आखिर क्या है यूरोपीय फुटबॉल की कामयाबी का राज | दुनिया | DW | 11.07.2018
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दुनिया

आखिर क्या है यूरोपीय फुटबॉल की कामयाबी का राज

फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में हर बार खिताब की जंग लैटिन अमेरिकी व यूरोपीय टीमों के बीच रही है. रूस में भी यूरोपीय देशों के शानदार प्रदर्शन किया है. यूरोपीय फुटबॉल के बढ़ते जलवे की आखिर वजहें क्या हैं?

यूरोप में शुरुआती स्तर से ही फुटबॉल को प्रमोट किया जाता है. 2004 में यूरोपीय फुटबॉल संघ ने सभी प्रमुख क्लब को निर्देश दिए थे कि वे अलग-अलग उम्र की टीमों का संचालन करें. मसलन चोटी पर खेलने वाले हर क्लब को अंडर-10 और 10 से 14 आयवर्ग में एक एक टीम और 15 से 21 आयुवर्ग में दो टीमें रखानी होती हैं. यूरोपीय फुटबॉल महासंघ यूएफा के तत्कालीन अध्यक्ष लेनर्ट जोहानसन की कोशिश थी कि यूरोपीय फुटबॉल में तकनीकी रूप मंझे हुए खिलाड़ी नियमित रूप से आते रहें, जिससे नेशनल टीमों को भी फायदा हो रहा है.

इस बार का फुटबॉल वर्ल्ड कप इसलिए भी खास है क्योंकि यूरोप की बड़ी-बड़ी टीमें धाराशाई हो गई. नीदरलैंड्स और इटली क्वालिफाई ही नहीं कर पाए. जर्मनी ने ग्रुप स्तर पर ही मुकाबले से निकलकर सभी को चौंका दिया. 2010 की विजेता स्पेन और यूरोपियन चैंपियन पुर्तगाल भी पिछड़ गए. सेमीफाइनल में पहुंचने वाली चारों टीमें यूरोप की थीं. पहले सेमीफाइनल मुकाबले में फ्रांस ने बेल्जियम को 1-0 से हरा दिया है. दूसरा सेमीफाइनल इंग्लैंड और क्रोएशिया के बीच बुधवार को खेला जाएगा.

कौन जीतेगा फुटबॉल वर्ल्ड कप?

यूएफा के अध्यक्ष अलेक्जांडर सेफेरिन के मुताबिक, इस बार भले ही बड़ी टीमों ने निराश किया हो, लेकिन अन्य टीमों ने उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया है. इसका मतलब है कि फुटबॉल को विकसित करने के लिए की गई कोशिशें रंग लाई हैं और समूचे यूरोप को फायदा पहुंच रहा है. इस बार लिस्बन क्लब स्पोर्टिंग ने वर्ल्ड कप के लिए सबसे ज्यादा खिलाड़ी दिए हैं.  

रूस में वर्ल्ड कप में भाग लेने वाले यूरोप के 14 देशों में से 10 आखिरी 16 वाले राउंड तक पहुंचे और 6 क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे. अमेरिका और कैरिबियन फुटबॉल फेडरेशन कोनकाकाफ के सदस्य देश आखिरी आठ तक नहीं पहुंचे. फेडरेशन के अध्यक्ष विक्टर मोंटाग्लियानी इसके लिए अपनी संस्था की चूक को स्वीकार करते हैं. वह कहते हैं. "यह सच है कि पिछले 40 वर्षों में संस्था ने फुटबॉल को विकसित करने और वैश्विक स्तर का बनाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया.

क्वार्टर फाइनल मुकाबले में ब्राजील की हार से पहले ही दक्षिण अमेरिकी फेडरेशन कोनमेबोल ने एक सेमिनार आयोजित कर फुटबॉल के लिए जरूरी मूलभूत संरचना की कमी पर चर्चा की थी. खेल में भ्रष्टाचार की वजह से भी फुटबॉल पर बुरा असर पड़ा है

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यूएफा के अध्यक्ष अलेक्जांडर सेफेरिन कहते हैं, "हम जमीनी स्तर पर फुटबॉल को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम चाहते हैं कि खिलाड़ी और टीम भविष्य में बेहतरीन प्रदर्शन करें." फुटबॉल में नए प्रयोग और इसके विकास के लिए यूरोपीय फेडरेशन ने जितना काम किया है, वह मिसाल है. कोनमेबोल या कोनकाकाफ जैसे फेडरेशन इसका अनुसरण कर सकते हैं.

वीसी/एमजे (एपी)

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