अफ्रीकी कप का आगाज | खेल | DW | 19.01.2013
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खेल

अफ्रीकी कप का आगाज

विश्व कप करा चुके देश में अब अफ्रीका कप फुटबॉल हो रहा है और एक बार फिर इंतजामात को लेकर सवाल उठ रहे हैं. पहले मुकाबले में मेजबान देश को पहली बार खेल रहे केप वेर्डी से भिड़ना है.

मुकाबला बस शुरू होने वाला है लेकिन लोगों में इसे लेकर बहुत ज्यादा उत्साह नहीं देखा जा रहा है. अफ्रीका कप के कुछ मुकाबले जोहानिसबर्ग में भी होंगे, जहां विश्व कप के मैच भी हो चुके हैं. 2010 के वर्ल्ड कप के दौरान दक्षिण अफ्रीका में खूब लोग जमा हुए, जो बात अफ्रीकी कप में नजर नहीं आ रही. यह टूर्नामेंट 10 फरवरी तक चलेगा.

स्थानीय आयोजन समिति और गावतेंग प्रांत ने बदइंतजामी के लिए एक दूसरे पर आरोप लगाए हैं. टिकटों की बिक्री भी बहुत ज्यादा उत्साहजनक नहीं दिख रही है. आयोजन समिति ने पांच लाख टिकट बेचने का लक्ष्य रखा था, जो आखिरी वक्त तक पूरा होता नहीं दिख रहा है. हफ्ते भर पहले की रिपोर्ट के मुताबिक आधे से भी कम सीटों पर दर्शक नजर आने वाले हैं.

रस्टेनबर्ग और पोर्ट एलिजाबेथ में भी टिकटों की बिक्री के यही हालात हैं. स्थानीय मीडिया ने रिपोर्ट दी है कि आम लोगों को टिकट पाने में ही दिक्कत हो रही है, जबकि टिकट बेचने का काम रिटेल सेक्टर को दे दिया गया है. हालांकि आयोजन करने वालों का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में टूर्नामेंट से ठीक पहले टिकटों की बिक्री होती है और उन्हें इस बात की ज्यादा चिंता नहीं है.

इंतजाम में कितनी गड़बड़ी है, इसका अंदाजा इस बात से भी लग सकता है कि जब पत्रकारों को पास देने की बारी आई तो किसी के पास में किसी और का फोटो और डिटेल लगा था. नवंबर में अंतरराष्ट्रीय मीडिया को रजिस्टर करने की सूचना दी गई थी. इसके बाद से वेबसाइट को अपडेट नहीं किया गया है, हालांकि पत्रकारों को बता दिया गया है कि उनके पास रजिस्टर हो गए हैं.

विश्व कप के लिए दुनिया भर के दर्शक आए थे, लेकिन अफ्रीका कप में बाहर से आने वाले दर्शकों की संख्या भी बहुत कम बताई जा रही है. छोटे शहरों में रहने वाले फुटबॉल प्रेमियों के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है. 2010 के वर्ल्ड कप के बाद दक्षिण अफ्रीकी फुटबॉल में मैच फिक्सिंग का मामला भी सामने आया था. इसका असर अफ्रीका कप देखने आने वाले लोगों की संख्या पर भी पड़ रहा है. आयोजन समिति ने खुद को इस स्कैंडल से दूर रखने की कोशिश की है.

दरअसल इस बार का टूर्नामेंट लीबिया में होना था. लेकिन वहां के हालात को देखते हुए मेजबान देश बदलने का फैसला किया गया. दक्षिण अफ्रीका को सितंबर में कहा गया कि उसे मुकाबले कराने हैं और इस तरह तैयारी के लिए उसके पास सिर्फ चार महीने का वक्त ही था. आयोजकों का मानना था कि हाल ही में वर्ल्ड कप आयोजित कराने की वजह से दक्षिण अफ्रीका को कोई परेशानी नहीं होगी लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है.

एजेए/एमजे (डीपीए)

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