आखिर टीपू सुल्तान के विरोध की वजह क्या है? | दुनिया | DW | 10.11.2018
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दुनिया

आखिर टीपू सुल्तान के विरोध की वजह क्या है?

मैसूर के राजा रहे टीपू सुल्तान की जयंती 10 नवंबर को मनाई जाती है लेकिन इस साल वह विवादों में है. मैसूर का शेर कहलाने वाले टीपू की जयंती की शुरुआत कांग्रेस के शासन में हुई लेकिन बीजेपी इसका विरोध करती रही है.

कर्नाटक में कड़ी सुरक्षा के बीच मैसूर के शासक रहे टीपू सुल्तान की जयंती मनाई जा रही है, कई शहरों में सुरक्षा को देखते हुए धारा 144 लगाई गई है और विरोध प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है. भारतीय जनता पार्टी और कुछ हिन्दू संगठनों ने सरकार से मांग की थी कि वह टीपू सुल्तान की जयंती मनाने का कार्यक्रम और उन्हें महिमामंडित करने की योजना रोक दें. बीजेपी की निगाह में टीपू सुल्तान धार्मिक रूप से कट्टर और हिन्दू विरोधी शासक था.

कर्नाटक में 2015 में पहली बार आधिकारिक तौर पर टीपू जयंती मनाई गई थी. उसके बाद कोडागू जिले में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा हुई थी. इस बार भी कुछ संगठनों की ओर से कई शहरों में बंद का आह्वान किया गया है और विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं.

अठारहवीं शताब्दी में मैसूर पर शासन करने वाले टीपू सुल्तान का नाम इतिहास में वीर योद्धा के तौर पर दर्ज है जिसने अपने राज्य की रक्षा के लिए युद्धभूमि में ही जान दे दी. लेकिन अब ऐसा क्या हो गया है कि इस योद्धा को याद करने के कार्यक्रमों का विरोध हो रहा है और टीपू सुल्तान की इस छवि से इतर भी एक छवि पेश की जा रही है. बीजेपी की कर्नाटक इकाई ने शनिवार को ट्वीट किया, "कांग्रेस और टीपू सुल्तान में बहुत सारी समानताएं हैं. दोनों हिंदू विरोधी रहे हैं. दोनों अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करना चाहते हैं. इसीलिए कांग्रेस पार्टी टीपू की जयंती पर जश्न मना रही है."

हालांकि प्रदेश के मुख्यमंत्री और जेडी (एस) नेता कुमारस्वामी खुद इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य कारणों से हिस्सा नहीं ले रहे हैं लेकिन जानकारों के मुताबिक इसके पीछे स्वास्थ्य से ज्यादा राजनीतिक कारण जिम्मेदार हैं क्योंकि गौड़ा परिवार खुद टीपू सुल्तान को लगभग इसी निगाह से देखता है जैसे कि बीजेपी. बीजेपी का मानना है कि कर्नाटक सरकार मुसलमानों को तुष्ट करने के लिए टीपू सुल्तान के जन्म का जश्न मनाती है लेकिन सवाल ये है कि बीजेपी इसका विरोध क्यों करती है और उसके पास इसके क्या आधार हैं.

BS Yeddyurappa (IANS)

कर्नाटक बीजेपी के नेता येदियुरप्पा

आरएसएस से जुड़े एक नेता के अनुसार, "टीपू सुल्तान ने अपने शासन के दौरान न सिर्फ हिन्दू मंदिरों और ईसाइयों के चर्चों पर हमला किया बल्कि हिन्दुओं का धर्मांतरण भी किया. टीपू के शासन काल में हिन्दुओं के मंदिर तोड़े गए और हिन्दू महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया." हालांकि इस बारे में ऐतिहासिक साक्ष्य क्या हैं, बीजेपी से जुड़े संगठनों के पास इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है.

इतिहास की पुस्तकों और लेखों में जो तथ्य निकलकर आते हैं उनके अनुसार टीपू सुल्तान न सिर्फ एक वीर शासक था बल्कि उसने अपने शासन काल में कृषि-व्यवस्था में बड़े सुधार किए. यही नहीं, कई हिन्दू मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया जिसमें श्रृंगेरी मठ का नाम खासतौर पर लिया जाता है. लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी हर उस मुद्दे को जिंदा रखना चाहती है जो हिन्दुत्व से जुड़ा हो और जिसकी वजह से हिन्दू ध्रुवीकरण की उम्मीद जगती हो.

वरिष्ठ पत्रकार संजय शर्मा कहते हैं, "यही वजह है कि टीपू के मुद्दे पर बीजेपी वाले दिल्ली में भी विरोध प्रदर्शन करते हैं. दिल्ली में बीजेपी के लोग और विधायक टीपू सुल्तान की तस्वीर का विरोध करते हुए उसकी जगह सिख नेताओं की तस्वीरें लगाने की बात कर रहे थे.” दिलचस्प बात ये है कि इस मुद्दे पर बीजेपी की राय अक्सर बदलती भी रहती है, खासकर तब, जब वो सरकार में रहती है. कर्नाटक में जब बीजेपी की सरकार थी तो खुद मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार ने टीपू सुल्तान को एक नायक बताया था. यही नहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी कर्नाटक विधानसभा की 60वीं सालगिरह के मौके पर टीपू सुल्तान की प्रशंसा कर चुके हैं.

इतिहास के जानकारों के मुताबिक, टीपू सुल्तान को न सिर्फ वीर योद्धा और राष्ट्रभक्त शासक के तौर पर जाना जाता है बल्कि धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक के तौर पर भी याद किया जाता है. बीजेपी विरोधियों का कहना है कि टीपू सुल्तान की कथित हिन्दू विरोधी छवि हाल के कुछ वर्षों में राजनीतिक कारणों से गढ़ी गई है, जिसमें ऐतिहासिक तख्यों का पुट नगण्य है.

सरकारी दस्तावेजों और ऐतिहासिक साक्ष्यों पर नजर डालें तो टीपू ने श्रृंगेरी, नांजनगुंडा, श्रीरंगपट्टनम, कोलूर, मोकंबिका के मंदिरों को सरकारी खजाने से काफी धन और जेवरात दान दिए और इन्हें सुरक्षा मुहैया कराई थी. टीपू के साम्राज्य में हिंदू बहुमत में थे और शायद अपने इन्हीं कार्यों के चलते वह काफी लोकप्रिय भी था.

इन सबके अलावा टीपू सुल्तान की गणना भारत के कुछ उन शासकों में की जाती है जिसे अपने समय से आगे देखने वाला माना जाता है. टीपू ने बहुत सी लड़ाइयां लड़ीं जिनमें अंग्रेजों से लड़ी चार बड़ी लड़ाइयां भी शामिल हैं. अपनी लड़ाइयों के बीच टीपू को जो थोड़ा सा शांति का वक्त मिला उस दौरान उसने समाजसुधार के कई काम भी किए जिनमें शराबबंदी भी शामिल है.

इसके अलावा टीपू के गाय प्रेम और गायों की कई प्रजातियों को विकसित करने का भी श्रेय दिया जाता है. इतिहासकार मानते हैं कि भारत में मिसाइल या रॉकेट टेक्नोलॉजी का प्रारंभिक ज्ञान टीपू और हैदर अली का ही लाया हुआ ही था और टीपू ने इनका प्रयोग अंग्रेजों से लड़ने में भी किया था.

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