अच्छे दिन आए क्या? | दुनिया | DW | 25.05.2015
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दुनिया

अच्छे दिन आए क्या?

देश में अच्छे दिन लाने के वादों के साथ सत्ता में आने वाली नरेंद्र मोदी की एनडीए सरकार एक साल पूरा कर रही है. यह देखना दिलचस्प है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग इस एक साल में अच्छे दिनों के वादे पर क्या सोचते हैं.

सारी भविष्यवाणियों को झुठला कर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आने वाली नरेंद्र मोदी की सरकार के एक साल पूरा होने पर सोशल मीडिया पर सरगर्मियां जोर पकड़ रही हैं. मोदी समर्थक और विरोधी अपने अपने मत रख रहे हैं. प्रधानमंत्री के रूप में एक साल में मोदी ने जो 18 विदेश यात्राएं की हैं उनपर भी मिली जुली प्रतिक्रिया है. कुछ लोग अपने कमेंट्स में चुटकी लेते हुए मोदी को भारत यात्रा करने की भी सलाह देते हैं तो कुछ उन्हें विदेश मंत्री कह कर पुकारते हैं. वहीं उनके समर्थक उनकी विदेश यात्राओं को 'मेक इन इंडिया' कैम्पेन और देश के विकास की दिशा में अहम कदम बताते हैं.

लेकिन घूम फिर कर सवाल 'अच्छे दिन' पर जरूर आता है. महिलाओं की सुरक्षा, किसानों की आत्महत्या के मामले और सिर चढ़ती महंगाई जनता के लिए अहम मुद्दे हैं, इस दिशा में इस एक साल में कोई बेहतरी हुई नहीं दिखाई देती.

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े परिवर्तन लाने के वादों पर भी सवाल उठ रहे हैं. हालांकि ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार के एक साल के रिपोर्ट कार्ड पर सिर्फ लाल रंग की सियाही ही गिराई जा रही है. मोदी का स्वच्छ भारत अभियान भी उनके कार्यकाल के पहले साल की हाईलाइट रहा. गांवों में शौचालय बनवाने के उनके कदम की सराहना भी हुई.

इस बीच भारत में किसानों की स्थिति और उनके अधिकारों का सवाल राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन गया है. विवाद के केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार का भूमि अधिग्रहण विधेयक है जिसे भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल आर्थिक विकास के लिए जरूरी और गरीबों के हित में बता रहे हैं. इसके विपरीत कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां उसे किसान विरोधी बताकर उसका जबर्दस्त विरोध कर रही हैं. विरोधियों का कहना है कि मोदी सरकार भूमि अधिग्रहण बिल द्वारा बड़े उद्योगपतियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को फायदा पहुंचाना चाहती है.

नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश यात्राओं के दौरान बड़े राजनीतिक्षों के साथ तो सेल्फी खींची ही, स्कूलों और कॉलेजों में भी इससे पीछे नहीं रहे. उनके सेल्फी प्रेम पर भी मिली जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ इसे मोदी का टेक्नोलॉजी प्रेमी प्रधानमंत्री होना बताते हैं तो कुछ इसे मोदी का आत्म प्रेम बताते हैं. 26 जनवरी को उनके द्वारा पहने गए कस्टमाइज्ड सूट की भी खासी खिल्ली उड़ी. दस लाख रूपये की कीमत वाले बताए जा रहे इस सूट पर धागों से उनका नाम बुना हुआ था.

हाल में चीन और दक्षिण कोरिया की यात्रा के दौरान मोदी की उस टिप्पणी की खासी आलोचना हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके सत्ता में आने से पहले भारतीय अपने आप को भारतीय बताने पर शर्मिंदा महसूस करते थे. सोशल मीडिया पर #ModiInsultsIndia का हैशटैग शुरू किया गया और बहुत से लोगों ने कहा कि उन्हें भारतीय होने पर गर्व है. मोदी को उनके कई विरोधी अपनी तारीफें खुद करने वाला राजनेता मानते हैं.

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