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पसीना यानी शरीर का एसी

१९ जुलाई २०१३

गर्मी का मौसम, यानी पसीने का मौसम. परेशानी तब और बढ़ जाती है जब चिपचिपी गर्मी के साथ पसीने की बू भी आती है. लेकिन देखा जाए तो पसीना आना बहुत जरूरी है.

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तस्वीर: Reuters

कभी गर्मी से, कभी डर से, कभी बुखार के बाद. शरीर को ठंडा करने की प्रणाली है पसीना. लेकिन पसीना आता कैसे है. जर्मनी के डार्मश्टाड में त्वचा रोग विशेषज्ञ श्टेफान रापरिष बताते हैं, "पसीना आना हमारे शरीर का स्वाभाविक काम है. जिससे शरीर का तापमान नियंत्रण में रहता है. पसीना त्वचा पर अलग होता है और भाप बनकर निकलता है जिससे शरीर ठंडा होने लगता है. यह सिर्फ तब होता है जब जरूरत होती है, यानी तब, जब शरीर का तापमान एक सीमा से पार हो जाए."

ठंडा ठंडा कूल कूल

पसीना यानी आपके शरीर का अपना एसी. और पसीना आना बहुत जरूरी है क्योंकि शरीर गर्मी पैदा करता रहता है. हिलने डुलने से भी शरीर गर्म होता है. अगर शरीर को किसी काम में एक कैलोरी ऊर्जा लगानी होती है तो इस एक कैलोरी को खर्चने के लिए शरीर की कुल चार कैलरी खर्च होती हैं. तीन कैलोरी गर्मी बनकर शरीर से निकल जाती हैं.

अगर शरीर ने इस गर्मी को किसी तरह बाहर नहीं निकाला तो वह अंदर से पकने लगेगा. इसलिए पसीने की ग्रंथियां सक्रिय हो जाती हैं. हमारे शरीर में 20 से लेकर 30 लाख ग्रंथियां हैं. यह खून की नसों से पानी सोखती हैं और इन्हें त्वचा की ऊपरी सतह तक पहुंचाती हैं.

नींद में

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शरीर का एसीतस्वीर: picture-alliance/dpa

सोते वक्त भी हमारे शरीर से पसीना निकलता रहता है. एक रात में शरीर करीब आधा लीटर पानी खोता है. सौना में, कसरत करते हुए तो शरीर से और पसीना निकलता है. दिन में शरीर 10 लीटर पानी तक खो सकता है. पसीने में 99 प्रतिशत पानी होता है. बाकी नमक और चर्बी होती है. डॉ. रापरिष के मुताबिक, "पसीने में वैसे कोई गंध नहीं होती. पसीने की बदबू बैक्टीरिया से पैदा होती है. पसीने के साथ चर्बी निकलती है, बैक्टीरिया इस चर्बी को डीकंपोज यानी अपघटित करते हैं और इससे ब्यूटेरिक एसिड बनता है. इससे आती है पसीने में बदबू और जब आप कई दिनों तक नहाते नहीं हैं या अपने कपड़े नहीं धोते तो यह बदबू फैलने लगती है."

कैसे करें बदबू खत्म

इस बदबू को खत्म करने के लिए डीयो का इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन यह काम तभी करते हैं जब आप नहाने के बिलकुल बाद इन्हें लगाएं. वैसे गर्मी से राहत पाने के लिए अगर आप कोल्ड ड्रिंक पीते हैं, तो इसका असर बिलकुल उल्टा होगा. "कोल्ड ड्रिंक पीते ही आप ठंडक और तरोताजा महसूस करते हैं लेकिन इससे हमारे दिमाग में तापमान नियंत्रण केंद्र यानी थर्मोस्टेट को परेशानी होती है. वह सोचने लगता है, कि अब ठंड हो रही है और शरीर के तापमान को दोबारा बढ़ाने के लिए कई अंगों को फिर सक्रिय करना होगा. इस वजह से आपको बाद में और पसीना आने लगता है."

हाथी को पसीना नहीं आता, उसके शरीर में पसीने की ग्रंथियां नहीं होतीं...तो फिर यह गर्मी से कैसे बचते हैं- असल में वे बड़े कान से फैन और एसी का काम लेते हैं.

रिपोर्टः मानसी गोपालकृष्णन

संपादनः आभा मोंढे

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