अंतरिक्ष रिसर्च में मजबूत होता रूस और चीन का गठजोड़ | विज्ञान | DW | 10.03.2021
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विज्ञान

अंतरिक्ष रिसर्च में मजबूत होता रूस और चीन का गठजोड़

रूस और चीन ने संयुक्त रूप से चांद पर एक अंतरिक्ष स्टेशन की योजना बनाई है. अंतरिक्ष अभियानों की बढ़ती होड़ में शामिल दोनों देश अमेरिका से पीछे नहीं रहना चाहते. अंतरिक्ष में नासा का भेजा एक स्टेशन पहले ही मौजूद है.

रूसी स्पेस एजेंसी रोसकोमोस ने बयान जारी कर कहा है कि उसने चीन के नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (सीएनएसए) के साथ चांद की सतह या उसकी कक्षा में एक जटिल रिसर्च केंद्र बनाने के लिए करार पर दस्तखत किए हैं. सीएनएसए ने अपनी तरफ से कहा है कि यह प्रोजेक्ट "उन सभी देशों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के लिए खुला है जो इसमें दिलचस्पी रखते हैं." विशेषज्ञ इसे अंतरिक्ष में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए चीन का सबसे बड़ा कार्यक्रम बता रहे हैं.

सोवियत दौर में अंतरिक्ष अभियानों का सिरमौर रहा रूस एक बार फिर अपनी स्थिति मजबूत कर लेना चाहता है. पहली बार अंतरिक्ष में इंसान को रूस ने भेजा था लेकिन बाद के सालों में खराब आर्थिक स्थिति और भ्रष्टाचार ने देश को अंतरिक्ष अभियानों के मामले में हाशिए पर ला दिया और इसी बीच नासा ने अपनी जगह मजबूत कर ली. दूसरी तरफ अंतरिक्ष को लेकर चीन की महत्वाकांक्षाएं भी उफान पर हैं. बीते कुछ दशकों में अमेरिका और चीन अंतरिक्ष के खोजी अभियानों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं.

अंतरिक्ष के लिए रेस

बीते सालों में अंतरिक्ष अभियानों के लिए होड़ मच गई है. रूस, अमेरिका, चीन, जापान, यूरोपीय देश, भारत के बाद यूएई भी इस होड़ में शामिल हो गया है. रूस इस रेस में एक बार फिर आगे चलने के लिए आतुर है. इस साल रूस अंतरिक्ष में पहली बार इंसान को भेजने के अभियान की 60वीं सालगिरह मना रहा है. अप्रैल 1961 में यूरी गागरीन ने अंतरिक्ष की यात्रा कर इतिहास रचा था और इसके दो साल बाद वैलेंटिना टेरेशकोवा ऐसा करने वाली पहली महिला बनीं. हालांकि इसके बाद रूस चांद और मंगल ग्रह के खोजी अभियानों में अमेरिका और चीन से पीछे रह गया.

रूस के साथ सहयोग मजबूत करने की कोशिश में जुटे चीन ने इसी बीच अपने दम पर एक सफल अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू कर दिया है. पिछले साल चीन ने तियानेवेन-1 प्रोब को मंगल ग्रह की जानकारी जुटाने भेजा जो अब भी लाल ग्रह की परिक्रमा कर रहा है. बीते दिसंबर में चीन चांद की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने धरती पर लाने में सफल हुआ. यह पिछले 40 सालों में इस तरह का यह पहला अभियान था. चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर नजर रखने वाले स्वतंत्र विश्लेषक चेन लान का कहना है,"चांद के लिए संयुक्त स्पेस स्टेशन बड़ी बात है. यह चीन के लिए अंतरिक्ष में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा, यह बहुत अहम है."

रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोसकॉस्मोस के प्रमुख दमित्री रोगोजिन ने ट्विटर पर लखा है कि उन्होंने सीएनएसए के प्रमुख झांग कजियान को रूस के पहले मॉडर्न लैंडर लूना 25 को लॉन्च करने मौके पर रूस बुलाया है. यह एक अक्टूबर को अंतरिक्ष के लिए रवाना होगा और 1976 के बाद यह रूस का चांद पर उतरने वाला पहला रोबोट होगा.

Ulbricht überreicht Gagarin Orden

पहले अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरीन

नासा की प्राथमिकताएं

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपनी नजरें अब मंगल ग्रह पर टिका दी है. उसके परसीवरेंस रोवर ने पिछले हफ्ते लाल ग्रह पर चहलकदमी शुरू कर दी. नासा मंगल ग्रह पर भी इंसानों को भेजने की फिराक में है हालांकि इसकी तैयारियां अभी बिल्कुल शुरुआती दोर में हैं. रूस और अमेरिका अंतरिक्ष के मामले में आपसी सहयोग करते रहे हैं. शीत युद्ध के प्रतिद्वंद्वियों के बीच अंतरिक्ष उन चुनिंदा चीजों में एक है जिनके लिए सहयोग जारी है. हालांकि रूस ने पिछले साल आर्टेमिस अकॉर्ड पर दस्तखत नहीं किया. यह अकॉर्ड चांद पर खोजी अभियानों के अमेरिका के नेतृत्व में कुछ देशों के बीच हुआ है. इसके तहत नासा चांद पर पहली महिला को भेजना चाहता है. महिला अंतरिक्ष यात्री के बाद पुरुष की बारी आएगी और इसके लिए साल 2024 तक का लक्ष्य तय किया गया है.

रोसकॉस्मोस को बीते साल एक झटका अमेरिकी कंपनी स्पेसएक्स ने भी दिया. अब तक अंतरिक्ष अभियानों में इंसानों वाली उड़ान के मामले में रूस का एकक्षत्र राज रहा है. अमेरिकी अभियानों के लिए इंसानों और मशीनों को भेजने का काम यही एजेंसी करती रही है. अब स्पेसएक्स ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर पहली बार इंसानों को भेज कर रूस का वर्चस्व तोड़ दिया है. इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अब इस क्षेत्र में प्रमुख खिलाड़ी बन कर उभरी है. वह 2023 तक आम लोगों को भी अंतरिक्ष की यात्रा पर ले जाने लगेगी. इसके लिए कई लोगों ने अपनी बुकिंग करानी भी शुरू कर दी है और इसमें सबसे ऊपर एक जापानी अरबपति का नाम है.

एनआर/एके(एएफपी)

वीडियो देखें 02:18

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