अपने जिहादी नागरिकों को वापस ले यूरोप | दुनिया | DW | 18.02.2019
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दुनिया

अपने जिहादी नागरिकों को वापस ले यूरोप

उनके सामने लोगों के सिर कलम किए गए. उन्होंने लोगों को बर्बर हत्याएं कीं. इस्लामिक स्टेट के ऐसे लड़ाके जब वापस यूरोप लौटेंगे तो क्या होगा? ट्रंप के बयान के बाद यूरोप को यह चिंता खाए जा रही है.

यूरोप के देश जिस आशंका से अब तक बचते रहे, वो अब सामने है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने यूरोपीय सहयोगियों से कह दिया है कि वे इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ने वाले अपने नागरिकों को वापस लें. ऐसे हजारों यूरोपीय नागरिक फिलहाल अमेरिका द्वारा समर्थित सीरियाई कुर्द ताकतों की हिरासत में हैं.

अपने ट्वीट में ट्रंप ने लिखा, "अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और अन्य यूरोपीय साझेदारों से उन 800 आईसिस लड़ाकों को वापस लेने को कह रहा है, जिन्हें हम सीरिया में पकड़ चुके हैं और सुनवाई तक पहुंचा चुके हैं. खलीफत ढहने को तैयार है. विकल्प अच्छा नहीं है, जिसमें हमें उन्हें रिहा करने पर बाध्य होना पड़ेगा."

अमेरिका द्वारा समर्थित सीरियन डेमोक्रैटिक फोर्सेस (एसडीएफ) ने करीब 800 लड़ाकों, 600 महिलाओं और 1,200 से ज्यादा बच्चों को हिरासत में लिया है. लड़ाके और महिलाएं आईएस से जुड़े थे. इराक और सीरिया के बड़े हिस्से में कब्जे के दौरान हजारों बच्चों का जन्म भी हुआ.

यूरोप के सरकारें अब तक इस्लामिक स्टेट से जुड़े अपने नागरिकों को वापस लेने से कन्नी काटती रही हैं. सरकारों को लगता है कि इस्लामिक स्टेट के जुड़ चुके युवाओं को वापस लेने से देश की आंतरिक सुरक्षा खतरे में पड़ेगी. जर्मनी और फ्रांस ऐसे जेहादी हमले झेल भी चुके हैं. लेकिन यूरोप की चिंताओं और आपत्तियों को खारिज करते हुए ट्रंप सीरिया से अपनी सेना वापस बुलाने का एलान कर चुके है. अमेरिकी सेना के कुर्द प्रभाव वाले इलाके से बाहर निकलते ही, वहां क्या होगा, यूरोप इस सवाल में उलझा है.

(कब कहां हारा इस्लामिक स्टेट)

इस बीच पश्चिमी मीडिया के बड़े हिस्से ने कैद किए गए इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों का इंटरव्यू भी किया है. ब्रिटेन से भागकर सीरिया गई एक युवती अब अपने बच्चे के साथ वापस लौटना चाहती है. 19 साल की शमीमा बेगम तीसरी बार मां बनी है. उसके दो बच्चे बीमारी और कुपोषण के चलते मारे जा चुके हैं. शमीमा तीसरे बच्चे को बचाने के लिए ब्रिटेन वापस लौटना चाहती है. सीरिया के कुर्द इलाके में कैद शमीमा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "जब मैंने पहली बार कटा हुआ सिर देखा तो मैं बिल्कुल भी हिचकी नहीं. वह युद्ध के मैदान में पकड़े गए एक लड़ाके का था, इस्लाम के दुश्मन का. मैंने यही सोचा कि अगर उसे मौका मिलता तो वह एक मुस्लिम महिला के साथ क्या करता."

2015 में अपनी दो स्कूली सहेलियों के साथ भाग कर सीरिया पहुंची शमीमा अब किसी तरह लंदन लौटना चाहती है. वह कहती हैं, "खिलाफत खत्म हो चुकी है. उसमें इतना ज्यादा दमन और भ्रष्टाचार था कि मुझे नहीं लगा कि वह जीत के हकदार हैं."

ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री बेन वालेस ने शमीमा बेगम की मदद करने से इनकार कर दिया है. वालेस के मुताबिक सीरिया में इस वक्त कॉन्सुलर मदद देना बहुत ही खतरनाक है. कुर्द लड़ाकों की कैद में इस्लामिक स्टेट के बर्बर वीडियोज में अंग्रेजी वॉयस ओवर करने वाला कनाडाई नागरिक भी है. उसे अब भी अपने किए पर पश्चाताप नहीं है. कुछ अन्य देशों के जेहादी भी ऐसे ही दावे कर रहे हैं.

सीरियाई कुर्द प्रशासन ने डॉयचे वेले को बताया कि दर्जनों जर्मन आईएस लड़ाके, महिलाएं और बच्चे उनकी हिरासत में हैं. जर्मन विदेश मंत्रालय का कहना है कि वह हिरासत में रखे गए जर्मन नागरिकों को कॉन्सुलर मदद मुहैया नहीं करा पा रहा है. फ्रांस अपने नागरिकों को वापस लेने और उन पर मुकदमा चलाने का संकेत दे रहा है.

ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जर्मन विदेश मंत्री हाइको मास ने कहा कि, "अमेरिका की मांग मानना असाधारण रूप से मुश्किल है." मास के मुताबिक जर्मन नागरिकों को जर्मनी वापस लौटने का अधिकार है. लेकिन जर्मनी का सीरिया की सरकार से कूटनीतिक रिश्ता कटा हुआ है. बर्लिन ने सीरिया में कुर्दों के स्वायत्त इलाके को मान्यता नहीं दी है, इसीलिए हिरासत में रखे गए नागरिकों की जांच करना संभव नहीं हो पा रहा है.

ओएसजे/आरपी (डीपीए, एएफपी, रॉयटर्स)

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