आईएस ने ली इस्तांबुल हमले की जिम्मेदारी | दुनिया | DW | 02.01.2017
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दुनिया

आईएस ने ली इस्तांबुल हमले की जिम्मेदारी

तुर्की की पुलिस उस हमलावर को तलाश कर रही है जिसने इंस्ताबुल के एक नाइट क्लब में नए साल के जश्न के दौरान हमला कर 39 लोगों की जान ले ली. आतंकी गुट इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की जिम्मेदारी ली.

तुर्की की पुलिस ने नाइट क्लब पर हमला करने वाले व्यक्ति की तलाश में बड़ा खोज अभियान छेड़ा हुआ है. हमले में मारे गए ज्यादातर लोग विदेशी थे जो इस्तांबुल के एक पॉश इलाके में स्थित नाइट क्लब 'रेना' में पार्टी कर रहे थे. नए साल की पहली तारीख के आए 75 मिनट ही बीते थे कि एक व्यक्ति ने क्लब के गेट पर खड़े एक पुलिसकर्मी और एक आम नागरिक को गोली मार दी और भीतर चला गया. उसने अंदर मौजूद करीब 700 लोगों पर बंदूक से निशाना साधा. तुर्की के एनटीवी बताया है कि बंदूकधारी ने करीब सात मिनट तक लगातार 120 से 180 राउंड गोलियां बरसाईं. कई लोगों ने गोली से बचने के लिए क्लब के पास समंदर के ठंडे पानी में छलांग लगा दी.

इस्लामिक स्टेट ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर इस हमले की जिम्मेदारी ली है. इस आतंकी गुट ने लिखा है कि "खिलाफत के एक सैनिक" ने इस हमले को अंजाम दिया है. इसके पहले भी इस्तांबुल में कई हमले हो चुके हैं.

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तय्यप एर्दोवान ने कहा है कि देश में अव्यवस्था का माहौल फैलाने के लिए यह कत्लेआम मचाया गया. उन्होंने कहा कि ऐसी डराने की कोशिशों के सामने तुर्की कभी नहीं झुकेगा. तुर्की के प्रधानमंत्री बिनाली यल्दिरिम ने बताया है कि हमलावर अब भी हाथ नहीं लगा है. उन्होंने हमलावर को एक "हथियारबंद आतंकवादी" बताया जो घटनास्थल पर अपनी बंदूक छोड़ कर भाग गया.

हमले में मारे गए लोगों की याद में क्लब के बाहर लोगों ने मोमबत्तियां जलाईं और फूल चढ़ाए. रेना के फेसबुक पेज की तस्वीर को काला कर दिया गया है. हादसे से प्रभावित क्लब के मालिक मेहमत कोसार्सलान ने लिखा है, "हमारे दिल से खून बह रहा है." इस हमले ने पेरिस में नवंबर 2015 में हुए हत्याकांड की यादें ताजा कर दी हैं. पेरिस के कई नाइट क्लबों और पबों पर हुए हमलों में कम से कम 130 लोग मारे गए थे. इनमें से 90 लोग बाताक्लां कॉन्सर्ट हॉल में ही मारे गए थे. इन हमलों की जिम्मेदारी भी इस्लामिक स्टेट ने ली थी.

इसके पहले, तुर्की में सक्रिय कुर्द गुटों पर हमले का संदेह जताया गया जिस पर सफाई देते हुए कुर्दिश वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के नेता मूरत कराइलान ने कहा कि कोई भी कुर्द सेना इसमें शामिल नहीं थी.

तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू ने गृह मंत्रालय के हवाले से लिखा है कि 38 मृतकों की पहचान हो चुकी है, जिनमें 27 विदेशी थे और 11 तुर्क लोग. एक मृतक की पहचान नहीं हुई है. हमले में घायल हुए 65 लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. घायलों में सऊदी अरब, जॉर्डन, इराक और ट्यूनीशिया के कई लोग थे. दो भारतीयों के भी हमले में मारे जाने की सूचना है. कनाडा के प्रधानमंत्री ने भी अपने एक नागरिक के मारे जाने की पुष्टि की है.

सिडनी से पेरिस तक, रियो से लंदन तक, इस बार नए साल के आयोजन स्थलों पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए गए थे. केवल इस्तांबुल में ही 17,000 पुलिसकर्मी ड्यूटी पर थे. कई पुलिसकर्मी सांता क्लॉज के भेष में भी तैनात थे. फिर भी इस हमले को रोका नहीं जा सका. विश्व भर के नेताओं ने हमले की निंदा की है. जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने इसे "जश्न मनाते लोगों पर किया गया एक अमानवीय और कायराना हमला" करार दिया है. वहीं पोप प्रांसिस ने भी अपने नए साल के विशेष संदेश में इसकी कड़ी निंदा की है.

आरपी/एके (एएफपी)

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