आपत्तिजनक किताब में होंगे सुधारः मलेशिया | दुनिया | DW | 29.01.2011
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दुनिया

आपत्तिजनक किताब में होंगे सुधारः मलेशिया

मलेशिया की सरकार ने कहा है कि वह एक पाठ्य पुस्तिका में बदलाव करेगी जिससे वहां रह रहे भारतीय मूल के नागरिकों को आपत्ति है. किताब में भारत के वर्ण व्यवस्था के बारे में आपत्तिजनक बाते लिखी हैं.

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मलेशिया के उप प्रधानमंत्री मुहियुद्दीन यासीन ने कहा कि एक खास पैनल किताब को सही करने के लिए कुछ प्रस्ताव रखेगा. एक बयान में उन्होंने कहा, "फैसले के मुताबिक किताब का इस्तेमाल होता रहेगा लेकिन इसमें बदलाव किए जाएंगे ताकि लोगों को इससे परेशानी न हो." इंटरलोक नाम का उपन्यास मलेशिया के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा.

मुहियुद्दीन ने कहा कि किताब की जांच के लिए खास टीम का गठन किया जाएगा जिसमें बुद्धिजीवी और लेखकों के अलावा भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि भी मौजूद होंगे. उन्होंने कहा कि किताब को जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा और स्कूलों में यह तभी मिलनी शुरू होगा जब इसमें कोई आपत्तिजनक बाते नहीं होंगी. मलेशिया में मीडिया के मुताबिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने भारतीय मूल के लोगों के गुट एमआईसी के प्रमुख जी पलनिवेल और उप प्रमुख एस सुब्रमणियम और प्रधानमंत्री नजीब टुन रजाक से बात की.

किताब को ठीक करने का फैसला तब लिया गया जब भारतीय मूल के मलेशियाई नागरिकों ने किताब में एक आपत्तिजनक शब्द के खिलाफ आवाज उठाई. यह शब्द भारत में वर्ण व्यवस्था से संबंधित है. किताब में 'परिया' शब्द का भी इस्तेमाल किया गया है जिससे वहां के भारतीय काफी नाराज हैं. 'परिया' शब्द का मूल तमिल में 'परैयर' जाति से है जो गांवों में ढोल बजाते थे. उन्हें सबसे निचले वर्ण में गिना जाता था.

किताब 1900 की दशक की कहानी बताती है जब मलेशिया ब्रिटेन के कब्जे में था. लेखक डाटुक अब्दुल्लाह हुसैन ने उस वक्त चीनी, मलेशियाई और भारतीय समुदायों की परेशानियों का उल्लेख किया है.

रिपोर्टः पीटीआई/एमजी

संपादनः आभा एम

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