इंसान की तरह बुजुर्ग चिम्पैंजी भी सच्चे दोस्तों का साथ चाहते हैं | विज्ञान | DW | 23.10.2020
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विज्ञान

इंसान की तरह बुजुर्ग चिम्पैंजी भी सच्चे दोस्तों का साथ चाहते हैं

बात दोस्ती की हो तो इंसान उम्र के साथ थोड़ा चुनिंदा होता जाता है. चिम्पैंजियों के साथ भी यही बात है. उम्र बीतने के साथ उनके भी सच्चे मित्रों की संख्या घटती जाती है. दोस्तों के साथ उनका व्यवहार हैरान करने वाला है.

साइंस जर्नल में छपी एक रिपोर्ट उनके व्यवहार के बारे में कई बातें सामने लाई है. अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी की जंतु मनोविज्ञानी अलेक्जांड्रा रोसाती के नेतृत्व में हुई रिसर्च से जानवरों में उम्र के साथ सामाजिक चयन को दिखाने वाला पहला सबूत मिला है. इससे इंसान के रवैये को समझने में मदद मिल सकती है. रिसर्चरों ने इसके लिए यूगांडा के किबाले नेशनल पार्क में 78,000 घंटे तक जीवों पर नजर रख कर भारी मात्रा में आंकड़े जुटाए गए. रिसर्च के लिए यह निगरानी साल 1995 से 2016 के बीच की गई.

उन्होंने 21 नर चिम्पैंजियों के व्यवहार का अध्ययन किया जिनकी उम्र 15 से 58 साल के बीच थी. इस काम के लिए नर को इसलिए चुना गया क्योंकि आमतौर पर वो उसी समूह में रहते हैं जिनमें उनका जन्म होता है. मादा चिम्पैंजी यौन रूप से व्यस्क होने के बाद दूसरे समूहों में चली जाती हैं. मानव के करीबी रिश्तेदार होने के अलावा एक और वजह है जिसके कारण चिम्पैंजियों को इस काम के लिए चुना गया और वह है उनकी लंबी उम्र. आमतौर पर वे 60 साल से ज्यादा उम्र तक जीवित रहते हैं और अलग अलग दौर में उनके पास मित्र बनाने के लिए कई विकल्प होते हैं.

चिम्पैंजी की दोस्ती का मतलब

नर चिम्पैंजी एक दूसरे के साथ सीखते हैं, शिकार करते हैं, खाना बांट कर खाते हैं, सामूहिक रूप से अपने इलाके की पहरेदारी के लिए गश्त लगाते हैं और अपने समूह में उच्च पद पाने के लिए गठजोड़ करते हैं. इसके नतीजा उन्हें ज्यादा स्वतंत्र रूप से प्रजनन में सफल बनाता है. एक दूसरे के साथ उनके मेल मिलाप को समझने के लिए टीम ने एक "एसोसिएशन इंडेक्स" बनाया. इसमें यह देखा गया कि किसी एक पार्टी में कोई नर कितनी बार दूसरे के साथ रहता है और फिर ये दोनों समूह के बाकी सदस्यों के साथ कैसे रहते हैं. रिसर्चरों ने तीन वर्ग तैयार किए. एक वर्ग आपसी दोस्तों का है जिसमें दोनों दोस्ती करना चाहते हैं और साथ में उठते बैठते हैं, दूसरा वर्ग एकतरफा दोस्तों का है जिसमें एक तो दोस्ती चाहता है लेकिन दूसरा नहीं और तीसरा वर्ग है ऐसे चिम्पैंजियों का जो एक दूसरे से दोस्ती नहीं चाहते.

बुजुर्ग चिम्पैंजी क्या चाहते हैं

रिसर्च में पता चला है कि युवाओं की तुलना में उम्रदराज नरों के पास ज्यादा सच्चे मित्र हैं. उदाहरण के लिए 40 साल के नर के पास किसी 15 साल के नर की तुलना में तीन गुना ज्यादा और गहरे दोस्त थे. 35 साल से ज्यादा उम्र के नर अपने सच्चे दोस्तों को ट्रेन करते हैं. उम्र बढ़ने के साथ अपने समूह के दूसरे सदस्यों के साथ भी मार पीट, झगड़े, एक दूसरे को काटने या उन पर हमला करने जैसा व्यवहार कम होता जाता है. इसके बाद आखिर वो दौर आता है जब वो ज्यादा समय अपने आप में बिताने लगते हैं और उस समय वो सिर्फ अपने खास दोस्तों का ही साथ चाहते हैं. 

रिसर्च रिपोर्ट के नतीजे बहुत हद तक मानवों के व्यवहार के समान ही है. उम्र बढ़ने के साथ इंसान भी नए दोस्त बनाने से बचने लगता है और अपना ज्यादा वक्त पुराने दोस्तों के साथ ही गुजारता है. सैद्धांतिक रूप से माना जाता है कि ऐसे इसलिए होता है क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ इंसान को अपनी मृत्यु के पास आने का अहसास होने लगता है. मजबूत दोस्ती चिम्पैंजियों को ढलती उम्र और गिरते सामाजिक दर्जे के बावजूद खुश रहने में मदद करती है.

एनआर/आरपी (एएफपी)

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