इतिहास में आजः 22 जनवरी | ताना बाना | DW | 21.01.2014
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ताना बाना

इतिहास में आजः 22 जनवरी

आज ही के दिन ओडिशा में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना में उग्र भीड़ ने ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों को जिंदा जलाकर मार डाला था. भीड़ की अगुआई करने वाले दारा सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई थी साल.

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हत्या का दोषी दारा सिंह

22 जनवरी 1999 को ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्रैहम स्टेंस और उनके बेटों 10 वर्षीय फिलिप और 6 वर्षीय टिमोथी को ओडिशा के क्योंझर जिले में दंगाई भीड़ ने जिंदा जला दिया था. वारदात वाली रात स्टेंस अपने दोनों बेटों के साथ क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में थे और रात होने की वजह से कार में ही सो रहे थे. दारा सिंह के नेतृत्व में भीड़ ने स्टेंस की कार पर हमला करने के बाद आग लगा दी.

ईसाई मिशनरी की हत्या से दुनियाभर में चिंता जाहिर की गई. भारत ने ईसाइयों और अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए न्यायिक आयोग का गठन किया. मामले की जांच कर रही सीबीआई ने दारा सिंह और 18 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए. सीबीआई को उस वक्त बड़ी कामयाबी मिली जब उसने ओडिशा के मयूरभंज जिले से 31 जनवरी 2000 को दारा सिंह को गिरफ्तार किया.

निचली अदालत ने दारा सिंह को मृत्युदंड और अन्य 12 दोषियों को उम्र कैद की सजा दी. हालांकि बाद में ओडिशा उच्च न्यायालय ने दारा सिंह की फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया. जबकि एक अन्य अभियुक्त की सजा को बरकरार रखा. साथ ही अदालत ने अन्य लोगों को बरी कर दिया. ग्रैहम स्टेंस ओडिशा में पिछले तीस सालों से गरीब और कुष्ठ रोगियों की सेवा का काम कर रहे थे. उनपर दक्षिणपंथी यह आरोप लगाते रहते थे कि वह गरीबों को बहला फुसलाकर धर्मांतरण करते हैं.

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