इंग्लैड का वीज़ा पाने वालों में सबसे ज्यादा हिंदुस्तानी | दुनिया | DW | 27.08.2010
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दुनिया

इंग्लैड का वीज़ा पाने वालों में सबसे ज्यादा हिंदुस्तानी

इंग्लैंड में बसने वालों में सबसे ज्यादा लोग भारत और उसके पड़ोसी देशों के हैं. प्रवासियों की तादाद पर लगाम कसने में जुटी डेविड कैमरन सरकार की तरफ से जारी आंकड़ो में यह बात सामने आई है.

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ब्रिटेन का सत्ताधारी गठबंधन चाहता है कि यूरोपीय संघ से बाहर के देशों से आ रहे आप्रवासियों की संख्या को लाखों से घटाकर हजारों में कर दिया जाए. ब्रिटेन की सांख्यिकी विभाग से जारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल यहां 196,000 हज़ार आप्रवासी आए जो 2008 में आए आप्रवासियों से 33,000 ज्यादा हैं.दरअसल ब्रिटेन में आने वाले लोगों की संख्या में तो 4 फीसदी की कमी आई है लेकिन यहां से वापस जाने वाले लोगों की संख्या में 13 फीसदी की कमी आई है. यही वजह है कि विदेशी लोगों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है.

Demonstrationen in London G20

ब्रिटेन में रह रहे विदेशियों में भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा करीब 34 फीसदी है जबकि अफ्रीका की हिस्सेदारी 25 फीसदी है. इसके अलावा 21 फीसदी लोग ऐसे हैं जो एशिया के दूसरे हिस्सों से आए हैं. ये आंकड़े 2008 से 2009 के बीच के हैं. उस समय ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार थी. इन आंकड़ों के सामने आने के बाद अब यह तय है कि सरकार यूरोपीय संघ के अलावा दूसरे देशों से आने वालों को रोकने के लिए कुछ और नए कदमों का एलान करेगी. हाल ही में सरकार ने वीज़ा की संख्या में भी बड़ी कटौती की थी.

इस बीच ब्रिटेन के आप्रवासन मंत्री डेमियन ग्रीन का कहना है," हम इंग्लैंड में आनेवाले विदेशियों की तादाद लाखों से घटाकर हजारों में करना चाहते हैं बावजूद इसके हमेशा की तरह हम दक्ष, काबिल और उद्यमी लोगों का स्वागत करते रहेंगे." डेमियन ग्रीन हाल ही में भारत का दौरा करके लौटे हैं. डेमियन का कहना है कि पारंपरिक रूप सें भारत ब्रिटेन में रह रहे विदेशियों का सबसे बड़ा जरिया रहा है और आप्रवासन की नीतियां इस तरह से बनाई जाती हैं कि दोनों मुल्कों के रिश्तों को मजबूत और गहरा कर दे.

2009 में इंग्लैंड में छात्रों के लिए जारी किए गए वीज़ा की संख्या 35 फीसदी बढ़कर 362,015 हुई, जबकि शरण मांगने वालों की तादाद 29 फीसदी घट गई जिसमें वहां रहने वालों के आश्रित भी शामिल हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ एन रंजन

संपादनः उभ

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