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लंदन में 'आई एम कलाम'

१५ सितम्बर २०१०

'आई एम कलाम' फिल्म को लदंन फिल्म फेस्टिवल के लिए चुना गया है. फिल्म एक गरीब बच्चे की कहानी है. यह बच्चा भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से इतना प्रभावित हो जाता है कि अपना नाम कलाम रख लेता है.

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तस्वीर: AP

13 से 28 अक्तूबर तक चलने वाले लंदन फिल्म फेस्टिवल में खासतौर से भारतीय फिल्म 'आई एम कलाम' दिखाई जाएगी. कान फिल्म फेस्टिवल के बाद इस फिल्म को लंदन फिल्म फेस्टिवल के लिए भी नामांकित किया गया है. फिल्म को अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिल चुके हैं. लुकास इंटनेशनल फिल्म फेस्टिवल में आई एम कलाम को बेस्ट फीचर फिल्म चुना जा चुका है. इंटनेशनल फेडरेशन ऑफ सिने क्लब में कलाम से प्रभावित बच्चे की कहानी ने झंडे गाड़े हैं.

फिल्म की कहानी छोटू नाम के एक बच्चे पर आधारित है, जो बीकानेर में रहता है. परिवार की माली हालत खस्ता होने के बावजूद छोटू में पढ़ने की असीम ललक है. एक बार वह टीवी पर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को देखता है. कलाम बच्चों की पढ़ाई पर जोर देते रहे हैं और छोटू भी टीवी देखकर उनसे प्रेरित हो जाता है. इसके बाद छोटू बाल मजदूरी के जरिए पैसा जुटाने की कोशिश करता है. उसके साथ बुरे अनुभवों का दौर शुरू होता है.

छोटू का किरदार दिल्ली के हर्ष मायर ने निभाया है. असल जिंदगी में हर्ष खुद झुग्गियों में रहता है और ढाबे पर काम करता है. फिल्म के डायरेक्टर नीला महाब पांडा कहते हैं, ''फिल्म संदेश देती है कि किस तरह गुलाम रह चुके देशों का इंसान जीने के संघर्ष करता है. मैं समझता हूं कि ऐसे देशों में बाल मजदूरों पर ध्यान दिए बिना सिर्फ मुनाफे के बारे में सोचा जाता है."

15 दिन चलने वाले लंदन फिल्म फेस्टिवल में कुछ और भारतीय फिल्में भी दिखाई जाएंगी. इनमें आमिर खान की पत्नी किरण राव की फिल्म धोबी घाट, पान सिंह तोमर, हारूद, मी सिंधुताई और मिराल जैसी फिल्में शामिल हैं. मिराल तो फ्रांस, इटली और इस्राएल के फिल्मकारों ने बनाई है. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके की महिलाओं के संगठन पिंक साड़ी पर आधारित फिल्म भी लंदन में सच्ची कहानी बयान करेगी.

रिपोर्ट: पीटीआई/ओ सिंह

संपादन: ए कुमार

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