आसमान को खोदने की तैयारी | विज्ञान | DW | 25.04.2012
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विज्ञान

आसमान को खोदने की तैयारी

धरती से प्राकृतिक संसाधनों को निचोड़ लेने के बाद अब अंतरिक्ष में फावड़ा चलाने की योजना बन रही है. वहां खनिजों की तलाश हो रही है. एक कंपनी बनाई गई है, जो धरती के आस पास के क्षुद्रग्रहों से खनिजों को निकालने का काम करेगी.

सर्च इंजन गूगल के दो प्रमुखों और तकनीकी दुनिया के सितारों ने मिल एक नई कंपनी प्लेनेटरी रिसोर्सेज बनाई है. यह कंपनी ऐसे रोबोट स्पेस शिप बनाएगी जो उल्कापिंडों और आकाशीय पिंडों से अंतरिक्ष में ही प्लेटिनम जैसे महंगे खनिज निकाल सकेंगे. कंपनी बनाने वालों में शामिल एरिक एंडरसन ने कहा, "यह कंपनी पेपर पर शोध करने के लिए नहीं है. यह एस्टेरॉयड माइनिंग के सपने देखने के लिए उसके बारे में सोचने के लिए नहीं है. बातें तो पहले से हो रही हैं. हम काम करना चाहते हैं, हम ऐसे रोबोट बनाएंगे जो अंतरिक्ष में जा सकेंगे और आकाशीय पिंडों से महंगे खनिज ले कर आएंगे. हम इस बारे में बात नहीं करेंगे, इसे करके दिखाएंगे."

संवाददाता सम्मेलन में एंडरसन ने कहा कि कंपनी दो साल के अंदर पहला ऐसा रोबोट बना लेगी. इसके बाद अगले दो साल में खनिजों को निकालने का काम शुरू हो जाएगा. अगर यह परियोजना सफल होती है तो इससे अरबों डॉलर की कमाई हो सकेगी. प्लेटिनम जैसे महंगे खनिज धरती पर तो कम हैं लेकिन आकाशीय पिंडों में काफी मात्रा में मिलते हैं. साथ ही ये रोबोट ऑक्सीजन, हाइड्रोजन और दूसरी चीजों को भी धरती पर ले आएंगे जिन्हें अंतरिक्ष मिशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा. जिससे पानी और ईंधन धरती से अंतरिक्ष स्टेशन तक ले जाने की जरूरत खत्म हो जाएगी.

आर्किड 100 यान में ऐसे टेलिस्कोप होंगे जो पानी और महंगे खनिजों के खनन की संभावनाएं तलाशेंगे. ये ऐसे क्षुद्रग्रहों की तलाश करेंगे तो धरती के आस पास हों. नासा के मंगल अभियान के पूर्व प्रबंधक और माइनिंग कंपनी के मुख्य इंजीनियर क्रिस लेविच्की कहते हैं कि कंपनी की ऐसे कई यान भेजने की योजना है.

गूगल के सह संस्थापक लेरी पेज और चेयरमैन एरिक श्मिड सहित प्लानेटरी रिसोर्स के निवेशकों में अवतार के निर्देशक जेम्स कैमरन और पूर्व माइक्रोसॉफ्ट कार्यकारी और निजी स्पेस यात्री चार्ल्स सिमोनी शामिल हैं. एक्स प्राइज फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी डायमैंडिस कहते हैं, "धरती पर जो भी कीमती है, ऊर्जा, खनिज, धातु, अचल संपत्ति, पानी, सब कुछ अंतरिक्ष में प्रचुर मात्रा में है. हम प्राकृतिक संसाधनों के बारे में दुनिया की सोच बदल देंगे."

अंतरिक्ष में जाने का सपना कई सदियों से मनुष्य के दिमाग में बैठा हुआ है. सोवियत रॉकेट विज्ञानी कॉन्सटेंटीन त्सियोलकोवस्की ने 1903 में अंतरिक्ष में खोज के बारे में लिखा था. 2009 में मून नाम की फिल्म में भी इस तरह के भविष्य की कल्पना की गई थी. नासा ने तो शोध भी किया है कि छोटे ग्रहों को पकड़ा जा सकेगा.

नई कंपनी का दावा है कि 500 मीटर के प्लैटिनम से भरे आकाशपिंड में इतना खनिज होगा जितना हमने अभी तक नहीं खोदा होगा.

कंपनी के मुख्य इंजीनियर लेविश्की कहते हैं, "हमारा उद्देश्य सिर्फ दुनिया के संसाधन बढ़ाना ही नहीं है. हम लोगों में अंतरिक्ष, सौर मंडल और हमारे ग्रहों के बारे में जानकारी बढ़ाना चाहते हैं और इसके लिए हम सक्षम, और किफायती सिस्टम बनाना चाहते हैं."

एएम/ओएसजे (रॉयटर्स, एएफपी)

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