अफवाहों में और बिगड़ता पाकिस्तान का बिजली संकट | दुनिया | DW | 11.07.2017
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दुनिया

अफवाहों में और बिगड़ता पाकिस्तान का बिजली संकट

शहरों और गांवों में 10 से 16 घंटे तक बिजली गुल रहने के बाद लोगों ने घरों में सोलर पैनल लगवाना शुरू कर दिया. बिजली देने में नाकाम बिजली कंपनी के कर्मचारी सोलर पैनल को लेकर आम लोगों के बीच भ्रामक जानकारियां फैला रहे हैं.

मोहम्मद असलम को अपने परिवार को लंबी लोडशेडिंग से राहत दिलाने के लिए आखिरकार एक रास्ता मिल गया. फरवरी में उन्होंने बिजली पैदा करने वाला 300 वॉट का एक सोलर पावर सिस्टम घर की छत पर लगवा लिया. पाकिस्तान के शहरों में 10 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 16 घंटे तक की बिजली की कटौती की जा रही है. यह स्थिति भीषण गर्मियों के महीनों में और भयावह हो जाती है, जब एयर कंडीशनर बिजली कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं.

सोलर विकल्प

बिजली संकट के इस अंतर को भरने के लिए सोलर पैनल खरीदना एक स्वभाविक उपाय है और 35 वर्षीय असलम के गांव में तो साल 2014 से सोलर पैनल मिल रहे हैं, लेकिन उन्होंने घर में सोलर पैनल लगाने में दो साल की देरी की. इसकी वजह यह नहीं थी कि असलम को पैसों की परेशानी थी. लेकिन उनके आसपास अफवाह थी कि सोलर पैनल हालात को और बिगाड़ देंगे. इसीलिए उन्होंने सोलर पैनल लगवाने के फैसले को टाल दिया.

इस बारे में असलम ने बिजली कंपनी के अधिकारियों से पूछताछ की. उन्होंने असलम को यह बताया कि गहरे रंग के सोलर पैनल सूरज की किरणों को सोख कर बिजली पैदा करते हैं लेकिन इससे आसपास और घर के भीतर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और स्थिति पहले से और भी अधिक खराब हो जाती है.

झूठी अफवाह

असलम के अनुसार बिजली कंपनी के अधिकारियों ने यह भी कहा कि सोलर पैनल का बढ़ता इस्तेमाल भी पाकिस्तान की लू और गर्मी के लिए जिम्मेदार है. जिसे वैज्ञानिक पूरी तरह नकारते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है, "जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक बढ़ती गर्मी औद्योगिक क्रांति की शुरुआत के बाद से कोयले, तेल और गैस के बहुत ज्यादा इस्तेमाल से हो रहा है."

असलम ने रॉयटर्स को बताया, "इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट एक दोस्त के कहने के बाद मैंने सोलर सिस्टम लगवाया और मुझे समझ आया कि यह एक झूठी अफवाह थी.'' उनके दोस्त ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अफवाहें बिजली कंपनी के कर्मचारियों की एक चाल थी. क्योंकि वे बड़े स्तर पर लगाए जा रहे सोलर सिस्टम को कम करना और अपनी नौकरी सुरक्षित करना चाहते थे.

इस्लामाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी के जनरल मैनेजर तारीक महमूद कहते हैं, "हमें नहीं मालूम कि कंपनी का कोई कर्मचारी अफवाह फैला रहा है. हमारी बिजली कंपनी का किसी अफवाह से कोई संबंध नहीं है और लोगों को उनपर यकीन नहीं करना चाहिए."

मिली बड़ी राहत

असलम को नया सोलर सिस्टम लगवाने में 500 डॉलर का खर्चा आया. सोलर सिस्टम इतनी बिजली पैदा कर लेता है कि दिन में पंखे चल सकें और साथ ही बैटरी इतनी चार्ज हो जाती है कि जब रात को बिजली जाए तो 6-7 घंटे के लिए ट्यूबलाइट और पंखे चल सकें. यह बैटरी सोलर पावर की मदद से तीन घंटे में पूरी तरह चार्ज हो जाती है. अब असलम को इस बात से बड़ी राहत है कि बिजली कटौती होने के बाद भी उनके पास बिजली रहती है.

इस्लामाबाद में सोलर पैनल का व्यापार करने वाले अब्दुल करीम कहते हैं कि लोग अक्सर सोलर पैनल के बारे में सुनी हुई अफवाह के बारे में बताते हैं जो गर्मी की समस्या और बढ़ा देता है. इन अफवाहों को गलत साबित करने के लिए मैं अक्सर उन्हें अपनी दुकान की छत पर ले जाता हूं, जहां मैंने सोलर सिस्टम लगाया है. फिर वे मुझसे सोलर सिस्टम खरीद लेते हैं. 

नया बिजली कनेक्शन

पाकिस्तान रेलवे के रिटायर कर्मचारी राजा जमील को दो साल पहले इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में बने उनके घर के लिए नया बिजली कनेक्शन नहीं मिल रहा था. आखिर में उन्होंने वो काम किया जो वे कई महीनों तक नहीं करना चाह रहे थे. उन्होंने बिजली कंपनी के अधीक्षक को पचास डॉलर की रिश्वत दी.

जमील ने कहा, "उन्हें लगता है कि बिजली कंपनी के जो कर्मचारी नये कनेक्शन देते हैं, वे सोलर पैनल से जुड़ी अफवाहें फैला रहे हैं क्योंकि वे नये कनेक्शन देने के वक्त मिलने वाली रिश्वत को नहीं खोना चाहते हैं."

एसएस/एमजे (रॉयटर्स)

 

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