इतना क्यों कांप रही हैं जर्मन चांसलर मैर्केल? | विज्ञान | DW | 12.07.2019
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विज्ञान

इतना क्यों कांप रही हैं जर्मन चांसलर मैर्केल?

जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल को पिछले एक महीने में तीन बार बुरी तरह कांपते हुए देखा गया है. क्यों उठती है इस तरह की कंपन? क्या हो सकती है इस तरह से कांपने की वजह, जानिए.

कंपन काफी परेशान कर सकती है. हो सकता है कि शरीर के किसी एक हिस्से पर या फिर पूरे शरीर पर ही कोई काबू ना रहे. कई बार इस तरह की कंपन के बाद लोग जमीन पर गिर जाते हैं और कुछ तो बेहोश भी हो जाते हैं. हर किसी के लक्षण अलग अलग हो सकते हैं. कभी सारे लक्षण एक साथ देखने को मिल जाते हैं, तो कभी एक एक कर के. कंपन का दौरा कुछ सेकंड के लिए भी हो सकता है और कई मिनटों तक भी चल सकता है.

अकसर ऐसा पानी की कमी के कारण होता है. इंसानी शरीर 70 प्रतिशत पानी से बना है और दिमाग का तो 90 फीसदी हिस्सा पानी ही है. पानी हमारी कोशिकाओं को ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्वों से भरता है और साथ ही गैरजरूरी चीजों को घोलने का काम करता है. अगर कोई व्यक्ति लंबे वक्त तक पानी ना पिए या उसे लगातार पसीना आता रहे या फिर उल्टी और दस्त के कारण उसके शरीर से पानी कम हो रहा हो, तब ऐसे में शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है. अगर जल्द ही पानी ना पिलाया जाए, तो खून गाढ़ा होने लगता है और शरीर चेतावनी देने लगता है कि कहीं कुछ गड़बड़ है. ऐसे में मांसपेशियां ऐंठने लगती हैं और शरीर कांपने लगता है.

डीहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी का सबसे ज्यादा खतरा बच्चों और वृद्ध लोगों को होता है. उम्र बढ़ने के साथ साथ शरीर की संवेदनाएं कमजोर होने लगती हैं. ऐसे में व्यक्ति को प्यास का अहसास भी नहीं होता. इसके अलावा हाइपोग्लाइकीमिया यानी खून में शुगर की मात्रा कम होने के कारण भी कंपन उठ सकती है.

मिसाल के तौर पर यदि कोई तनाव में है, थका हुआ है, दर्द से गुजर रहा है या फिर बहुत ज्यादा कॉफी पीता है, तो ऐसे व्यक्ति को बहुत ज्यादा कंपन हो सकती है. चिकित्सा की भाषा में इसे फिजियोलॉजिकल ट्रेमर कहा जाता है. जब शरीर ठंडा पड़ने लगता है तब मांसपेशियों में खिंचाव होने लगता है. यह शरीर का गर्मी पैदा करने का तरीका होता है. इससे शरीर हाइपोथर्मिया में जाने से बचता है. यही वजह है कि जैसे ही शरीर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस यानी 95 डिग्री फैरेनहाइट से कम होता है, तो कंपन उठने लगती है.

लेकिन कंपन किसी संजीदा बीमारी के कारण भी हो सकती है. अकसर ऐसा मिरगी के कारण होता है. अगर दिमाग तक ठीक से खून ना पहुंचे, तो ऐसा होता है. ऐसी स्थिति में मस्तिष्क को भारी नुकसान हो सकता है. मिरगी का दौरा किसी भी वक्त पड़ सकता है. इसके लिए किसी तरह के ट्रिगर की जरूरत नहीं पड़ती है. दिमागी बीमारी या फिर ट्यूमर के चलते मिरगी का दौरा पड़ सकता है. वहीं कुछ दौरे मिरगी जैसे लगते जरूर हैं लेकिन मिरगी से इनका कोई लेना देना नहीं होता. किसी संक्रमण, बुखार या फिर दवा के कारण दिमाग पर असर पड़ सकता है और कंपन उठने लगती है.

सुबह पानी पीने के फायदे

कंपन कब उठती है, इस पर ध्यान देना भी जरूरी है. क्या कंपन के दौरान व्यक्ति चल रहा था या खड़ा हुआ था. अगर कंपन के कारण व्यक्ति का अपने हाथों-पैरों पर नियंत्रण ना रहे, अगर चलते वक्त वह झूमने लगे, तो यह ब्रेन डैमेज का संकेत है. इसके विपरीत यदि व्यक्ति स्थिर है और कांप रहा है, तो यह पारकिंसन की ओर इशारा है. एक अन्य वजह है "एसेंशियल ट्रेमर". यह काफी आम है और यह माता पिता से विरासत में मिलता है. 20 से 60 की उम्र के बीच यह सबसे ज्यादा देखने को मिलता है और उम्र बढ़ने के साथ कंपन भी बढ़ती रहती है. अगर कोई व्यक्ति बहुत देर तक एक ही पोजीशन में रहने की कोशिश करे, तो कंपन शुरू हो सकती है. ज्यादातर हाथ और बाजू कांपते हैं, कई बार सर भी और कुछ मामलों में आवाज में भी कंपन महसूस होती है.

व्यायाम करने से फायदा हो सकता है क्योंकि इससे तनाव कम होता है. ज्यादातर मामलों में किसी भी तरह की कंपन की शुरुआत तनाव से ही होती है. कंपन उठने पर शराब और कॉफी से दूर रहना चाहिए और डॉक्टर से बात करनी चाहिए. एमआरआई, सीटी स्कैन या ईईजी के बाद ही पूरी तरह वजह का पता लगाया जा सकता है.

रिपोर्ट: अलेक्जांडर फ्रॉएंड/आईबी

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