आरबीआई के ताजा कदमों से किसे फायदा और किसे नुकसान | भारत | DW | 22.05.2020
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भारत

आरबीआई के ताजा कदमों से किसे फायदा और किसे नुकसान

रिजर्व बैंक ने एक बार फिर अपनी कुछ मुख्य ब्याज दरों में कटौती की है और आम लोगों के लिए कुछ योजनाओं की घोषणा भी की है. लेकिन जानकारों का मानना है कि इन सभी कदमों से आम आदमी को कोई बड़ी राहत मिले ऐसा जरूरी नहीं है.

महामारी और तालाबंदी के अर्थव्यवस्था पर हुए दुष्प्रभाव को कम करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी कुछ मुख्य ब्याज दरों में कटौती की है और आम लोगों और व्यापारियों के लिए कुछ योजनाओं की घोषणा भी की है. रिजर्व बैंक की मॉनीटरी पॉलिसी समिति ने दो महत्वपूर्ण ब्याज दरों में कटौती की है. रेपो रेट में 40 बेसिस अंकों की कटौती करके उसे चार प्रतिशत पर ला दिया गया है.

रेपो रेट वो ब्याज दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को लोन देता है. इसमें कटौती करने से बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से लोन लेना सस्ता पड़ता है और इससे उन्हें मौका मिल सकता है कि वो इसी तरह अपने ग्राहकों के लिए ब्याज दरें घटा दें. इससे लोन सस्ते हो जाते हैं. अगर इस कटौती के बाद बैंकों ने भी अपनी ब्याज दरें गिराईं तो उम्मीद है कि आने वाले दिनों में होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन और टर्म लोन की ईएमआई सस्ती हो जाएंगी.

रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो रेट में भी 40 बेसिस अंकों की कटौती करके उसे 3.35 प्रतिशत पर ला दिया है. ये वो ब्याज दर होती जो रिजर्व बैंक बैंकों को उसके पास पैसा जमा करने पर देता है. इसमें कटौती करने से उम्मीद की जाती है कि बैंक अपने पैसों को रिजर्व बैंक के पास जमा करने की जगह और ज्यादा लोन देने में इस्तेमाल करेंगे. एक अनुमान है कि इस समय रिजर्व बैंक के पास अलग-अलग बैंकों के कुल 7-8 लाख करोड़ रुपये पड़े हुए हैं जिन्हें बैंक चाहें तो निकाल कर लोन देने में इस्तेमाल कर सकते हैं.

Indien Bankbetrug (picture-alliance/AP Photo/A. Qadri)

रिजर्व बैंक के पास अलग-अलग बैंकों के कुल 7-8 लाख करोड़ रुपये पड़े हुए हैं जिन्हें बैंक चाहें तो निकाल कर लोन देने में इस्तेमाल कर सकते हैं.

हालांकि यह भी संभव है कि बैंक अपनी संपत्ति और देनदारी में संतुलन बनाने के लिए बचत इत्यादि जैसी चीजों पर जमा ब्याज दर गिरा दें. इसे बैंकों में अपना पैसा रख बचत करने वालों और पेंशनधारकों को मिलने वाले रिटर्न में कमी होगी. लोन लेने वालों के लिए एक अच्छी खबर और है. रिजर्व बैंक ने मियाद ऋणों के चुकाने पर तीन महीनों का जो स्थगन लगाया था उसे और तीन महीनों तक बढ़ा दिया गया है.

यानी पहले इस स्थगन का लाभ एक मार्च से 31 मई तक उठाया जा सकता था और अब इसका लाभ 31 अगस्त तक उठाया जा सकता है. इससे होम लोन, हर तरह के मियादी लोन और क्रेडिट कार्ड भुगतान में देर कर चुके लोगों को थोड़ी राहत मिलेगी. वो कंपनियां जिनमें उत्पादन रुक चुका है और जिन्हें धनापूर्ति में दिक्कत हो रही है, उन्हें थोड़ा और समय मिल जाएगा ताकि इस स्थगन का लाभ उठा कर अपनी गतिविधियों को स्थिर कर सकें और अपनी इकाइयां फिर शुरू करने की कोशिश कर सकें.

एक और कदम के तहत, रिजर्व बैंक ने लोन लेने वालों और बैंकों को इस स्थगन अवधि के दौरान के ब्याज शुल्क को एक मियादी लोन में बदल देने की अनुमति भी दे दी है, जिसे मार्च 2021 तक चुकाया जा सकेगा. उम्मीद की जा रही है कि जिन लोन लेने वालों ने इस स्थगन का लाभ उठाया है उन्हें थोड़ी और राहत मिलेगी. जानकारों का मानना है कि इन सभी कदमों से आम आदमी को कोई बड़ी राहत नहीं मिलने वाली है.

Indien Bombay Stock Exchange (DW/R. Sharma)

अर्थव्यवस्था को एक उछाल की जरूरत है लेकिन आरबीआई की घोषणाएं शायद इसमें ज्यादा मदद ना कर पाएं.

जैसे रेपो रेट को ही ले लीजिए. अधिकतर आंकड़े इस समय यही दिखा रहे हैं कि आम लोग इन हालत में कर्ज नहीं ले रहे हैं, तो ऐसे में यह कदम उनके किसी काम नहीं आएगा. हां, इस से सरकार ने जिन कर्ज कार्यक्रमों की हाल में घोषणा की है उसमें उसे मदद मिल सकती है. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मियादी ऋणों के चुकाने पर स्थगन को और बढ़ाने पर हो रही है. कई जानकार यह कह रहे हैं कि इससे ईएमआई भरने वाले आम लोगों को थोड़ी राहत तो मिलेगी, लेकिन बैंक इतनी लंबी छूट कैसे देंगे.

वरिष्ठ पत्रकार अंशुमान तिवारी ने ट्विट्टर पर लिखा कि कर्ज की किस्त चुकाने में छह माह तक छूट अभूतपूर्व है और इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था का हाल बेहद बुरा है और जल्दी रिकवरी की उम्मीद नहीं है. 

उन्होंने यह भी कहा कि यह रि‍यायत छोटे बैंकों पर बहुत भारी पड़ेगी और कमजोर एनबीएफसी के लि‍ए यह बेहद जोखि‍म भरा वक्त है.

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