अभिनेता नहीं बनना चाहते थे पूरब कोहली | मनोरंजन | DW | 29.03.2014
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मनोरंजन

अभिनेता नहीं बनना चाहते थे पूरब कोहली

टेलीविजन धारावाहिक हिप हिप हुर्रे के जरिए छोटे परदे पर करियर शुरू करने वाले अभिनेता पूरब कोहली ने वर्ष 2003 में बस यूं ही फिल्मों में पांव रखा था. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वह अभिनेता बनना ही नहीं चाहते थे.

इस साल फरवरी में उनकी फिल्म शादी के साइड इफेक्ट्स रिलीज हो चुकी है. अब चार अप्रैल को नई फिल्म जाल रिलीज होने वाली है. इसके प्रमोशन के लिए कोलकाता पहुंचे पूरब ने अपने अब तक के सफर के बारे में डॉयचे वेले के कुछ सवालों के जवाब दिए. पेश हैं उस बातचीत के मुख्य अंश.

डॉयचे वेलेः जाल कैसी फिल्म है?

पूरब कोहलीः यह एक अछूते विषय पर बनी बेहतर फिल्म है. अच्छी है या नहीं, इसका फैसला तो दर्शक करेंगे. लेकिन मैं अपने काम से संतुष्ट हूं. मैंने इसमें एक ऐसा किरदार निभाया है जो रेगिस्तान में पानी की तलाश करने में माहिर है. इसकी शूटिंग कच्छ के रण में की गई. वहां हालात बेहद प्रतिकूल थे और तापमान 50 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच जाता था. लेकिन फिल्म रोचक बनी है.

टीवी में काम करते समय क्या फिल्मों में अभिनय की योजना बनाई थी?

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मैंने अभिनय या फिल्मों में आने की कोई योजना ही नहीं बनाई थी. शुरू से ही मैं अभिनेता नहीं बनना चाहता था. लेकिन धीरे-धीरे ऑफर मिलते रहे और काम करता रहा. बाद में लोगों ने जब अभिनय की सराहना की तो मेरी दिलचस्पी पैदा हो गई.

11 साल लंबे करियर में कभी हताशा के दौर से भी गुजरना पड़ा?

उतार-चढ़ाव तो हर व्यक्ति के जीवन में आते हैं और मैं भी अपवाद नहीं हूं. वर्ष 2009-10 मेरे करियर का सबसे हताशाजनक दौर था. रॉक आन की कामयाबी के बाद कई निर्माताओं ने मुझे मुख्य भूमिकाएं निभाने का ऑफर दिया था. लेकिन तब मंदी का दौर था. बाद में वैसी तमाम फिल्में शुरू ही नहीं हो सकीं. तब मैं बेहद हताश हो गया था.

बीते खासकर एक दशक में छोटे परदे का चरित्र काफी बदल गया है. क्या दोबारा वहां लौटना चाहेंगे?

मुझे छोटे परदे ने ही पहचान दी थी. हिप हिप हुर्रे में मेरे किरदार मजहर को अब भी पसंद किया जाता है. अब छोटे परदे का स्वरूप भी व्यापक हुआ है और उसकी पहुंच भी. टीवी अब भी सबसे बड़ा मंच है. बेहतर किरदार मिले तो वापसी पर विचार जरूर करूंगा.

फिल्मों में किसी खास निर्देशक के साथ काम करने की तमन्ना?

मैं ऐसे ढेरों नाम गिना सकता हूं. राजू हीरानी, विशाल भारद्वाज, इम्तियाज अली, राकेश ओमप्रकाश मेहरा और विक्रमादित्य मोटवाने से लेकर दर्जनों नाम हैं.

भावी योजना क्या है?

फिलहाल एक फिल्म की शूटिंग चल रही है. ऋतुपर्णो सेनगुप्ता वाली इस फिल्म का नाम है तेरे आने से. यह भी इसी साल रिलीज होगी.

आप युवा वोटरों को मतदान के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं?

हां, आपरेशन ब्लैकडॉट के तहत मैं युवाओं से वोट देने के लिए आगे आने की अपील कर रहा हूं. लोकतंत्र में युवा तबके की सक्रिय भागीदारी जरूरी है. लेकिन महज सोशल नेटवर्किंग साइटों पर लिखने से काम नहीं होगा. देश के बेहतर भविष्य के लिए युवा वर्ग को मतदान केंद्रों तक जा कर वोट देना होगा.

लोकसभा चुनाव में कोई पसंदीदा उम्मीदवार?

मेरी पसंदीदा उम्मीदवार हैं गुल पनाग. मैं उनके समर्थन में प्रचार करने भी जाऊंगा.

इंटरव्यूः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः आभा मोंढे

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