अमेरिका, जापान से ज्यादा अमीर हैं चंद टैक्स चोर | लाइफस्टाइल | DW | 23.07.2012
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लाइफस्टाइल

अमेरिका, जापान से ज्यादा अमीर हैं चंद टैक्स चोर

अमेरिका और जापान की अर्थव्यवस्था को मिला दिया जाए तो जितना पैसा जमा होगा, उतना धन कुछ लोगों के पास है. यह अकूत पैसा उनके गोपनीय बैंक खातों में जमा है. अनुमान है कि यह रकम 21,000 अरब डॉलर से ज्यादा है.

यूरोप आर्थिक संकट से छटपटा रहा है. अमेरिका उठने की कोशिश में बार बार गिर रहा है. भारत और चीन भी धीमे पड़ रहे हैं. स्पेन और ग्रीस जैसे देशों को कड़ी शर्तों के बीच कर्ज मिल रहा है. मंदी का शिकार झेल रहे देशों की मदद के लिए भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और जर्मनी जैसे देश बड़ा पैसा झोंक रहे हैं. लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक कर चोरों की पनाहगाह बने बैंकों में 21,000 अरब डॉलर जमा हैं.

ब्रिटिश संस्था द टैक्स जस्टिस नेटवर्क के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय लेन देनों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की आंकड़ों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है. रिपोर्ट के लेखक और अर्थशास्त्री जेम्स हेनरी कहते हैं कि केमैन आइलैंड्स और स्विट्जरलैंड के बैंकों में 32,000 अरब डॉलर तक की रकम छुपाई गई हो सकती है.

हेनरी के मुताबिक यह संपत्ति रखने के लिए बहुत ज्यादा पैसा चुकाया जाता है. वैश्विक अर्थव्यवस्था की, कानून की और बैंकिंग तंत्र की कमजोरियों का फायदा उठा कर यह पैसा जमा किया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक शीर्ष के दस निजी बैंकों के पास 2005 में 2,300 अरब डॉलर थे. 2010 में यह रकम बढ़कर 6,000 अरब डॉलर हो गई.

टैक्स विशेषज्ञ और ब्रिटेन सरकार के सलाहकार जॉन व्हाइटिंग रिपोर्ट पर कुछ संदेह जता रहे हैं. वह कहते हैं, "इस बात के सबूत तो हैं कि बड़ी मात्रा में पैसा छुपाया गया है लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि यह रकम इतनी ही है जितनी कि इस रिपोर्ट में बताई गई है."

द टैक्स जस्टिस नेटवर्क के कार्यकर्ता टैक्स में पारदर्शिता की मांग करते हैं. वे कर चोरी के गढ़ बने देशों और बैंकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं. 2008 में दुनिया भर में आर्थिक मंदी छानी शुरू हुई. 2010 में एक रिपोर्ट आई, उसमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय तंत्र से 7,000 अरब डॉलर गायब हैं.

हालांकि मंदी के दौरान अमेरिका और यूरोपीय देशों ने स्विट्जरलैंड पर दबाव बनाया. दबाव के तहत स्विट्जरलैंड ने बैंक गोपनीयता कानून में बदलाव भी किये. लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था से गायब हुआ पैसा अब भी बाजार में नहीं आया है. कर चोरों के खिलाफ अभियान छेड़ने वाले कार्यकर्ताओं के मुताबिक कुछ बैंकों में छुपाए गये काले धन में सबसे ज्यादा, करीब 70 फीसदी पैसा भारतीयों का है. उसके बाद रूसियों का नंबर आता है, जिनका 14 फीसदी पैसा स्विट्जरलैंड, लीश्टेनश्टाइन, लक्जमबर्ग और केमैन आइलैंड्स में छुपा है.

रिपोर्टः ओसिंह (एएफपी)

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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