अपनी किस्मत का इम्तिहान ना ले भारतः चीन | दुनिया | DW | 24.07.2017
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दुनिया

अपनी किस्मत का इम्तिहान ना ले भारतः चीन

चीन ने चेतावनी के स्वर में कहा है कि भारत संप्रभु चीन के इलाकों की सुरक्षा करने में चीन की प्रतिबद्धता को कम करके ना आंके. दोनों देशों के बीच बीते कई हफ्तों से तनाव बना हुआ है.

चीन ने चेतावनी के स्वर में कहा है कि भारत संप्रभु चीन के इलाकों की सुरक्षा करने में चीन की प्रतिबद्धता को कम करके ना आंके. दोनों देशों के बीच बीते कई हफ्तों से तनाव बना हुआ है.

चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वू कियान ने भारतीय सेना से डोकलाम पठार से पीछे हटने की मांग को दोहराया है. इस इलाके पर भूटान अपना दावा जताता है जो भारत का सहयोगी देश है. उधर चीन के अधिकारी भारतीय सीमा की ओर सड़क बनाने में जुटे हैं. चीन का कहना है कि जून में भारतीय सुरक्षाबल चीन के डोंगलांग इलाके में आ गये और सड़क बनाने का काम रोक दिया.

चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वू कियान ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की 90वीं सालगिरह के सिलसिले में बुलायी गयी एक न्यूज कांफ्रेंस के दौरान कहा, "राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता को सुरक्षित रखने के प्रति चीन की प्रतिबद्धता अडिग है. हम भारत को याद दिलाना चाहते हैं कि वह किस्मत का इम्तिहान ना ले और किसी ख्वाब में ना रहे." चीनी प्रवक्ता ने यह भी कहा, "90 साल के इतिहास ने एक ही बात साबित की है कि हमारी सेना हमारी संप्रभुता को सुरक्षित रखने के लिए है और क्षेत्रीय एकता मजबूत हुई है और हमारी प्रतिबद्धता कभी कमजोर नहीं पड़ी. किसी पर्वत को हिलाने से ज्यादा मुश्किल है पीएलए को हिलाना." कियान का कहना है कि सेना को पीछे हटाना बातचीत की पूर्वशर्त है.

इस बीच भारत ने दोनों पक्षों से सेना हटाने की मांग की है ताकि पिछले महीने शुरू हुए विवाद को निपटाया जा सके. मामला तब बढ़ा जब चीनी सैनिकों ने तिब्बत में यादोंग से आने वाली सड़क को दक्षिण में बढ़ाना शुरू किया. हालांकि दोनों पक्षों ने संयम दिखाया है लेकिन दोनों देशों के कुछ लोगों ने जुबानी जंग तेज कर दी है जिससे यह आशंका पैदा हो गयी कि फिर वैसी स्थितियां ना बन जाएं जिनके कारण 1962 की जंग हुई थी.

परमाणु ताकत से लैस दोनों देशों के बीच करीब 3,500 किलोमीटर लंबी साझा सीमा है और इसमें कई जगहों पर विवाद है. बीते सालों में चीन भारत के मुख्य प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान का एक बड़ा सहयोगी और हथियार मुहैया कराने वाले देश के रूप में उभरा है.

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि दोनों तरफ के करीब 300 सैनिक एक दूसरे से 150 मीटर की दूरी पर खड़े हैं. यह वो इलाका है जो भारत को भूटान से अलग करता है और उस पतली सी पट्टी तक चीन की पहुंच बनाता है जिससे भारत अपने पूर्वोत्तर के इलाकों से जुड़ा है. भारत का कहना है कि उसने पहले ही चीन को जता दिया है कि सीमावर्ती इलाके में सड़क बनाने से सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ेंगी.

जल्द ही भारत के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ब्रिक्स देशों की सिक्योरिटी फोरम की बैठक में हिस्सा लेने चीन जाएंगे, तब मुमकिन है कि इस मामले पर दोनों देश आमने सामने बैठ कर चर्चा करेंगे. हालांकि कियान ने इस बारे में कुछ नहीं कहा कि डोवाल की यात्रा के दौरान इस द्विपक्षीय मुद्दे पर बातचीत होगी या नहीं.

ब्रिक्स बड़े विकासशील देशों का संगठन है जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं. इसी साल सितंबर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ब्रिक्स देशों के नेताओँ की बैठक में शामिल होने चीन जायेंगे.

एनआर/एके (एपी, रॉयटर्स)

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