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रूढ़ियों की जकड़ से आज़ाद कराता इंटरनेट

२८ अप्रैल २००९

अफ्रीकी देश मोरक्को में कुल आबादी में 70 प्रतिशत लोगों की उम्र तीस साल से भी कम है. और वहां युवाओं के लिए इन दिनों इंटरनेट से बड़ी कोई चीज़ नहीं है. शहरों के साथ साथ गांवों में भी इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है.

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मोरक्को समाज का बदलता चेहरातस्वीर: AP

दिलचस्प बात यह है कि बुज़ुर्ग भी इंटरनेट का इस्तेमाल करने लगे हैं. कह सकते हैं कि वहां लोगों पर इंटरनेट का बुखार चढ़ा हुआ है. लेकिन फायदे के साथ साथ कुछ लोगों के लिए इंटरनेट मूसीबत भी बन रहा है. ब्लॉग लिखने वाले एक नौजवान को कुछ ही महीने पहले दो साल की सज़ा हो गई. दरअसल उसने अपने ब्लॉग में मोरक्को के शाह की आलोचना कर दी थी.

ग्यारह बारह साल के बच्चे स्कूल के बाद रोज़ाना दोपहर को इस इंटरनेट कैफे में आते हैं. अब्दुल्ला इस केफे का मालिक है. और वह एक छोटे से शहर में रहता है जो पर्यटन के लिए मशहूर माराकेश शहर से डेढ घंटे की ड्राइव पर है. अब्दुल्ला ने दो साल पहले बैंक से लोन लेकर यह दूकान ख़रीदी थी.

इस इलाक़े में ज्यादातर लोग खेती करते हैं. भेड़ चराते हैं. इस के उनकी जिंदगी ठीक ठाक चल रही है. फिर ऐसे माहौल में इंटरनेट की भला क्या जरूरत है. अबदुल्ला कहते हैं,

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मोरक्को की सांस्कृतिक छटातस्वीर: picture-alliance / Bildagentur Huber

"बच्चे और युवा कंप्यूटर गेम खेलने के लिए मेरे पास आते हैं. वे इन्हे ख़ुद डाउनलोड करते हैं. लोग चैटिंग के लिए आते हैं, या फिर टिकट बुक करने के लिए. कई लोगों को दूसरी जानकारी भी चाहिए होती हैं तो वो मेरे पास आते हैं.

मोरक्को की आबादी तीन करोड़ से कुछ ज्यादा है. उत्तरी अफ्रीकी में स्थित इस देश में हर साल एक लाख बीस हज़ार कंप्यूटर खरीदे जा रहे हैं. इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या लगभग 80 लाख हैं,और इनकी उम्र 15 से 35 साल के बीच है. ख़ासकर मोरक्को ब्लॉगिंग की दुनिया में खासा मशहूर है.

30 साल के राशिद जनकारी ने मोरक्को में इंटरनेट और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में बहुत काम किया है. वह पूरे देश में अलग अलग लोगों के साथ वेबसाईट ही नहीं चलाते बल्कि छात्रों को ट्रेनिंग भी देते है और नई नई तकनीकों को लोकप्रिय बनाने में भी योगदान दे रहे हैं. राशिद का मानना है कि मोरक्को में इंटरनेट का इस्तेमाल और विकास तेजी से बढ़ रहा है. खासकर युवा पीढी के लिए दुनिया को बेहतर तरीके से समझने और जानने के लिए इंटरनेट से अच्छा कोई माध्यम नही है. राशिद कहते हैं,

"मै यह कह सकता हूं कि इंटरनेट ने मोरक्को में हमारी आज़ादी के अलग अलग पहलुओं पर ज़ोर देने के लिए बहुत कुछ किया है. खास कर अपने अधिकारों को पाने के लिए हम शायद सामान्य मीडीया के ज़रिए इतना कुछ हासिल नही कर पाते.

राशिद ने राजधानी राबात में पत्रकारिता की पढ़ाई की है. अरब दुनिया में ब्लॉगर्स के सम्मेलनों के लिए उन्होने लेबनॉन जैसे देशों की भी यात्रा की है. वो बताते हैं.

Casablanca
कासाब्लांका, पुरातन भी आधुनिक भीतस्वीर: DW/Harjes

"अरब दुनिया में शायद मीडिया मोरक्को और लेबनॉन के अलावा कहीं और स्वतंत्र नही है. लेकिन जितने कदम हमने इंटरनेट के क्षेत्र में बढ़ाए हैं, बाकी क्षेत्रों में उतने ही हम पिछड़ रहे हैं. फिर भी दूसरे अरब देशों के मुकाबले इन दोनों देशों में एक बदलाव दिखाई दे रहा है. क्योंकि जनता की उस इच्छा को महत्व दिया जाता है जो वह इस तरह प्रकट कर पाती है.

कासाब्लांका शहर में रहने वाले मुनीर बेनसाल का कहना है कि प्रगति के बावजूद 2008 को इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों और ब्लॉगरों के लिए एक काला साल माना जा सकता है. मुनीर युवाओं के साथ काम करते हैं और उनका कहना है कि वह काफी डरे हुए हैं. 24 साल के एक इंजीनियर ने पिछले साल मोरक्को के बादशाह का फेसबुक पर नकली प्रोफाइल बना दिया था. दूसरे एक मामले में एक युवा ब्लॉगर ने बादशाह की आलोचना की क्योंकि वह बुनियादी संरचनाओं में सुधार देखना चाहता था.

दोनों ही युवाओं को गिरफ्तार किया गया और सज़ा दी गई. लेकिन बाद में बादशाह ने दोनों को माफ कर दिया. फिर भी जो मोरक्को में जो युवा इंटरनेट के ज़रिए अपने रुढ़िवादी समाज को पीछे छोड़ कुछ घंटों के लिए आज़ादी से अपनी बात कहने चाहते हैं, वे निराश हैं. मुनीर का कहना है.

"हम युवाओं ने किसी हद तक एक आज़ादी हासिल की थी. हमने इस आज़ादी के लिए संघर्ष किया था और अब इस तरह के मामलों को देखकर लगता है कि हमसे आज़ादी छीनी जा रही है.

इसीलिए फेसबुक या दूसरे मंचों पर युवा समर्थन जुटा रहे हैं और मिलकर गिरफ्तारियों का जवाब देने के तरीकों के बारे में सोच रहे हैं. खुद को सुरक्षित करने के लिए, यानी अपने लिए भी, लेकिन देश के विकास के लिए भी.

- प्रिया असेलबोर्न