अमेरिका में अगले 2 साल में मंदी की संभावना | दुनिया | DW | 19.08.2019
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दुनिया

अमेरिका में अगले 2 साल में मंदी की संभावना

2008 में विश्वव्यापी मंदी की शुरुआत अमेरिका से हुई थी. अमेरिकी अर्थशास्त्री अब एक बार फिर मंदी की चेतावनी दे रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ऐसी चेतावनियों को अपने चिर परिचित अंदाज में नकार रहे हैं.

कई अर्थशास्त्रियों ने यह संभावना जताई है कि अगले दो वर्ष में अमेरिका में मंदी आ सकती है. लेकिन अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व द्वारा उठाए गए कदमों ने इसे कुछ पीछे धकेल दिया है. ये बातें ताजा सर्वे के माध्यम से सामने आई हैं. पिछले सप्ताह अमेरिकी डाटा रिपोर्ट में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर मिली जुली तस्वीर पेश की गई. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रविवार को राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मंदी की बात को नकार दिया.

ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं सभी चीजों के लिए तैयार हूं. मुझे नहीं लगता कि हमारे देश में मंदी आ रही है. हम बहुत अच्छा कर रहे हैं. हमारे उपभोक्ता अमीर हैं. मैंने टैक्स में काफी छूट दी है. ऐसे में उपभोक्ताओं के पास काफी पैसा है. वे सामान खरीद कर रहे हैं. मैंने वालमार्ट की संख्या देखी है, उनमें तेजी से इजाफा हुआ है. और ज्यादातर अर्थशास्त्री कहते हैं कि हम मंदी की ओर नहीं बढ़ रहे हैं. लेकिन दुनिया के अन्य हिस्से हमारी तरह नहीं कर रहे हैं."

ट्रंप के आर्थिक सलाहकार लैरी कुडलो ने भी मंदी की बात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी. उन्होंने कहा, "मुझे किसी तरह की मंदी नहीं दिखती है. उपभोक्ता उच्च वेतन पर काम कर रहे हैं. वे तेजी से पैसे खर्च कर रहे हैं. जितना वे खर्च कर रहे हैं, उतनी बचत भी कर रहे हैं. इसलिए मुझे लगता है कि 2019 में खासकर दूसरे छमाही में अर्थव्यवस्था काफी अच्छी रहेगी. हम काफी अच्छे फैसले ले रहे हैं. आगे क्या होगा, इसे लेकर डरने की जरुरत नहीं है."

राष्ट्रपति ट्रंप और उनके आर्थिक सलाहकार के बयान के बाद सर्वेक्षण के ये नतीजे सार्वजनिक किए गए. नेशनल एसोसिएशन फॉर बिजनेस इकोनॉमिस्ट (एनएबीई) ने फरवरी में भी एक सर्वे किया था, जिसमें 10 फीसदी अर्थशास्त्रियों ने 2019 में ही मंदी आने की आशंका जताई थी. ताजा सर्वे में ऐसी संभावना जताने वालों की संख्या घटकर दो फीसदी रह गई. एनएबीई के अध्यक्ष और केपीएमजी में मुख्य अर्थशास्त्री कॉन्स्टेंस हंटर कहते हैं, "पैनल इस बात को लेकर विभाजित है कि मंदी 2020 में आएगी या 2021 में."

ट्रंप लगातार फेडरल रिजर्व पर लगातर निशाना साधते हुए और अधिक प्रोत्साहन की मांग करते हैं. इसके बाद एनएबीई ने नया पॉलिसी पोल करवाया. लेकिन केंद्रीय बैंक ने 31 जुलाई को लेंडिंग रेट (बैंकों को दिए जाने वाले कर्ज की दर)  में कटौती कर दी. हालांकि, केंद्रीय बैंक पहले से ही यह संकेत दे रहा था कि चीन के साथ कारोबारी युद्ध सहित आर्थिक दृष्टिकोण को देखते हुए 2018 में कर्ज दर में जो वृद्धि की गई थी, उसे वापस लिया जाएगा.

ज्यादातर अर्थशास्त्रियों ने अपने पहले के नतीजे को बदलते हुए 2021 में मंदी की भविष्यवाणी है. सर्वे के नतीजे दिखाते हैं कि 46 प्रतिशत लोगों को केंद्रीय बैंक द्वारा इस साल कर्ज दर में एक बार और कटौती की उम्मीद है. वहीं एक तिहाई का कहना है कि जो नीति है, वह जारी रहेगी. मौजूदा नीति के तहत लेंडिंग रेट 2.25 प्रतिशत है. 

एनएबीई के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों को लगता है कि ट्रंप व्यापार युद्ध का शायद ही समाधान कर पाएं. हालांकि 64 प्रतिशत ने कहा कि कोई सतही समझौता संभव है. अर्थशास्त्रियों की ऐसी अटकलों के बीचे ही ट्रंप ने चीन से आने वाले 300 अरब डॉलर के माल पर 10 प्रतिशत और ज्यादा टैक्स लगाने की घोषणा कर दी.

सर्वे में राजकोषीय नीति के बारे में भी पूछे गए थे. इसके जवाब में अर्थशास्त्रियों के एक बड़े समूह ने कहा कि ट्रंप द्वारा टैक्स में कटौती की वजह से पिछले 18 महीनों में आवासीय गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा क्योंकि कटौती में बदलाव का प्रभाव बैंक में एक तय समय के लिए जमा नगदी के ब्याज पर भी पड़ा है.

आरआर/ओएसजे (एएफपी)

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