इतिहास में आजः एक अप्रैल | ताना बाना | DW | 31.03.2014
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ताना बाना

इतिहास में आजः एक अप्रैल

एक अप्रैल वह तारीख है जिसका इस्तेमाल सालों से लोग एक दूसरे को बेवकूफ बनाने के मौके की तरह करते आ रहे हैं. देखें इसका इतिहास...

अप्रैल फूल डे को ऑल फूल्स डे भी कहा जाता है. सालों पहले पश्चिम के कुछ लोगों ने अप्रैल महीने की पहली तारीख को मूर्ख बनाने का दिन घोषित कर दिया. फिर क्या था धीरे धीरे यह दिवस दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गया. इस दिन लोग तरह तरह के मजाक और बेवकूफ बनाने के तरीकों का सहारा लेकर एक दूसरे की हंसी उड़ाने की जुगत में लगे रहते हैं. अप्रैल फूल डे के दिन लोग खुद को दूसरे से ज्यादा बुद्धिमान बताने की कोशिश में रहते हैं. अप्रैल फूल को लेकर ठीक ठीक जानकारी नहीं है कि इसकी शुरुआत कब से हुई लेकिन ऐसा मानना है कि यह सदियों से अलग अलग संस्कृतियों में मनाया जाता है.


कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह 1582 से मनाया जा रहा है. ऐसा कहा जाता है कि जब फ्रांस ने जूलियन कैलेंडर से ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपनाया तो उस समय लोगों को इसकी जानकारी मिलने में बहुत देर हुई. उस समय लोगों को यह समझ में नहीं आया कि नए कैलेंडर के मुताबिक साल की शुरूआत एक जनवरी को हो गई है. वह मार्च के आखिरी सप्ताह से लेकर एक अप्रैल तक नए साल का जश्न मनाते रहे. इस तरह से इन लोगों का मजाक उड़ाया जाने लगा. अलग अलग देशों में इसे मनाने का अलग अलग कारण है. वैसे इंग्लैंड में अप्रैल फूल के दिन मनोरंजक और रोचक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. कार्यक्रम के जरिए लोग दूसरे पर मूर्खता भरे गीत गाकर मनोरंजन करते हैं. वहीं स्कॉटलैंड में मूर्ख दिवस को हंटिंग द फूल के नाम से जाना जाता है. इस दिन यहां लोग मुर्गा चुराते हैं जो कि पहली अप्रैल की खास परंपरा है.

आधुनिक समय में अखबार, रेडियो और इंटरनेट पर अप्रैल फूल डे की चलन तेजी से बढ़ी है. पाठकों का मनोरंजन करने के लिए अखबार तरह तरह के चुटकुले और चित्रों का सहारा लेते हैं. 1957 में बीबीसी ने एक अप्रैल को लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए एक मनगढ़ंत रिपोर्ट दिखाई थी जिसमें बताया गया था कि कैसे स्विस के किसान स्पेगेटी की बंपर फसल की उम्मीद कर रहे हैं. इस रिपोर्ट में लोगों को नुडल्स उगाते हुए भी दिखाया गया था. बीबीसी ने इस तरह से हजारों दर्शकों और पाठकों को बेवकूफ बनाया था.

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