आप्रवासियों पर ब्रिटेन ने सख्त किया रुख | दुनिया | DW | 27.08.2015
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दुनिया

आप्रवासियों पर ब्रिटेन ने सख्त किया रुख

ब्रिटेन में गैरकानूनी तौर पर काम करने वाले आप्रवासियों को जेल हो सकती है और उन्हें काम देने वाले का लाइसेंस रद्द हो सकता है. आप्रवासियों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए सरकार के इस प्रस्ताव की आलोचना भी हो रही है.

ब्रिटेन की राजनीति में आप्रवासियों का मुद्दा अहम है. पिछले कुछ महीनों में फ्रांस से इंग्लिश चैनल को पार कर ब्रिटेन में प्रवेश करने वालों की संख्या बढ़ती रही है. सरकार दिखाना चाहती है कि स्थिति उसके नियंत्रण से बाहर नहीं है.

आप्रवासन मामलों के मंत्री जेम्स ब्रोकेनशर के मुताबिक, "वह कोई भी व्यक्ति जो सोचता है कि यूके पहुंचना आसान है, संदेह में ना रहे. अगर आप गैरकानूनी तरीके से यहां हैं, हम आपको काम करने से, मकान किराये पर लेने से, बैंक अकाउंट खोलने और वाहन चलाने से रोकने के कदम उठाएंगे."

गैरकानूनी तौर पर ब्रिटेन में काम करने वालों को जेल हो सकती है और उन्हें काम पर रखने वाले उद्यमियों के कारोबार बंद किए जा सकते हैं. उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं या फिर लगातार कानून तोड़ने के आरोप में उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है. प्रस्ताव के मुताबिक जेल की सजा खत्म होने पर उन्हें निर्वासन तक हिरासत केंद्र में रखा जाएगा. लेकिन सरकार को उम्मीद है कि जेल जाने के डर से ही गैरकानूनी तौर पर काम करने के मामलों में कमी आएगी.

आप्रवासन पर सख्त पाबंदियां लगाए जाने की पैरवी करने वाली ब्रिटेन की संस्था माइग्रेशन वॉच यूके के आल्प मेहमेट के मुताबिक, "ज्यादा अहम है कि यह संदेश उन तक जाए कि अगर वे गैरकानूनी तौर पर यहां हैं और काम करते हुए पकड़े जाते हैं तो वे और आपको नौकरी देने वाला, दोनों ही अदालत ले जाए जाएंगे."

हालांकि सरकार के इस रुख पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं हैं. आप्रवासियों के हक की बात करने वाली चैरिटी संस्था माइग्रीट की जोसफीन गाउबे ने प्रस्ताव की आलोचना की है. उनका मानना है कि गैरकानूनी आप्रवासियों को जेल में डालने की बात समस्या से निपटने के लिए नहीं बल्कि वोट हासिल करने के लिए की जा रही है.

यूकेआईपी पार्टी का कहना है कि इस तरह की घोषणा राजनीतिक फायदों के लिए की जा रही है. गैरकानूनी आप्रवासियों को जेल में डालने से भारी खर्च होगा और जेल प्रबंधन तंत्र पर बहुत दबाव पड़ेगा. सरकार को चाहिए कि ऐसा करने के बजाए वह उन्हें सीधा निर्वासित कर दे.

प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की सरकार इस साल आप्रवासन बिल लाने वाली है जिसके तहत पबों और टेकअवे खाने की दुकानों जैसी जगहों पर अगर गैरकानूनी तौर पर आप्रवासियों को काम करते हुए पाया जाएगा तो उन दुकानों के लाइसेंस को रद्द कर दिया जाएगा.

सरकार ने इससे पहले यह घोषणा भी की थी कि यह कानून गौरकानूनी तौर पर पैसे कमाने वालों के भत्ते जब्त करने की भी छूट देगा. बैंकों में इन लोगों के खातों की पकड़ होगी और कानूनी तौर पर मकान मालिकों से उम्मीद की जाएगी कि वे ऐसे किरायेदारों को निकाल दें जिनका ब्रिटेन में शरण का आवेदन असफल रहा है. इन्हें काम पर रखने वालों को जुर्माना भरना होगा और पांच साल तक की सजा भी हो सकती है.

इस बात के आधिकारिक आंकड़े मौजूद नहीं हैं कि ब्रिटेन में कितने आप्रवासी हैं. लेकिन अंदाजा लगाया जाता है कि इनकी संख्या करीब पांच लाख है. पिछले कुछ महीनों से ब्रिटेन में गैरकानूनी तरीकों से प्रवेश की कोशिश करने वालों की संख्या में होने वाली वृद्धि सुर्खियों में है.

एसएफ/ओएसजे (एएफपी)

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