अपने इंटरनेट श्राद्ध की तैयारी | मनोरंजन | DW | 12.04.2013
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मनोरंजन

अपने इंटरनेट श्राद्ध की तैयारी

मौत के बाद आपके ईमेल अकाउंट और ऑनलाइन तस्वीरों का क्या होगा. गूगल यूजर्स को फोटो और डॉक्यूमेंट की विरासत तय करने के अधिकार देगा. अब ये लोगों पर है कि वो मरने के बाद अपने निशान इंटरनेट पर छोड़ना चाहते हैं या नहीं.

गूगल ने सर्विस को 'इनएक्टिव अकाउंट मैनेजर' नाम दिया है. लंबे समय तक गूगल ड्राइव, जीमेल, यूट्यूब और गूगल प्लस जैसी सेवाओं का इस्तेमाल न करने वाले यूजर्स का डाटा इनएक्टिव अकाउंट मैनेजर में चला जाएगा.

अपने यूजर्स के लिए तैयार किए गए संदेश में गूगल ने मृत्यु शब्द से परहेज किया है. लेकिन उसका इशारा देते हुए कहा गया है कि, "अगर आप लंबे समय तक अपने अकाउंट का इस्तेमाल नहीं करें तो आपकी तस्वीरों, इमेल और डॉक्यूमेंटों का क्या होना चाहिए. चाहे कोई भी कारण हो, हम आपको यह तय करने का विकल्प दे रहे हैं कि आपके डाटा का क्या हो." यूजर चाहे तो पूरा डाटा हटा सकेगा, उसे चुनिंदा लोगों के साथ बांट सकेगा या फिर हर चीज सार्वजनिक कर सकेगा.

कैलीफोर्निया से चलने वाली इंटरनेट की भीमकाय कंपनी ने यूजर्स से कहा है कि यह फैसला करने से पहले उन्हें कितना इंतजार करना चाहिए. गूगल के मुताबिक ऑनलाइन विरासत संबंधी अधिकार देने का विकल्प सीमित समय के लिए है. समयसीमा खत्म होने से पहले यूजर्स को ईमेल या ऑनलाइन संदेश भेजे जाएंगे.

इन दिनों क्लाउड कंप्यूटिंग का चलन उफान पर है. इंटरनेट कंपनियां यूजर्स को ऑनलाइन स्टोरेज की सुविधा दे रही हैं. यूजर्स को अपना डाटा न तो यूएसबी स्टिक में रखने की जरूरत है और न ही बड़ी हार्ड डिस्क ढोने की. इंटरनेट स्पीड तेज हो तो यूजर्स अपना डाटा इंटरनेट कंपनियों के सर्वर में रख सकते हैं और इंटरनेट कनेक्शन मिलने पर कहीं भी डाटा का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसे क्लाउड कंप्यूटिंग कहा जाता है.

Symbolbild Chinas große Firewall

फैसला करेंगे यूजर

सोशल नेटवर्किंग की सबसे बड़ी साइट फेसबुक ने भी अपने यूजर्स को मौत के बाद 'मेमोरियलाइज्ड' यानी स्मृति अकाउंट का विकल्प दिया है. अमेरिका समेत कई देशों में अब तक ऑनलाइन विरासत के अधिकारों के लिए स्पष्ट कानून नहीं हैं. ऐसे में इंटरनेट कंपनियां खुद अपनी तरफ से पहल कर रही हैं.

गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों से कई बार परिजन मृतक का अकाउंट बंद करने का आग्रह करते आए हैं. कुछ मामलों में परिवारों ने मृतक के अकाउंट को चलाने के अधिकार मांगे. 2005 में इराक में मारे गए एक अमेरिकी सैनिक के याहू अकाउंट को लेकर परिवार और कंपनी कोर्ट में उलझ पड़े. याहू ने परिवार को अकाउंट चलाने का अधिकार नहीं दिया. कंपनी ने कहा कि ऐसा करने से मृतक की गोपनीय जानकारियां बाहर आ सकती हैं. याहू ने यह तर्क भी दिया कि अकाउंट चलाने के अधिकार ट्रांसफर करना शर्तों के खिलाफ है.

गूगल के ऑफ्टर डेथ विकल्प के बाद दूसरी इंटरनेट कंपनियों पर भी ऐसे ही कदम उठाने का नैतिक दबाव पड़ेगा. मौत के बाद अगर यूजर्स अपनी जानकारी को पूरी तरह मिटा देना चाहेंगे तो इंटरनेट कंपनियों के सर्वर से अथाह डाटा का बोझ भी कम होगा. अब यह यूजर्स पर है कि वो इंटरनेट की दुनिया में जिंदा रहना चाहते हैं या फिर पूर्ण मृत्यु चाहते हैं.

ओएसजे/एनआर (एएफपी, डीपीए)

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