आजादी के संघर्ष के दिनों से हैं आयरलैंड के साथ भारत के रिश्ते | दुनिया | DW | 22.05.2019
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दुनिया

आजादी के संघर्ष के दिनों से हैं आयरलैंड के साथ भारत के रिश्ते

ब्रेक्जिट के कारण आयरलैंड ने यूरोपीय संघ के भविष्य में केंद्रीय स्थान ले लिया है. ब्रिटेन का ईयू से बाहर निकलना बहुत कुछ आयरलैंड के साथ समझौते पर निर्भर है. भारत के साथ इस देश का संबंध औपनिवेशिक अतीत से जुड़ा है.

करीब 70 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और 46 लाख की आबादी वाला आयरलैंड 1973 से यूरोपीय संघ का सदस्य है. इस समय उसकी सबसे बड़ी चिंता यूरोपीय संघ से ब्रिटेन का बाहर निकलना है. वह उत्तरी आयरलैंड के साथ खुली सीमा चाहता है लेकिन अगर ब्रिटेन बिना किसी डील के यूरोपीय संघ से बाहर निकला तो उसके लिए मुश्किल पैदा हो जाएगी.

भारत के साथ रिश्ते

भारत और आयरलैंड दोनों ही ब्रिटेन के गुलाम थे और आजादी के लिए दोनों ही देशों ने एक जैसी लड़ाई लड़ी. दोनों देशों के स्वतंत्रता आंदोलनों के बीच बीच अलग अलग स्तर पर संबंध भी रहे. यूं तो जवाहर लाल नेहरू, बल्लभ भाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस के आयरिश राष्ट्रवादियों के साथ संबंध थे लेकिन इस कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण नाम एनी बेसेंट का है जिन्होंने भारत की आजादी के लिए होम रूल लीग बनाया था. शायद यही वजह है कि आजाद भारत के नेता जब संविधान बना रहे थे तो उसमें बहुत से हिस्से आयरलैंड के संविधान से भी लिए गए.

Annie Besant (npb)

एनी बेसेंट

भारत की आजादी के बाद 1947 में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए. दोनों देशों के बीच सालाना पारस्परिक व्यापार करीब 130 करोड़ डॉलर का है. 2017-18 में भारत ने 53.60 करोड़ डॉलर का माल बेचा जबकि आयरलैंड से 79.50 करोड़ डॉलर का माल खरीदा. दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों का ही नतीजा है कि आयरलैंड ने नई दिल्ली में दूतावास के अलावा पिछले सालों में मुंबई, बंगलुरू, चेन्नई और कोलकाता में ऑनररी कंसुल खोले हैं.  

आयरलैंड और यूरोपीय संघ

आयरलैंड 1999 से यूरो जोन का सदस्य है लेकिन ब्रिटेन की ही तरह शेंगेन समझौते में शामिल नहीं है. ब्रेक्जिट विवाद के केंद्र में अब आयरलैंड ही है, क्योंकि ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड की खुली सीमा आयरलैंड से मिलती है और खुली सीमा बहुत हद तक इलाके में शांति की वजह भी है. अब ब्रिटेन के आयरलैंड से बाहर निकलने पर सीमा पर विवाद हो गया है क्योंकि वह भविष्य में यूरोपीय संघ की सीमा भी होगी.

आयरलैंड यूरोपीय संसद में 11 सदस्य भेजता है. अर्थव्यवस्था में करीब 39 प्रतिशत हिस्सा उद्योग का है, थोक और खुदरा कारोबार का हिस्सा करीब 13 प्रतिशत है. आयरलैंड के विदेश व्यापार में निर्यात का 51 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय संघ के देशों को जाता है जबकि आयरलैंड अपनी खरीद का 68 प्रतिशत यूरोपीय संघ के देशों से करता है. यूरोपीय संघ के बजट में आयरलैंड का हिस्सा 1.77 अरब यूरो है जबकि यूरोपीय संघ आयरलैंड में सालाना 1.8 अरब यूरो खर्च करता है.

Infografik Irlands Handelsplätze EN

जिन देशों में होता है आयरलैंड से सबसे ज्यादा निर्यात.

आयरलैंड की राजनीतिक व्यवस्था

आयरलैंड की संसद का नाम ओयरखतस है और उसके दो सदन हैं. संसद के निचले सदन का नाम डाल येरेन है जबकि उपरी सदन का नाम सानेद येरेन है. संसद के निचले सदन के 166 सदस्य हैं जिनका चुनाव सिंगल ट्रांसफरेबल वोट से होता है. प्रतिनिधि सभा पांच साल के लिए चुनी जाती है और मतदान का अधिकार आयरलैंड के नागरिकों के अलावा ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड के उन नागरिकों को भी है जो स्थायी रूप से आयरलैंड में रहते हैं. एक चुनाव क्षेत्र से कई उम्मीदवार चुने जाते हैं. इस समय आयरलैंड में 43 चुनाव क्षेत्र हैं जहां आबादी के हिसाब से 3 से लेकर 5 सांसद चुने जाते हैं. बहुमत का नेता प्रधानमंत्री चुना जाता है. ऊपरी सदन में 60 सदस्य होते हैं.

भारत की ही तरह आयरलैंड में भी संसद की सीटों के लिए उपचुनाव होते हैं. आयरलैंड के सांसद मृत्यु, इस्तीफा या निष्कासन के जरिए अपनी सीट खोते हैं. नए प्रतिनिधि का चुनाव उपचुनाव में होता है. यही वजह है कि सदन में पार्टियां अपनी सीटें बढ़ा सकती हैं या उनकी सीटें घट सकती हैं. आयरलैंड के राष्ट्रपति का चुनाव सीधे मतदाताओं द्वारा 7 वर्षों के लिए होता है. बीच में पद खाली होने पर नया चुनाव 60 दिन के अंदर कराने का प्रावधान है. कोई भी व्यक्ति अधिकतम दो कार्यकाल तक राष्ट्रपति रह सकता है.

आयरलैंड में पार्टियां

आयरलैंड बहुदलीय लोकतंत्र है. वहां कई सारी पार्टियां हैं और गठबंधन सरकार बहुत आम है. आयरलैंड की खासियत यह है कि यहां की पार्टियों में यूरोप में आम तौर पर दिखने वाला लेफ्ट और राइट का विभाजन नहीं है. यहां की दो प्रमुख पार्टियां फियाना पॉल और फिन गेल का जन्म 1922-23 के गृहयुद्ध के दौरान ब्रिटेन के साथ संधि का समर्थन और विरोध करने वाले धड़ों के बीच सिन फेन पार्टी के विभाजन से हुआ था. लेबर पार्टी की स्थापना 1912 में हुई थी और वह संसद में आम तौर पर तीसरी ताकत रहती है. हाल के सालों में सिन फेन ने ये जगह ले ली है.

इस समय कंजरवेटिव फिन गेल पार्टी के लियो वरादकर आयरलैंड के प्रधानमंत्री हैं. भारतीय मूल के वरादकर डब्लिन में पैदा हुए और पेशे से डॉक्टर हैं. वे डब्लिन से ही 2007 से सांसद हैं और 2017 से पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री हैं. 2015 में समलैंगिक विवाह पर आयरलैंड में हुए जनमत संग्रह के दौरान उन्होंने सार्वजनिक किया था कि वे समलैंगिक हैं. कंजरवेटिव आयरलैंड में वे न सिर्फ पहले समलैंगिक सरकार प्रमुख हैं बल्कि पहले भारतीय मूल के प्रधानमंत्री भी.

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