आउशवित्स यातना शिविर के पहले दौरे पर मैर्केल | दुनिया | DW | 06.12.2019

डीडब्ल्यू की नई वेबसाइट पर जाएं

dw.com बीटा पेज पर जाएं. कार्य प्रगति पर है. आपकी राय हमारी मदद कर सकती है.

  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

आउशवित्स यातना शिविर के पहले दौरे पर मैर्केल

अंगेला मैर्केल जर्मनी की चांलसर के तौर पर पहली बार आउशवित्स के नाजी यातना शिविर का दौरा कर रही हैं. यहूदी नरसंहार के दौरान यहां पर पांच साल के भीतर 11 लाख से ज्यादा लोगों को लाकर कत्ल किया गया था.

मैर्केल बीते 14 साल से जर्मनी की चांसलर है. लेकिन यह पहला मौका है जब वह पोलैंड में आउशवित्स के यातना शिविर का दौरा कर रही है. उनके साथ पोलिश प्रधानमंत्री मातेउस मोरावेक्सी, यातना शिविर के कुछ पूर्व कैदी और विभिन्न यहूदी संगठनों के सदस्य भी जा रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय आउशवित्स कमेटी ने मैर्केल के दौरे को यहूदी नरसंहार में जीवित बचे लोगों के प्रति एकजुटता का "विशेष रूप से अहम संकेत" बताया है.

मैर्केल आउशवित्स के बिरकेनाऊ डेथ कैंप में भाषण देंगी और उसके बाद डेथ वॉल का दौरा करेंगी. डेथ वॉल वह जगह है जहां नाजी जर्मनी के एसएस सैनिकों ने हजारों लोगों को गोली से उड़ाया था. इनमें ज्यादातर पोलिश राजनीतिक कैदी थे. यह जगह अब एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्मारक है.

चांसलर मैर्केल इस जगह के संरक्षण का काम संभालने वाले आउशवित्स-बिरकेनाऊ फाउंडेशन की 10वीं वर्षगांठ पर वहां जा रही हैं. उम्मीद है कि मैर्केल इस फाउंडेशन के लिए जर्मनी की तरफ 6 करोड़ यूरो की मदद का एलान कर सकती हैं.

यह भी पढ़िए: ऐन फ्रैंक की कहानी

मैर्केल से पहले 1977 में जर्मन चांसलर हेल्मुट श्मिट ने आउशवित्स का दौरा किया था. वह इस नाजी यातना केंद्र का दौरा करने वाले पहले बड़े नेता थे. उन्होंने अपने भाषण में कहा था, "यह ऐसी जगह है जहां सिर्फ शांति रहना चाहिए. फिर भी, मुझे विश्वास है कि जर्मन चांसलर यहां पर शांत नहीं रह सकता." आउशवित्स में पहली बार 1940 में कैदियों को लाया गया था और जब 1945 में सोवियत बलों ने उस जगह को आजाद कराया तो वहां नाजी जर्मनी के हाथों में मारे गए लोगों का आंकड़ा 11 लाख को पार कर चुका था. यहूदी नरसंहार के दौरान लगभग 60 लाख से ज्यादा यहूदी और दूसरे उदारवादी लोगों को मारा गया.

पोलिश टीवी पर प्रसारित अपने संबोधन में श्मिट ने कहा था कि पोलैंड, जहां नाजियों ने यह यातना केंद्र बनाया, उसने "सबसे ज्यादा कष्ट" झेला है. फिर उन्होंने अपने देश जर्मनी के अपराधबोध की बात की. उन्होंने कहा, "इस अहसास से हम भाग नहीं सकते कि राजनीति को नैतिक आधारों और व्यवस्था की जरूरत है."

आउशवित्स किसी भी जर्मन चांसलर के लिए हमेशा ही एक बहुत जटिल जगह रही है. चांसलर श्मिट की यात्रा के बाद उनके उत्तराधिकारी हेल्मुट कोल ने आउशवित्स का दौरा किया था. नवंबर 1989 में जर्मन लोग जब बर्लिन दीवार गिरने की खुशी मना रहे थे तो कोल को अपनी पोलैंड यात्रा बीच में ही छोड़कर स्वदेश आना पड़ा. कुछ समय बाद वह फिर से पोलैंड गए और उन्होंने आउशवित्स का दौरा भी किया.

यहूदी समुदाय के साथ स्पष्ट रूप से एकजुटता और नाजी जर्मनी के अपराधों के बारे में सजग रखने वाले ऐतिहासिक सबक चांसलर मैर्केल के कार्यकाल में बहुत अहम रहे हैं. उन्होंने पांच बार इस्राएल में याद वाशेम के 'द वर्ल्ड होलोकॉस्ट रिमेंबरेंस सेंटर' का दौरा किया.

2009 में मैर्केल ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ बुखेनवाल्ड के यातना शिविर का दौरा किया था. 2013 में वह यहूदी नरसंहार में जीवित बचे कुछ लोगों के साथ दखाऊ यातना शिविर का भी दौरा किया था. दखाऊ को आजाद कराने की 70वीं वर्षगांठ पर भी वह 2015 में वहां गईं. उस वक्त उन्होंने अपने भाषण में कहा था, "इस तरह की जगहें हम सबको सावधान करती हैं कि फिर ऐसा ना हो, यह सुनिश्चित करने में हम मदद करें."

रिपोर्ट: क्रिस्टोफ स्ट्राक/एके

__________________________

हमसे जुड़ें: WhatsApp | Facebook | Twitter | YouTube | GooglePlay | AppStore

DW.COM

संबंधित सामग्री