आत्मा के लिए संगीत है पहचान डेनमार्क के संगीतकार कार्ल नीलसेन की | लाइफस्टाइल | DW | 27.02.2021
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लाइफस्टाइल

आत्मा के लिए संगीत है पहचान डेनमार्क के संगीतकार कार्ल नीलसेन की

डेनमार्क के संगीतकार कार्ल नीलसेन ने सिम्फनी, कंसर्ट, चैम्बर संगीत, भक्ति संगीत, दो ऑपेरा और तीन सौ से अधिक गीत लिखे जिनमें से कई आपको इन दो कंसर्ट आवर्स में भी सुनाई देंगे.

ऑडियो सुनें 54:59

कंसर्ट आवर: कार्ल नीलसेन, भाग 1

जर्मन शास्त्रीय संगीत महोत्सव के लिए आपका टिकट है कंसर्ट आवर जिसमें हम आपके लिए सीजन की पसंद लेकर आते हैं. कंसर्ट आवर का दो घंटे का संगीत नियमित रूप से अपडेट किया जाता है. इस ऑडियो शो की मेजबानी करते हैं रिक फुलकर और संगीतकार स्वयं घटनाओं और संगीत के बारे में अपनी राय देने के लिए मौजूद रहते हैं. कंसर्ट आवर के इन दो एपिसोड में आज हम 19 वीं सदी के डेनिश संगीतकार कार्ल नीलसेन के कामों के बारे में जानेंगे.

कार्ल नीलसेन, भाग एक

नीलसेन विशेषज्ञ बो होल्टन कहते हैं, "ये गीत सीधे दिल तक जाता है." होल्टन का मानना है कि नीलसेन का संगीत 40 से ज्यादा उम्र के हर डेनिश नागरिक के खून में बहता है. लेकिन युवा लोग उन्हें बहुत ज्यादा नहीं जानते, इसलिए उनके संगीत को फिर से सामने लाने की कोशिश हो रही है ताकि युवा लोग भी उन्हें जानें. डेनमार्क के फिडलर हैराल्ड हॉगार्ड नीलसेन को बहुत खुले विचारों वाले व्यक्ति के रूप में देखते हैं. हॉगार्ड कहते हैं, "वह खुले दिल और खुले दिमाग के साथ जीवन में हर जगह गए और उन्हें प्रेरणा मिली."

Carl August Nielsen Komponist Porträt neutral

कार्ल ऑगुस्ट नीलसेन

1905 में अपनी पत्नी को लिखे पत्र में नीलसेन ने लिखा था, "कभी-कभी मुझे यह महसूस होता है कि मैं खुद नहीं हूं, बल्कि कार्ल अगस्त नीलसेन हूं, एक पाइप जिसके माध्यम से संगीत की धारा बहती है, एक ऐसी धारा जो मजबूत और हल्के बलों को भावनाओं की लहरों में बदल देती है. संगीतकार होना बड़े सौभाग्य की बात है.” 

प्रदर्शन के लिए डेनमार्क के सात संगीत दलों और एक जर्मन क्विंटेट को ल्यूबेक शहर के उत्तर पश्चिम में स्थित प्रोंसटॉर्फ के एक फार्म पर बुलाया गया. यहां होटल के साथ एक बहुउद्देशीय आयोजन स्थल भी , लेकिन संगीत महोत्सव के लिए यहां नया रिकॉर्डिंग स्टूडियो भी लगाया गया. इन दो कंसर्ट आवर्स में नीलसेन की कुछ पियानो रचनाएं, लोक संगीत से प्रेरित पियानो के संगीत और उनके सिम्फनी नंबर 3 के दो पियानो सेटिंग भी शामिल हैं.

ऑडियो सुनें 54:59

कंसर्ट आवर: कार्ल नीलसेन, भाग 2

कार्ल नीलसेन, भाग दो

प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार और 1920 में एक जनमत संग्रह के बाद जर्मन और डेनमार्क की मौजूदा सीमा तय की गई थी. उसके पहले डेनिश और जर्मन लोग श्लेसविग और होलस्टाइन के सीमावर्ती इलाकों में एक साथ रहा करते थे. सौ साल पहले की उस घटना की याद में श्लेसविग होलस्टाइन संगीत महोत्सव में डेनमार्क पर ध्यान केंद्रित किया गया. कार्ल नीलसेन को डेनमार्क का राष्ट्रीय संगीतकार कहा जाता रहा है लेकिन हाराल्ड हॉगार्ड का कहना है कि उन्हें यह शब्द कोई खास पसंद नहीं था. हॉगार्ड कहते हैं, "उनके लिए संगीत राष्ट्रवाद से ऊपर था, न ही इसका उनकी व्यक्तिगत, निजी जिंदगी से कोई लेना देना था. उन्होंने महसूस किया कि संगीत स्पष्टता था, यह अस्तित्व से संबंधित था."

यह वे सिद्धांत थे, जिन्होंने कार्ल नीलसन को गीत लिखने के लिए प्रेरित किया. डेनिश संगीत मंडली मूजिका फिक्टा के कंडक्टर बो होल्टन बताते हैं, "कार्ल नीलसेन पचास के हो चुके थे जब उन्होंने भक्ति गीत लिखना शुरू किया, उसके पहले वे सिम्फनी और ऑपेरा लिखा करते थे. लेकिन उनके दोस्त थॉमस लाउब ने कहा, "क्यों न हम सिर्फ कुछ सरल गीत लिखें, ये अद्भुत होगा." और नीलसेन ने कहा कि तो, चलो ऐसा ही करते हैं. एक महीने में उन्होंने बाईस गीत लिखे. ये 1915 की बात है जब प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था. यह एक नई शैली में गतिविधियों का धमाका था."

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