आईएस के लिए उपजाऊ जमीन बनता बंगाल | दुनिया | DW | 25.11.2015
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दुनिया

आईएस के लिए उपजाऊ जमीन बनता बंगाल

पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाके आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के लिए बेहद उपजाऊ साबित हो रहे हैं. नदिया और मुर्शिदाबाद जिलों के 17 गांवों में युवकों की भर्ती के लिए इस संगठन ने बांग्ला भाषा में पोस्टर लगाए हैं.

केंद्रीय गृह मंत्रालय की चेतावनी के बावजूद ममता बनर्जी सरकार ने अब तक इन गतिविधियों पर निगरानी के लिए न तो कोई साइबर सेल खोला है और न ही दूसरा कोई एहतियाती कदम उठाया है. अब बांग्लादेश में आईएस के स्थाई नेता की नियुक्ति के बाद यह खतरा और गहरा हो गया है. केंद्रीय खुफिया एजंसियों का कहना है कि आईएस अब बंगाल के खासकर सरहदी इलाकों के युवकों को संगठन में भर्ती के लिए लुभाने का प्रयास कर रहा है. इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की साइबर सेल की ओर से किए गए एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि श्रीनगर, गुवाहाटी और पुणे के चिंचवाड़ के बाद कोलकाता से सटा हावड़ा देश का चौथा ऐसा शहर है जहां 16 से 30 साल के आयुवर्ग के युवक आईएस की वेबसाइट में खासी दिलचस्पी ले रहे हैं.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीते अगस्त में देश के 12 राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की एक बैठक बुलाई थी. बंगाल के पुलिस महानदेशक जीएमपी रेड्डी भी इस बैठक में शामिल हुए. इसमें आईएस की वेबसाइट में दिलचस्पी लेने वालों की निगरानी के लिए राज्यों को साइबर सेल के गठन का निर्देश दिया गया. लेकिन बंगाल में बढ़ते खतरे के बावजूद मैनपावर की कमी का रोना रोते हुए अब तक इसका गठन नहीं किया गया है. इस सेल में तैनात कर्मचारियों को बंगलुरू स्थित नेशनल टेकनिकल एंड रिसर्च आग्रानाइजेशन (एनटीआरओ) की ओर से प्रशिक्षित किया जाना था.

खुफिया रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि आईएस बंगाल में महज वेबसाइट और पोस्टरों के जरिए ही युवकों को संगठन में शामिल होने के लिए नहीं लुभा रहा है, बल्कि उसके कई एजंट भी सीमावर्ती गांवों में घूम रहे हैं. लेकिन इस खतरे के बावजूद आखिर अब तक साइबर सेल का गठन क्यों नहीं किया जा सका है?इस सवाल पर राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, "हम राज्य में इस्लामिक स्टेट की बढ़ती गतिविधियों से अवगत हैं और मौजूदा तंत्र की सहायता से उनकी गतिविधियों की निगरानी की कोशिश भी की जा रही है. लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते अब तक साइबर सेल का गठन नहीं किया जा सका है."

खुफिया विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, सीमावर्ती इलाकों में इस्लामिक स्टेट के कई वीडियो सीडी भी दिखाए जा रहे हैं. खासकर नदिया व मुर्शिदाबाद जिलों के कई सीमावर्ती गांवों से आईएस के ढेरों पोस्टर भी बरामद किए गए हैं. इन पोस्टरों में कहा गया है कि भारत के मुसलमानों के लिए मुगलिस्तान नामक आजाद देश बनाया जाएगा.

इससे पहले बांग्लादेश के जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश के पश्चिम बंगाल में सक्रियता के सबूत तो मिल ही चुके हैं. बीते साल बर्दवान में हुए विस्फोटों के बाद जांच के दौरान पता चला था कि इस संगठन ने राज्य में अपना नेटवर्क कितना मजबूत कर लिया है. अब उसी नेटवर्क के सहारे इस्लामिक स्टेट भी बंगाल में अपने पांव पसार रहा है.

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में इन गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए सरकार व सुरक्षा एजेंसियों को समय रहते ठोस कार्रवाई करनी होगी. राजनीतिक पर्यवेक्षकों की राय में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल चुनावी तैयारियों में जुटे हैं. इसी का फायदा उठा कर इस्लामिक स्टेट के एजंट बंगाल से युवकों की भर्ती की कवायद में जुटे हैं. इसके साथ ही वे यहां खतरनाक वारदात अंजाम दे सकते हैं. इसलिए समय रहते इस दिशा में ठोस कदम उठाना होगा.

सरकार का दावा है कि सीमाई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था चुस्त कर दी गई है. लेकिन अतीत में सक्रिय बांग्लादेशी आतंकवादी संगठन की गतिविधियों व वारदातों को ध्यान में रखते हुए महज सुरक्षा व्यवस्था चुस्त करने से ही काम नहीं होगा. इसके लिए आईएस की ऑनलाइन गतिविधियों पर भी अंकुश लगाना जरूरी है ताकि राज्य के युवा उसकी ओर आकर्षित ना हों.

वैसे भी सीमावर्ती इलाकों से हजारों युवक रोजगार के सिलसिले में इराक और मध्यपूर्व के देशों में जाते रहे हैं. ऐसे में इनमें से कितने युवक सीरिया का रुख कर लें, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है.

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