अर्थव्यस्था पर निवेश का अंदाज बदले | विज्ञान | DW | 16.09.2014
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विज्ञान

अर्थव्यस्था पर निवेश का अंदाज बदले

जलवायु परिवर्तन पर अमेरिकी उच्च स्तरीय पैनल की रिपोर्ट में कहा गया कि अगर देश भावी अर्थव्यवस्था के निर्माण में निवेश सोच समझ कर करें, तो अगले 15 सालों में जलवायु संरक्षण की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है.

मेक्सिको के पूर्व राष्ट्रपति फेलिपे कैल्डेरॉन की अध्यक्षता वाले आयोग ने कहा कि दुनिया भर के देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अक्षय ऊर्जा के इस्तेमाल, मरुस्थलीकरण पर रोक और साफ सुथरी तकनीक पर ध्यान देना होगा. जलवायु परिवर्तन पर ताजा रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले 15 साल बेहद अहम होंगे जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में तमाम बदलाव आएंगे. आने वाले समय में जबकि तेजी से शहरीकरण होगा, दुनिया भर में आधारभूत ढांचे पर करीब 900 खरब डॉलर का निवेश होगा.

कैल्डेरॉन ने कहा, "हम इस पैसे का निवेश ज्यादा कार्बन वाले तरीके से भी कर सकते हैं या फिर दूसरी तरह भी. आने वाले 15 सालों में लिए जाने वाले फैसले और 15 सालों में किए जाने वाले निवेश दुनिया का भविष्य निर्धारित करेंगे."

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन से ठीक पहले पेश की गई रिपोर्ट में कार्बन के स्तर को कम करने पर जोर दिया गया है. अनुमान लगाया जा रहा है कि पर्यावण के लिए हितकर निवेश में प्रति वर्ष करीब 270 अरब डॉलर का खर्च ज्यादा आएगा. लेकिन इन खर्चों को ईंधन पर कम खर्च करके संतुलित किया जा सकता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सोचना कि पर्यावरण के लिए उठाए जाने वाले कदम बहुत महंगे हैं, यह वर्तमान समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ी गलतफहमी है. यह एक आम धारणा है कि अर्थव्यवस्थाएं अपनी जगह सही हैं और उन्हें बदला नहीं जा सकता. रिपोर्ट के अनुसार यह मान लिया जाता है कि पीछे के सालों की तरह आने वाले समय में भी अर्थव्यवस्थाओं का विकास उसी तरह होगा. जबकि सच यह है कि इनका बदला जाना हमारे हाथ में है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रदूषण के कारण हो रही स्वास्थ्य समस्याएं और मौतें इसी अर्थव्यवस्था के ही दोष हैं. कार्बन उत्सर्जन में सबसे आगे चीन ने इस दिशा में भारी नुकसान उठाया है.

पर्यावरण को बर्बाद कर रहे कार्बन उत्सर्जन पर रोक के खिलाफ दुनिया भर की सरकारों को अपने यहां विरोध सहना पड़ता है. विरोधीयों की दलील होती है कि इससे उनकी अर्थव्यवस्था और नौकरियों पर भी असर पड़ेगा. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून 23 सितंबर को जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे. इस सम्मेलन में अगले साल पेरिस में होने वाली कांफ्रेंस में जलवायु परिवर्तन पर होने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते के बारे में चर्चा होगी.

एसएफ/आईबी (एएफपी)


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