीन और डिब्बे भी पलट गए.

इन तीनों डिब्बे में सवार ज्यादातर यात्री या तो मारे गए या फिर गंभीर रूप से जख्मी हो गए. इस दर्दनाक हादसे में 300 से ज्यादा लोग मारे गए और 700 यात्री जख्मी हुए. रेल दुर्घटना में घायल हुए यात्रियों को हवाई मदद से कराची के अस्पताल में पहुंचाया गया. ट्रेन हादसे में जकरिया बहाउद्दीन का इंजीनियर बच गया. उसने बाद में बताया कि सिग्नलमैन की लापरवाही की वजह से इतना बड़ा हादसा हुआ था. सिग्नलमैन को उसके दोष के लिए सजा हुई. पाकिस्तान में रेल सेवा की हालत ज्यादा अच्छी नहीं मानी जाती. पाकिस्तान में सालाना साढ़े छह करोड़ लोग रेल से सफर करते हैं.

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