अब लंदन से भारत में ट्यूशन की आउटसोर्सिंग | दुनिया | DW | 11.09.2010
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दुनिया

अब लंदन से भारत में ट्यूशन की आउटसोर्सिंग

ब्रिटेन का एक स्कूल अध्यापकों के काम की भारत में आउटसोर्सिंग करने वाला पहला स्कूल बन गया है. पंजाब के 100 अध्यापक इस स्कूल के हर उस बच्चे को पढ़ाएंगे जो गणित में कमजोर हैं. छठी क्लास के इन बच्चों की औसत उम्र 11 साल है.

उत्तरी लंदन का एशमाउंट प्राइमरी स्कूल ब्राइटस्पार्क एजुकेशन नाम की इस सेवा का इस्तेमाल करने वाला पहला स्कूल बन गया है. यह सर्विस ब्रिटेन के व्यवसायी टॉम हूपर ने शुरू की है. इस सर्विस के तहत स्कूल के छठी क्लास के बच्चे जब एक वेबसाइट पर लॉग ऑन करेंगे उनके सामने स्क्रीन पर एक टीचर होगा जो उन्हें गणित पढ़ाएगा.

स्कूल को बच्चों की इस पढ़ाई के लिए हर बच्चे के हिसाब से हर घंटे के सिर्फ 12 पाउंड खर्च करने होंगे. यही काम अगर वह लंदन में निजी ट्यूटर्स से लेते हैं तो उन्हें हर घंटे के 40 पाउंड खर्चने पड़ेंगे. इस सर्विस में जो भारतीय अध्यापक काम कर रहे हैं वे सभी गणित के ग्रैजुएट हैं. उन सभी को पढ़ाने का अनुभव हासिल है और सभी की सुरक्षा जांच भी की गई है. ये सभी कंपनी के फुल टाइम कर्मचारी हैं.

इस बारे में हूपर कहते हैं, "जब मैं यूनिवर्सिटी में पढ़ता था तो कुछ पैसे कमाने के लिए ट्यूशन पढ़ाया करता था. ग्रैजुएशन करने के बाद भी मैं ऐसा करता रहा. लेकिन बच्चों के लिए ट्यूशन काफी महंगा पड़ता है. लंदन में तो इसके लिए आपको हर घंटे के 30 से 40 पाउंड तक खर्च करने पड़ते हैं."

हूपर बताते हैं कि इसी वजह से उन्हें ऑनलाइन ट्यूशन का यह विचार काफी सुविधाजनक लगता है. इसमें बदलाव की गुंजाइश भी है और हर बच्चे पर पूरा ध्यान भी दिया जा सकता है.

इस सर्विस में भर्ती किए गए सभी अध्यापक ब्रिटेन में गणित के सिलेबस की ट्रेनिंग हासिल कर चुके हैं. उन्हें एक घंटे के सात पाउंड यानी करीब 500 रुपये मिलेंगे. एशमाउंट की असिस्टेंट हेड टीचर रेबेका स्टेसी ने टाइम्स अखबार को बताया कि इस सर्विस का इस्तेमाल करने के बाद बच्चों की समझ में हैरतअंगेज रूप से इजाफा हुआ है. स्टेसी ने कहा, "हम कोशिश करते हैं कि हर छात्र को वही टीचर मिले जिससे वह पढ़ता रहा है. बच्चे इसका काफी मजा ले रहे हैं. जिन बच्चों को गणित मुश्किल लगता है उनके लिए इसे समझने का यह एक अलग तरीका है."

स्टेसी ने बताया कि जब एजेंसी ने उनसे इस सर्विस के लिए संपर्क किया तब यह योजना प्रयोग के तौर पर ही शुरू की गई, लेकिन जब इसके अच्छे नतीजे सामने आए तो अब स्कूल इसे अन्य कक्षाओं में भी बढ़ाने पर विचार कर रहा है. लेकिन सभी इस व्यवस्था से खुश हों, ऐसा नहीं है. लंदन यूनिवर्सिटी में इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन के निदेशक डिलान विलियम कहते हैं कि इस व्यवस्था के कुछ खतरे भी हैं. वह कहते हैं, "यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्यूटर्स की अंग्रेजी कैसी है. इसके अलावा उन्हें इस देश की संस्कृति को भी समझना होगा."

इंग्लैंड में गणित पढ़ाने वाले ट्यूटर्स काफी कम हैं. गणित में ग्रैजुएशन करने वाले छात्रों को यहां पोस्ट ग्रैजुएशन करने के लिए पांच हजार पाउंड्स दिए जाते हैं. इसके बावजूद पिछले साल देश में कुल 5980 स्टूडेंट्स ने ही गणित में पोस्ट ग्रैजुएशन की. भारत में ऐसे स्टूडेंट्स की संख्या छह लाख 90 हजार रही.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः एस गौड़

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