आ गया वक्त 3डी प्रिटंर का | मंथन | DW | 18.06.2014
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मंथन

आ गया वक्त 3डी प्रिटंर का

3डी प्रिंटर का बाजार अभी शुरू हुआ है. हर व्यक्ति हजारों उत्पाद घर बैठे ही बना ले, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. जर्मनी के बवेरिया में जर्मन रेपरैप इकलौती छोटी कंपनी है जो 3डी प्रिंटर बना रही है.

थ्रीडी प्रिंटर को स्टार्ट करना एक्सपर्ट के लिए भी चुनौती है. ऑन करो और प्रोडक्शन शुरू, ये दिन अभी दूर है. लेकिन जर्मन कंपनी रेपरैप में इस पर काम चल रहा है. उन्हें पूरा विश्वास है कि 3डी प्रिंटिंग बच्चों का खेल होगी. कंपनी के प्रमुख फ्लोरियान बाउत्स कहते हैं, "आज जो बच्चे स्कूल जा रहे है, भविष्य में उनके घरों में ये प्रिंटर होंगे. उन्हें पता होगा कि इसके साथ क्या करना है. वह इंटरनेट से चीजें डाउनलोड करेंगे, शायद दांत साफ करने के लिए मग्गा या टूथ ब्रश रखने के पॉट. ब्रेड कटिंग मशीन के दांत या कुछ भी, जो टूट गया हो."

थिंजिवर्स नाम की वेबसाइट पर अभी से कई हजार चीजें प्रिंट करने के लिए डाउनलोड की जा सकती हैं, मुफ्त में. इंटरनेट में थ्रीडी डिजाइन प्रोग्राम भी मिलते हैं. थोड़ी प्रैक्टिस के बाद प्लास्टिक से हर तरह की चीजें आप खुद बना सकते हैं. फिलहाल कंपनी के कर्मचारी खुद घर के थ्रीडी प्रिंटर से पड़ोसियों के और दोस्तों के घरों में टूटे फूटे उपकरणों और खिलौने को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं. कंपनी में काम कर रहे एक मेकैनिक का कहना है कि गर्मियों की छुट्टियों के दौरान वर्कशॉप की खिड़की पर सैंकड़ों बच्चे आंख चिपकाए खड़े रहते हैं. प्रिंटर का काम देखकर उन्हें लगता है जैसे मेज से चीजें उग रही हैं.

एक छोटा सा फूलदान परत दर परत प्लास्टिक से बनता है. इसे बनाने में एक घंटा लगता है. फैक्ट्री के लिए यह तकनीक अभी नहीं हैं. लेकिन रिसर्च एंड डेवलेपमेंट, आर्किटेक्ट और वैज्ञानिकों के लिए ये प्रिंटर अच्छा है क्योंकि मॉडल और प्रोटोटाइप इससे आसानी से और जल्दी बन जाते हैं. बड़ा प्रिंटर करीब छह हजार यूरो का है. प्लास्टिक से बना एक किलो कच्चा माल तीस यूरो में मिल जाता है. लेकिन लेजर से पिघलाने वाली प्रक्रिया अभी महंगी है. रेपरैप का प्रिंटर खरीदने के लिए अब बड़ी बड़ी कंपनियां भी पहुंच चुकी है.

कंपनी के प्रमुख बाउत्स कहते हैं, "मेरे साथी संस्थापक को ये आइडिया आया. मैंने कहा कि इतना बड़ा प्रिंटर किसी को नहीं लगेगा. लेकिन अब मैं कहूंगा कि धीरे धीरे हम इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं." रेपरैप के प्रमुख लेकिन बहुत ही ध्यान से आगे बढ़ रहे हैं. वह ग्राहकों से पहले पैसा ले लेते हैं और उसके बाद ही प्रिंटर की डेलिवरी होती है.

रिपोर्टः सोन्या शॉक/एएम

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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