अश्विन और पंजाब की जीत बेईमानी क्यों लगती है? | ब्लॉग | DW | 26.03.2019
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ब्लॉग

अश्विन और पंजाब की जीत बेईमानी क्यों लगती है?

किसी भी कीमत पर जीत. किंग्स इलेवन पंजाब के कप्तान रविचंद्रन अश्विन इसी फॉर्मूले पर चले. उन्होंने टीम को जीत दिला दी, लेकिन अपने कद को वह बौना बना बैठे.

1990 और 2000 के दशक में ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड दौरे पर गई भारतीय टीम जब हारती थी, तब भी उसके लिए तालियां बजती थी. हार के बावजूद सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली, अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ के प्रदर्शन की खूब तारीफें होती थी. परिस्थितियां कितनी मुश्किल क्यों न हों, भारतीय टीम अपने प्रदर्शन से मैच जीतने की कोशिश करती थी. यही भावना बाकी टीमों की भी रहती है.

खेलों में उम्दा प्रदर्शन करने वाली टीम की जीत होती है और उस दिन पिछड़ने वाली टीम की हार. पेशेवर टीमें और खिलाड़ी अपनी कमियों से सीख लेकर आगे बढ़ते हैं. लेकिन जयपुर के सवाई माधोसिंह स्टेडियम में जिस तरह किंग्स इलेवन की जीत हुई, वो बेईमानी ज्यादा लग रही है.

पंजाब के कप्तान रविचंद्रन अश्विन ने क्रिकेट के नियमों के तहत राजस्थान रॉयल्स के सलामी बल्लेबाज जोस बटलर को रन आउट किया. क्रिकेट के नियमों के तहत "मैनकडेड" आउट होता है. यह ऐसी स्थिति में लागू होता है जब नॉन स्ट्राइक पर खड़ा बल्लेबाज गेंदबाज के बॉल फेंकने से पहले ही क्रीज से बाहर निकल जाए. आम तौर पर ऐसा तेजी से रन चुराने के लिए किया जाता है.

इस नियम के पीछे इरादा यह है कि नॉन स्ट्राइकर बल्लेबाज गेंद फेंकने से पहले ही बहुत दूर न चला जाए. इससे बल्लेबाजों को अतिरिक्त फायदा मिलता है. इस एडवांटेज को रोकने के लिए ही मैनकडेड नियम बनाया गया.

लेकिन गेंद फेंकने से पहले नॉन स्ट्राइक पर खड़ा बल्लेबाज आम तौर पर हल्का स्टार्ट लेता है. इस स्टार्ट से रन लेने के लिए जरूरी लय हासिल करने में मदद मिलती है. आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय टीमों से लेकर गली मुहल्लों में क्रिकेट खेलने वाली टीमें तक इस स्टार्ट को मानती हैं. बल्लेबाज बहुत दूर न निकले तो इसमें कोई हर्ज नहीं देखती हैं.

बल्लेबाज के ज्यादा बाहर जाने पर भी खेल भावना के तहत पहले चेतावनी दी जाती है. लेकिन अश्विन ने ऐसा कुछ नहीं किया. राजस्थान के खिलाफ जयपुर में कभी न जीत पाने वाली पंजाब की टीम, किसी भी तरह रिकॉर्ड बदलना चाहती थी. किसी भी कीमत पर जीत के चक्कर में पंजाब के कप्तान आर अश्विन खेल भावना को भुला गए. 2012 में श्रीलंका के खिलाफ भी उन्होंने ऐसा ही किया था, लेकिन तब टीम इंडिया की कप्तानी कर रहे वीरेंद्र सहवाग ने अपील वापस लेकर खेल भावना का परिचय दिया. इंग्लैंड के खिलाफ एक मैच में क्रिस गेल ने भी मजाकिया अंदाज में ऐसी चेतावनी दी.

ऐसे पलों से वाकिफ अश्विन 2019 के आईपीएल में उसी खेल भावना को भुला बैठे. बेहतर तो यह होता कि अश्विन बटलर को चेतावनी देते या अपील वापस ले लेते. लंबे अरसे तक दुनिया के नंबर वन स्पिनर रहे अश्विन का बतौर कप्तान और गेंदबाज ऐसा करना, यह भी दिखाता है कि उन्हें अपनी फिरकी और अपनी रणनीति पर कितना भरोसा है.

अश्विन समेत कुछ और लोग भले ही नियमों का हवाला दें, रिकॉर्ड बुक में भले ही पंजाब की जीत दर्ज हो, लेकिन संदेश यही निकला है कि अश्विन जैसी हरकत अच्छी बात नहीं है.

(क्रिकेट में इन 10 तरीकों से होते हैं आउट)

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