अंतरिक्ष में पहुंचा ब्लैकहोल हंटर | विज्ञान | DW | 14.06.2012
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विज्ञान

अंतरिक्ष में पहुंचा ब्लैकहोल हंटर

नासा एक ऐसी दूरबीन अंतरिक्ष में भेज दी है जो एक्स रे के जरिए ब्रह्मांड में ब्लैक होल ढूंढ निकालेगी. इससे तारों और उनके खत्म होने के बारे में और जानकारी मिलेगी. दूरबीन को लॉन्च ही बड़े दिलचस्प अंदाज में किया गया.

न्यूस्टार पहुंचा अंतरिक्ष

न्यूस्टार पहुंचा अंतरिक्ष

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने न्यूक्लियर स्पेक्ट्रोस्कोपिक टेलीस्कोप ऐरे न्यूस्टार को सफलता से लॉन्च कर दिया है. न्यूस्टर यानी ब्लैक होल हंटर को बुधवार को अमेरिका के मार्शल द्वीप से लॉन्च किया गया. इसे एक विमान के जरिए आसमान ले जाया गया. फिर एक रॉकेट के जरिए दूरबीन को अंतरिक्ष में भेजा गया. लेकिन आसमान से सीधे लॉन्च क्यों. इस सवाल के जवाब में नासा का कहना है कि विमान से उड़ान भरने का मतलब है कि जमीन के मुकाबले इसमें कम ऊर्जा लगेगी. पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण ऊपर जाते जाते कम होता है, यानी रॉकेट को आकाश से लॉन्च करना जमीन से लॉन्च करने से कहीं ज्यादा आसान है.

इस प्रॉजेक्ट के जरिए वैज्ञानिक स्पेस में ब्लैक होल और बड़े तारों के विस्फोट पर शोध कर सकेंगे. ब्लैक होल तब बनते हैं जब बड़े तारों की उम्र ढलने लगती है. ऐसे में या तो वह फटते हैं और आतिशबाजी जैसा एक बड़ा सा विस्फोट होता है या फिर वह अपने गुरुत्वाकर्षण की वजह से अपने आप में सिमटने लगते हैं और बेहद छोटे हो जाते हैं. इस छोटे से ब्लैक होल से बिजली की एक भी किरण नहीं भाग सकती, क्योंकि इसका गुरुत्वाकर्षण इतना ज्यादा होता है. और जब बिजली या प्रकाश की किरणों का प्रतिबिंब भी नहीं बनता तो यह काले रह जाते हैं.

न्यूस्टार पर काम कर रहीं प्रमुख शोधकर्ता फियोना हैरिसन कहती हैं कि न्यूस्टार से अंतरिक्ष के बारे में नया खुलासा होगा. कहती हैं कि केवल 20 साल पहले हमें लगता था कि ब्लैक होल बहुत ही कम पाए जाते हैं और खास चीज हैं, लेकिन अब हमें पता है कि हर बड़े तारामंडल के केंद्र में एक ब्लैक होल है और हमारी आकाशगंगा के बीचों बीच भी एक बहुत बड़ा ब्लैक होल है. "यह पहला टेलीस्कोप है जो बहुत ज्यादा ऊर्जा वाली एक्स रे किरणों को एक जगह सीमित करेगा. ऐसी तस्वीरें लेगा जो आम तस्वीरों से दस गुना ज्यादा साफ होंगी. यह पराबैंगनी किरणों के इस क्षेत्र में काम कर रहे बाकी टेलीस्कोपों के मुकाबले 100 गुना संवेदनशीन है."

न्यूस्टार के अंदर कई सारे शीशे लगे हुए हैं जो बिजली की किरणों को इधर उधर जाने से रोकते हैं जिससे तस्वीरों के लिए और रोशनी मिल सके और छवियां साफ बनें. 133 ऐसे आइनों के साथ इसमें सेंसर लगे हैं और एक खंबे से लेंस जुड़ा हैं. इस खंबे की वजह से लेंस को फोकस करने में आसानी होती है और इसकी लंबाई एक स्कूलबस जितनी है.

एमजी/ओएसजे(एएफपी)

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