आलोचना के आकाश में एफ-35 | दुनिया | DW | 18.07.2014
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दुनिया

आलोचना के आकाश में एफ-35

अमेरिका समेत कई देशों ने अरबों डॉलर खर्च कर एफ-35 लड़ाकू विमान बनाया. इसे सबसे घातक हथियार बताया गया. अब आलम यह है कि यह मशीनी परिंदा न तो मुड़ पा रहा है, न ही तेजी से ऊपर जा रहा है, किरकिरी का धुआं अलग छोड़ रहा है.

एफ-35 लड़ाकू विमानों की उड़ानें बंद रखने का आदेश अमेरिकी सेना ने महीने भर बाद वापस ले तो लिया. लेकिन विमान ब्रिटेन के मशहूर फार्नबरो एयर शो में शिरकत नहीं कर सका. एयर शो में इस विमान का बड़ी बेसब्री से इंतजार हो रहा था.

लॉकहीड मार्टिन का एफ-35 दुनिया का सबसे खर्चीला हथियार प्रोजेक्ट है. अब तक इस पर 400 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं. लेकिन इंजन की नाकामी के चलते जून में सभी एफ-35 विमानों की टेस्ट उड़ान निलंबित कर दी गई. मंगलवार को अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने टेस्ट उड़ान बहाल करने की अनुमति दी, लेकिन साथ ही यह कहा कि उड़ान कड़ी निगरानी में होगी और हर तीन घंटे बाद इंजन की जांच की जाएगी.

अलग तरह का लड़ाकू विमान

जेट का ब्रिटेन के बड़े मिलिट्री एयर शो के बाद फार्नबरो एयर शो में भी न आना, अमेरिका और उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए बड़ा झटका है. माना जा रहा था कि फार्नबरो शो के बाद लॉकहीड मार्टिन को 3,000 एफ-35 के ऑर्डर मिलेंगे. अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, इटली, कनाडा, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, डेनमार्क और तुर्की इस प्रोजेक्ट में साझेदार हैं. एयरोस्पेस विश्लेषक रिचर्ड एबोलाफिया कहते हैं, "इसे नजर लग गई है और जनसंपर्क के लिहाज से यह डरावना पल है."

अब ऐसी भी चर्चाएं हैं कि कनाडा और डेनमार्क जैसे देश एफ-35 के बजाए दूसरे लड़ाकू विमानों की ओर देखने लगे हैं. एफ-35 कई मायनों में अलग तरह का लड़ाकू विमान है. यह अकेला ऐसा विमान है जो रनवे पर बिना दौड़े सीधे मिसाइल की तरह ऊपर उठने लगता है. इसी तरह जहाज बिना दौड़े नीचे भी फटाक से एक जगह पर लैंड भी कर जाता है. लेकिन इसके आगे क्या, ये काम तो आजकल 100-200 यूरो में मिलने वाले ड्रोन भी करते हैं.

सिंगल इंजन जेट

इंजीनियरों के लग रहा है कि ईंधन भरने के बाद 35 टन भार एफ-35 के सिंगल इंजन के लिए बहुत ज्यादा है. इसमें लगा दुनिया का सबसे शक्तिशाली फाइटर जेट इंजन इसे 20 टन की ताकत देता है, लेकिन इतने भार को तेज रफ्तार से ढोने के लिए काफी नहीं. भार की वजह से इंजन पर इतना दबाव पड़ता है कि उसमें गड़बड़ी होने लगती है और सिंगल इंजन जेट में उड़ान के दौरान ऐसी गड़बड़ी का मतलब है क्रैश. स्ट्रॉस मिलिट्री रिफॉर्म प्रोजेक्ट के डायरेक्टर विनस्लो व्हीलर कहते हैं, "एफ-35 जरूरत से ज्यादा भारी और जरूरत से ज्यादा कमजोर पावर वाला है."

विमान के प्रदर्शन को लेकर लीक हुई एक अंदरूनी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि नया विमान "न मुड़ सकता है, न तेजी से ऊपर उठ सकता है और न ही तेज रफ्तार से आगे बढ़ सकता है."

वहीं दूसरी ओर रूस का सुखोई टी-50, चीन का जे-20 और जे-25 एक के बाद एक सफल परीक्षण उड़ाने भरते जा रहे हैं. एफ-35 में हो रही देरी के बीच अमेरिका के कुछ सहयोगी देशों में रूस के सुखोई एस-35 की खरीद को लेकर भी दिलचस्पी जग रही है.

ओएसजे/आईबी (रॉयटर्स)

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