1. कंटेंट पर जाएं
  2. मेन्यू पर जाएं
  3. डीडब्ल्यू की अन्य साइट देखें

लीबिया पर ताकत के इस्तेमाल से बचा जाएः ब्रिक्स

१४ अप्रैल २०११

चीन के सान्या में चल रहे ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनती दिख रही है कि लीबिया में ताकत के इस्तेमाल से बचा जाए. बैठक में पास होने वाले प्रस्ताव के प्रारूप में ताकत के इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी गई है.

https://p.dw.com/p/10tD0
तस्वीर: AP

समाचार एजेंसी एएफपी को मिले प्रस्ताव के प्रारूप के मुताबिक ब्राजील, रूस, चीन, भारत, और दक्षिण अफ्रीका ने इस बयान पर सहमति जताई है. उन का कहना है, "हम इस सिद्धांत पर एकमत हैं कि ताकत का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए." उधर दोहा में पश्चिमी देशों के विदेश मंत्रियों की अरब जगत के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में लीबिया से कर्नल मुअम्मर गद्दाफी का शासन खत्म करने की मांग उठी. पश्चिमी देश और अरब जगत ने आपस में मिल कर लीबिया पर एक कॉन्टैक्ट ग्रुप भी बनाया है.

Verletzter libyscher Rebell kommt ins Krankenhaus
तस्वीर: AP

पश्चिम में मतभेद

लीबिया में कार्रवाई का नेतृत्व ब्रिटेन और फ्रांस कर रहे हैं लेकिन नाटो के दूसरे देशों से पर्याप्त सहयोग न मिलने के कारण उन्हें निराशा हो रही है. अमेरिका ने भी अपनी भूमिका समेट ली है. ऐसे मे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ है कि आखिर इस कार्रवाई के लिए धन कहां से आएगा. गुरुवार से नाटो विदेश मंत्रियों की एक बैठक बर्लिन में भी शुरू हो रही है जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भी शामिल होंगी.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून, यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख कैथरीन एश्टन, अरब लीग के प्रमुख अम्र मूसा, अफ्रीकी संघ और मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी के अधिकारी इस बारे में काहिरा में एक बैठक करने जा रहे हैं. उधर पैरिस में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने फ्रांस के राष्ट्रपति सारकोजी से मुलाकात की है. कॉन्टैक्ट ग्रुप की मांग सामने आने के बाद लीबिया के विद्रोहियों को धन और हथियार देने की बात कही गई है.

ब्रिक्स बैठक के मुद्दे

वहीं ब्रिक्स देशों ने अपना रुख साफ कर दिया है कि बातचीत के जरिए ही अरब जगत में लोकतांत्रिक बदलावों की शुरुआत हो. सान्या में पांच प्रमुख विकासशील देशों के प्रमुखों की बैठक में आपसी सहयोग के जरिए दुनिया की अर्थव्यवस्था और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी हिस्सेदारी और प्रभाव बढ़ाने पर चर्चा हुई. ब्रिक्स की बैठक से उम्मीद की जा रही है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा तंत्र, उपभोक्ता सामानों की कीमत का ऊपर नीचे होना और पर्यावरण बदलाव के साथ स्थायी विकास के मसले पर चर्चा होगी.

चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ, ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ, रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव, भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति जैकब जूमा ने सान्या में इस सम्मेलन की शुरुआत की. योजना यह है कि सम्मेलन की समाप्ति पर पांचों देशों की तरफ से संयुक्त बयान जारी किया जाएगा जिसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिति और विकास के मसले पर आपसी सहमति से घोषणाएं की जाएंगी.

ब्राजील, रूस, भारत, और चीन (ब्रिक) के इससे पहले दो सम्मेलन में हिस्सा ले चुके हैं जबकि दक्षिण अफ्रीका दिसंबर में इस गुट में आधिकारिक रूप से शामिल होने के बाद पहली बार बैठक में भाग ले रहा है. अब संगठन का नान भी ब्रिक्स हो गया है. इन पांचों देशों की जीडीपी दुनिया की जीडीपी की 18 फीसदी है जबकि इनका कारोबार दुनिया के कुल कारोबार का 15 फीसदी है. इन देशों में दुनिया की 42 फीसदी आबादी रहती है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः ए कुमार

इस विषय पर और जानकारी को स्किप करें

इस विषय पर और जानकारी