अमेरिकी घटना के बाद जर्मन संसद की सुरक्षा पर बहस | दुनिया | DW | 08.01.2021
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दुनिया

अमेरिकी घटना के बाद जर्मन संसद की सुरक्षा पर बहस

अमेरिकी संसद पर हिंसक प्रदर्शनकारियों के हमलों के बाद जर्मन संसद की सुरक्षा को सख्त करने पर विचार हो रहा है. पिछले साल कोरोना विरोधी प्रदर्शनकारियों ने जर्मन संसद के सामने हिंसक प्रदर्शन किया था.

जर्मन संसद की इमारत

जर्मन संसद की सुरक्षा पर कई महीनों से चर्चा हो रही है

जर्मन संसद के निचले सदन बुंडेस्टाग के अध्यक्ष वोल्फगांग शॉएब्ले ने कहा कि अधिकारी जर्मन संसद की सुरक्षा के लिए जरूरी उपायों की समीक्षा करेंगे. शॉएब्ले ने कहा कि अधिकारी जो भी समीक्षा करेंगे, फिर उस पर उनका कार्यालय विचार करेगा. जर्मन सरकार ने अमेरिका में अपने दूतावास से भी इस बारे में रिपोर्ट मांगी है कि "कैपिटॉल पर हिंसक उपद्रवी किस तरह पहुंच गए."

जर्मन संसद की सुरक्षा को बेहतर करने के लिए संसद में प्रतिनिधित्व रखने वाली सभी पार्टियों के सुरक्षा प्रतिनिधियों से भी बात किए जाने की संभावना है. इस बारे में बर्लिन राज्य और जर्मनी के गृह मंत्रालय के अधिकारियों की राय भी ली जाएगी.

वॉशिंगटन की घटना पर जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने कहा कि इस पर उन्हें "गुस्सा भी आया और दुख भी हुआ". उन्होंने कहा कि कुछ हद तक इसकी जिम्मेदारी अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर भी है जिन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में अपनी हार नहीं मानी.

वैसे जर्मन संसद की सुरक्षा की समीक्षा की अकेली वजह वॉशिंगटन की घटना नहीं है. इससे पहले अगस्त में कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने भी जर्मन संसद की इमारत में घुसने की कोशिश की थी. नवंबर में भी ऐसी कोशिश देखने को मिली. इसके बाद जर्मन संसद की सुरक्षा को लेकर लगातार चर्चा हो रही है.

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अपनी तरफ भी देखें...

जर्मन विदेश मंत्री हाइको मास ने अमेरिकी संसद पर ट्रंप समर्थकों के धावे और लॉकडाउन विरोधी प्रदर्शनकारियों की जर्मन संसद में घुसने की कोशिश की तुलना की है. इसके साथ ही उन्होंने जर्मनी के हाले और हानाऊ में हुए हमलों का भी जिक्र किया. उनका कहना है कि अमेरिका पर ऊंगली उठाने से पहले अपने आसपास भी देखना होगा.

मास ने कहा, "यहां तक कि हानाऊ में, हाले में और राइषटाग (जर्मन संसद) की सीढ़ियों पर, हमने अनुभव किया कि कैसे आवेश और भड़काऊ शब्द घृणित कृत्यों में बदल गए. " मास ने अमेरिकी संसद पर हुए हमले पर अपनी प्रतिक्रिया में राइषटाग पर हुई घटनाओं का जिक्र किया.

धुर दक्षिणपंथी एएफडी पार्टी के कुछ सांसदों पर प्रदर्शनकारियों को जर्मन संसद में बुलाने का आरोप है. कुछ सांसद तो आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों में शामिल दिखे थे. प्रदर्शनकारियों ने कई सांसदों के साथ बदसलूकी भी की.

लेकिन गुरुवार को एएफडी पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि पिछले साल राइषटाग पर हुए प्रदर्शनों से उसका कुछ लेना देना नहीं है. पार्टी का कहना है कि दूसरे लोग राजनीतिक फायदे के लिए अमेरिका के हालिया घटनाक्रम का इस्तेमाल कर रहे हैं. पार्टी के नेताओं ने एक बयान में कहा, "जो कोई भी वॉशिंगटन में अशांति की तुलना बर्लिन में पिछले साल राइषटाग के सामने हुए प्रदर्शन से कर रहा है, वह जर्मनी में राजनीतिक कारणों से अराजक घटनाओं को इस्तेमाल कर रहा है."

एके/एमजे (एएफपी, ईपीडी)

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